{"_id":"626058645f251922b65b549c","slug":"health-badaun-news-bly4821758174","type":"story","status":"publish","title_hn":"जहरीला धुआं कर रहा बीमार, जिला अस्पताल में बुरा हाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जहरीला धुआं कर रहा बीमार, जिला अस्पताल में बुरा हाल
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जिला अस्पताल के आईसोलेशन वार्ड के पीछे जलाया गया कूड़ा। संवाद
- फोटो : BADAUN
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बदायूं। एक ओर खेतों में पराली जलाने पर किसानों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली जाती है वहीं दूसरी ओर राजकीय मेडिकल कॉलेज, जिला, महिला अस्पताल से लेकर शहर के चौराहों और सड़कों पर रोजाना कूड़ा जलाया जा रहा है। ऐसे में जहरीला धुआं बीमार कर दे रहा है। कूड़ा जलाते समय पर्यावरण को लेकर लापरवाही बरती जा रही गै तो नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेश की भी परवाह भी नहीं की जा रही।
वायु की गुणवत्ता हमेशा चर्चा रहती है। कई बार वायु की खराब हो रही गुणवत्ता को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक गंभीर टिप्पणी कर चुका है। वायु के बढ़ते एक्यूआई पर हल्ला तो होता है लेकिन जिम्मेदार अपनी जिम्मेदारी से बचते हैं। शहर के तमाम स्थानों पर यहां रोजाना सुबह कूड़े के ढेरों से उठता जहरीला धुआं न सिर्फ वायु में जहर घोलने का काम कर रहा है बल्कि लोगों को बीमार बना रहा है। दो दिन पहले राजकीय मेडिकल कॉलेज में कूड़े के ढेर और झाड़ियों में आग लगने पर फायर ब्रिगेड को बुलाना पड़ा था।
बुधवार को जिला अस्पताल में आईसोलेशन वार्ड के पीछे और जिला महिला अस्पताल में सीएमएस कार्यालय के पीछे कूड़े के ढेर में आग लगा दी गई। यहां धुआं उठने के कारण मरीजों को भी समस्या का सामना करना पड़ा। नगर पालिका के सफाई कर्मचारियों ने भी शहर में जगह-जगह कूड़े के ढेरों में आग लगाई। ऐसे में ब्राह्मपुर, नई सराय, पटियाली सराय, शहवाजपुर, पथिक चौक आदि स्थानों पर कूड़े के ढेरों से दोपहर तक निकलता धुआं हवा में जहर घोलने का काम करता रहा।
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पर्यावरण के साथ सेहत के लिए भी पहुंचाया जा रहा नुकसान
कूड़े के ढेरों में आग लगाकर सफाई कर्मचारी पर्यावरण के साथ लोगों की सेहत को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। गली चौराहों और सड़कों की बात दूर जिला अस्पताल और जिला महिला अस्पताल में भी रोजाना कूड़े के ढेरों में आग लगाई जा रही है। फिजीशियन डॉ. आशीष सारस्वत का कहना है कि कूड़े के ढेर से निकलने वाला धुआं सामान्य धुएं से कई गुना ज्यादा नुकसानदेह होता है। मौसम वैज्ञानिक डॉ. आलोक सागर गौतम का कहना है कि इस तरह का धुआं पर्यावरण को ज्यादा नुकसान पहुंचाता है। लगातार बढ़ता तापमान और खराब होती वायु की गुणवत्ता का एक कारण यह धुआं भी है। यह धुआं तेजी से ओजोन परत को नुकसान पहुंचाने का काम करता है।
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‘पर्यावरण ही नहीं पूरी मानव जाति के लिए खतरनाक है यह धुआं’
पर्यावरण का नुकसान पूरी मानव जाति के लिए नुकसान है। शहर में जिस तरह से कूड़े के ढेरों में आग लगा कर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने का काम किया जा रहा है वह चिंताजनक है। आखिर क्यों ऐसे लोगों पर कार्रवाई नहीं की जा रही।
-शांतनु दुबे, पर्यावरण प्रेमी
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कई सामाजिक संगठन पर्यावरण संरक्षण के लिए काम कर रहे हैं। पौधरोपण, जल संरक्षण की दिशा में भी काम कर रहे हैं, लेकिन सरकारी विभाग ही जिस तरह पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं वह बेहद गलत है। ऐसे मामलों में कार्रवाई जरूरी है।
