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बजट न होने से 23 कर्मचारियों की सेवा समाप्त, कोरोना सैंपलिंग में सुस्ती
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बदायूं। तीसरी लहर से पहले जिले में कोरोना की जांच के लिए सैंपलिंग की रफ्तार धीमी हो गई है। स्वास्थ्य विभाग ने 23 कर्मचारियों की सेवाओं को समाप्त कर दिया है। इन कर्मचारियों की तैनाती पिछले वर्ष अतिरिक्त मानव संसाधन के रूप में की गई थी। 22 दिसंबर को एक नोटिस के साथ स्वास्थ्य विभाग ने बजट के अभाव में सेवा विस्तार से इनकार करते हुए इनकी सेवाओं को समाप्त कर दिया। एक वर्ष से ज्यादा समय तक इन कर्मचारियों को मानदेय का भुगतान पंचायती राज विभाग की ओर से मिले 2.50 करोड़ के बजट से किया गया।
कोरोना की पहली लहर से ज्यादा कहर दूसरी लहर ने बरपाया था। दूसरी लहर के दौरान जिले में 150 से ज्यादा लोगों की जान चली गई। हालांकि, सरकारी आंकड़े 97 लोगों की मौत की बात कहते हैं। दूसरी लहर से पहले सरकार ने ज्यादा से ज्यादा लोगों की जांच पर फोकस किया था। स्वास्थ्य विभाग के पास मानव संसाधनों की कमी के बीच स्थानीय स्तर पर तीन महीने के लिए योग्य लोगों से तय मानदेय पर काम लेने की अनुमति भी दी गई।
इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना गाइड लाइन के अनुसार नियत प्रक्रिया के तहत साक्षात्कार और योग्यता के आधार पर 23 लोगों को तैनाती दी थी। पहले तीन माह के बाद हालात के मद्देनजर इन कर्मचारियों को तीन-तीन माह का सेवा विस्तार दिया जाता रहा। उनके मानदेय भुगतान के लिए बजट भी था। दिसंबर से पहले पंचायती राज विभाग की ओर से स्वास्थ्य विभाग को दिया गया बजट खत्म हो गया। ऐसे में कर्मचारियों को सेवा विस्तार नहीं दिया जा सका और स्वास्थ्य विभाग ने इनकी सेवाओं को समाप्त कर दिया।
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अब कोरोना की तीसरी लहर ने दस्तक दे दी है। फरवरी के अंत तक तीसरी लहर चरम पर होगी, लेकिन इससे पहले कोरोना सैंपलिंग की रफ्तार थम गई है। दरअसल, अतिरिक्त मानव संसाधन के रूप में सैंपलिंग लेने के लिए रखे गए इन 23 कर्मचारियों से सेवा समाप्ति के बाद स्वास्थ्य विभाग काम ही नहीं ले रहा। इसका सीधा असर प्रतिदिन की सैंपलिंग पर हो रहा है।
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शासन से मिला बजट जारी कर दिया
जिला पंचायत राज अधिकारी श्रेया मिश्रा का कहना है कि शासन ने पंचायती राज विभाग के कोविड के मद में करीब 2.50 करोड़ का बजट दिया था। स्वास्थ्य विभाग को इस बजट का भुगतान कर दिया गया। अब पंचायती राज विभाग के पास इस मद में बजट नहीं है। आगे शासन स्तर से जो भी दिशा निर्देश मिलेंगे, उनका पालन किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग ने कितने कर्मचारियों को रखा था उनका मानदेय क्या था और उनको सेवा से पृथक क्यों किया गया इस बारे में संबंधित विभाग के अधिकारी ही बेहतर बता सकते हैं। कर्मचारियों की तैनाती और सेवा समाप्ति के बारे में मुझे जानकारी नहीं है।
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मानव संसाधन की कमी से रोज की सैंपलिंग में आई गिरावट
स्वास्थ्य विभाग के पास कोरोना सैंपलिंग के लिए मानव संसाधनों की कमी से प्रतिदिन होने वाली सैंपलिंग में कमी आई है। दूसरी लहर के दौरान जिले में प्रतिदिन करीब 2600 तक लोगों के सैंपल लिए जा रहे थे। तीसरी लहर से पहले अब प्रतिदिन अधिकतम 1800 लोगों के ही सैंपल लिए जा पा रहे हैं। जिले में पीएचसी, सीएचसी, जिला महिला और जिला अस्पताल के साथ मेडिकल कॉलेज में करीब 145 कर्मचारी ही सैंपलिंग कर रहे हैं। पहले कर्मचारियों की संख्या ज्यादा होने के चलते सैंपलिंग भी ज्यादा हो रही थी।
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कोरोना सैंपलिंग के लिए अतिरिक्त मानव संसाधन के रूप में जिन कर्मचारियों को रखा गया था उनके मानदेय के लिए अब बजट न होने से उनकी सेवाएं 22 दिसंबर के बाद नहीं ली जा रही हैं। पंचायती राज विभाग ने स्वास्थ्य विभाग को जो बजट उपलब्ध कराया था उसका मानदेय कोरोना गाइड लाइन के अनुसार कर्मचारियों को भुगतान के रूप में इस्तेमाल हो चुका है। सैंपलिंग में तेजी के लिए इन कर्मचारियों को फिर से काम पर लाने के लिए सेवा विस्तार की पत्रावली चल रही है।