-सुनील गुप्ता, पर्यावरण प्रेमी
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-शहर में जनता के लोग ही कूड़ा जला रहे हैं जिन्हें समझाया जाता है। अगर पालिका के कर्मचारी ऐसा करते मिले तो उनके खिलाफ हम कार्रवाई करेंगे। कूड़े का सही तरीके से निस्तारण होना चाहिए, उसे जलाना गलत है।
- दीपमाला गोयल, पालिकाध्यक्ष
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वायु की गुणवत्ता हमेशा चर्चा रहती है। कई बार वायु की खराब हो रही गुणवत्ता को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक गंभीर टिप्पणी कर चुका है। वायु के बढ़ते एक्यूआई पर हल्ला तो होता है लेकिन जिम्मेदार अपनी जिम्मेदारी से बचते हैं। शहर के तमाम स्थानों पर यहां रोजाना सुबह कूड़े के ढेरों से उठता जहरीला धुआं न सिर्फ वायु में जहर घोलने का काम कर रहा है बल्कि लोगों को बीमार बना रहा है। दो दिन पहले राजकीय मेडिकल कॉलेज में कूड़े के ढेर और झाड़ियों में आग लगने पर फायर ब्रिगेड को बुलाना पड़ा था।
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बुधवार को जिला अस्पताल में आईसोलेशन वार्ड के पीछे और जिला महिला अस्पताल में सीएमएस कार्यालय के पीछे कूड़े के ढेर में आग लगा दी गई। यहां धुआं उठने के कारण मरीजों को भी समस्या का सामना करना पड़ा। नगर पालिका के सफाई कर्मचारियों ने भी शहर में जगह-जगह कूड़े के ढेरों में आग लगाई। ऐसे में ब्राह्मपुर, नई सराय, पटियाली सराय, शहवाजपुर, पथिक चौक आदि स्थानों पर कूड़े के ढेरों से दोपहर तक निकलता धुआं हवा में जहर घोलने का काम करता रहा।
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पर्यावरण के साथ सेहत के लिए भी पहुंचाया जा रहा नुकसान
कूड़े के ढेरों में आग लगाकर सफाई कर्मचारी पर्यावरण के साथ लोगों की सेहत को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। गली चौराहों और सड़कों की बात दूर जिला अस्पताल और जिला महिला अस्पताल में भी रोजाना कूड़े के ढेरों में आग लगाई जा रही है। फिजीशियन डॉ. आशीष सारस्वत का कहना है कि कूड़े के ढेर से निकलने वाला धुआं सामान्य धुएं से कई गुना ज्यादा नुकसानदेह होता है। मौसम वैज्ञानिक डॉ. आलोक सागर गौतम का कहना है कि इस तरह का धुआं पर्यावरण को ज्यादा नुकसान पहुंचाता है। लगातार बढ़ता तापमान और खराब होती वायु की गुणवत्ता का एक कारण यह धुआं भी है। यह धुआं तेजी से ओजोन परत को नुकसान पहुंचाने का काम करता है।
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‘पर्यावरण ही नहीं पूरी मानव जाति के लिए खतरनाक है यह धुआं’
पर्यावरण का नुकसान पूरी मानव जाति के लिए नुकसान है। शहर में जिस तरह से कूड़े के ढेरों में आग लगा कर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने का काम किया जा रहा है वह चिंताजनक है। आखिर क्यों ऐसे लोगों पर कार्रवाई नहीं की जा रही।
-शांतनु दुबे, पर्यावरण प्रेमी
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कई सामाजिक संगठन पर्यावरण संरक्षण के लिए काम कर रहे हैं। पौधरोपण, जल संरक्षण की दिशा में भी काम कर रहे हैं, लेकिन सरकारी विभाग ही जिस तरह पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं वह बेहद गलत है। ऐसे मामलों में कार्रवाई जरूरी है।
-सुनील गुप्ता, पर्यावरण प्रेमी
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-शहर में जनता के लोग ही कूड़ा जला रहे हैं जिन्हें समझाया जाता है। अगर पालिका के कर्मचारी ऐसा करते मिले तो उनके खिलाफ हम कार्रवाई करेंगे। कूड़े का सही तरीके से निस्तारण होना चाहिए, उसे जलाना गलत है।
- दीपमाला गोयल, पालिकाध्यक्ष