-डॉ. अनिल शर्मा, एसीएमओ/नोडल अधिकारी संक्रामक रोग नियंत्रण विभाग
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कोरोना की पहली लहर से ज्यादा कहर दूसरी लहर ने बरपाया था। दूसरी लहर के दौरान जिले में 150 से ज्यादा लोगों की जान चली गई। हालांकि, सरकारी आंकड़े 97 लोगों की मौत की बात कहते हैं। दूसरी लहर से पहले सरकार ने ज्यादा से ज्यादा लोगों की जांच पर फोकस किया था। स्वास्थ्य विभाग के पास मानव संसाधनों की कमी के बीच स्थानीय स्तर पर तीन महीने के लिए योग्य लोगों से तय मानदेय पर काम लेने की अनुमति भी दी गई।
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इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना गाइड लाइन के अनुसार नियत प्रक्रिया के तहत साक्षात्कार और योग्यता के आधार पर 23 लोगों को तैनाती दी थी। पहले तीन माह के बाद हालात के मद्देनजर इन कर्मचारियों को तीन-तीन माह का सेवा विस्तार दिया जाता रहा। उनके मानदेय भुगतान के लिए बजट भी था। दिसंबर से पहले पंचायती राज विभाग की ओर से स्वास्थ्य विभाग को दिया गया बजट खत्म हो गया। ऐसे में कर्मचारियों को सेवा विस्तार नहीं दिया जा सका और स्वास्थ्य विभाग ने इनकी सेवाओं को समाप्त कर दिया।
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अब कोरोना की तीसरी लहर ने दस्तक दे दी है। फरवरी के अंत तक तीसरी लहर चरम पर होगी, लेकिन इससे पहले कोरोना सैंपलिंग की रफ्तार थम गई है। दरअसल, अतिरिक्त मानव संसाधन के रूप में सैंपलिंग लेने के लिए रखे गए इन 23 कर्मचारियों से सेवा समाप्ति के बाद स्वास्थ्य विभाग काम ही नहीं ले रहा। इसका सीधा असर प्रतिदिन की सैंपलिंग पर हो रहा है।
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शासन से मिला बजट जारी कर दिया
जिला पंचायत राज अधिकारी श्रेया मिश्रा का कहना है कि शासन ने पंचायती राज विभाग के कोविड के मद में करीब 2.50 करोड़ का बजट दिया था। स्वास्थ्य विभाग को इस बजट का भुगतान कर दिया गया। अब पंचायती राज विभाग के पास इस मद में बजट नहीं है। आगे शासन स्तर से जो भी दिशा निर्देश मिलेंगे, उनका पालन किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग ने कितने कर्मचारियों को रखा था उनका मानदेय क्या था और उनको सेवा से पृथक क्यों किया गया इस बारे में संबंधित विभाग के अधिकारी ही बेहतर बता सकते हैं। कर्मचारियों की तैनाती और सेवा समाप्ति के बारे में मुझे जानकारी नहीं है।
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मानव संसाधन की कमी से रोज की सैंपलिंग में आई गिरावट
स्वास्थ्य विभाग के पास कोरोना सैंपलिंग के लिए मानव संसाधनों की कमी से प्रतिदिन होने वाली सैंपलिंग में कमी आई है। दूसरी लहर के दौरान जिले में प्रतिदिन करीब 2600 तक लोगों के सैंपल लिए जा रहे थे। तीसरी लहर से पहले अब प्रतिदिन अधिकतम 1800 लोगों के ही सैंपल लिए जा पा रहे हैं। जिले में पीएचसी, सीएचसी, जिला महिला और जिला अस्पताल के साथ मेडिकल कॉलेज में करीब 145 कर्मचारी ही सैंपलिंग कर रहे हैं। पहले कर्मचारियों की संख्या ज्यादा होने के चलते सैंपलिंग भी ज्यादा हो रही थी।
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कोरोना सैंपलिंग के लिए अतिरिक्त मानव संसाधन के रूप में जिन कर्मचारियों को रखा गया था उनके मानदेय के लिए अब बजट न होने से उनकी सेवाएं 22 दिसंबर के बाद नहीं ली जा रही हैं। पंचायती राज विभाग ने स्वास्थ्य विभाग को जो बजट उपलब्ध कराया था उसका मानदेय कोरोना गाइड लाइन के अनुसार कर्मचारियों को भुगतान के रूप में इस्तेमाल हो चुका है। सैंपलिंग में तेजी के लिए इन कर्मचारियों को फिर से काम पर लाने के लिए सेवा विस्तार की पत्रावली चल रही है।
-डॉ. अनिल शर्मा, एसीएमओ/नोडल अधिकारी संक्रामक रोग नियंत्रण विभाग