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डेंगू से मुकाबले को जिला अस्पताल तैयार, चिकित्सकों की टीम गठित
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बदायूं। बरसात का मौसम है। बीमारियां पैर पसारेंगी खासतौर पर बुखार, जो साधारण बुखार से लेकर जानलेवा डेंगू तक हो सकता है। इसी को देखते हुए जिला अस्पताल ने इस बार पहले से तैयारियां पूर्ण कर ली हैं। अस्पताल प्रशासन ने एक डेंगू वार्ड बना दिया है और चिकित्सकों की एक टीम गठित कर दी है। इस टीम में दो फिजीशियन, दो बाल रोग विशेषज्ञ और एक महिला चिकित्सक रहेंगी। जरूरत पड़ने पर वे ब्लड आदि की जांचे पूर्ण कराएंगी, ताकि बुखार पीड़ित का इलाज हो सके।
मरीजों का सबसे ज्यादा भार जिला अस्पताल पर ही रहता है। कभी-कभी मरीजों की संख्या इतनी हो जाती है कि बेड तक खाली नहीं रहते। गत वर्ष जिले में फैले बुखार से यह हाल हो गया था कि अस्पताल में मरीजों को जमीन पर भर्ती करने की नौबत आ गई थी। एक-एक बेड पर दो-दो मरीज भर्ती किए गए थे। उस समय अस्पताल के कर्मचारी तक कम पड़ गए थे। ऐसी दोबारा स्थिति न हो, इसके लिए प्रभारी सीएमएस डॉ. उदयवीर सिंह ने बुखार के गंभीर मरीजों के लिए डेंगू वार्ड पहले से ही तैयार करा दिया है। उसमें मच्छरदानी आदि भी उपलब्ध करा दी गई हैं। विशेष रूप से सफाई कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वार्ड में किसी तरह की गंदगी न रहे। रोजाना दो-चार बार सफाई करनी है।
इसके अलावा इलाज के लिए चिकित्सकों की पांच सदस्यीय टीम गठित की गई है। इस टीम की जिम्मेदारी डॉ. शिवमोहन कमल को सौंपी गई है। डॉ. शिवमोहन कमल स्वयं फिजीशियन हैं। दूसरे फिजीशियन डॉ. एनके सिंह, बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. शिवकुमार अग्रवाल, बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. कप्तान सिंह यादव, पैथोलॉजिस्ट डॉ. मिति गुप्ता को लगाया गया है।
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बुखार से निपटने को ट्रेनिंग ले रहे डॉक्टर और कर्मचारी
-जिला अस्पताल के पैथोलॉजिस्ट डॉ. एपी गौतम और लैब टैक्नीशियन अमित कुमार ट्रेनिंग लेने लखनऊ गए हैं। उनकी तीन दिवसीय ट्रेनिंग है। डॉ. उदयवीर सिंह ने बताया कि यह ट्रेनिंग नए-नए तरह के बुखार जैसे चिकनगुनिया, जेई (जापानी इंसेफेलाइटिस) को जानने और उनसे निपटने के लिए है।
इमरजेंसी के बाहर बनवाई रैंप
-जिला अस्पताल की इमरजेंसी के बाहर पहले रैंप नहीं बनी थी। मरीजों को स्ट्रेचर पर ले जाने के दौरान उठाना पड़ता था। इससे कर्मचारियों को दिक्कत होती थी लेकिन अब इमरजेंसी के बाहर रैंप बनवा दी गई है। अब मरीजों को सीधे इमरजेंसी में ले जाया जा सकेगा।
जिला अस्पताल में बुखार के मरीजों के लिए चिकित्सकों की पांच सदस्यीय टीम गठित कर दी गई है। इससे उनके इलाज से लेकर ब्लड जांच कराने में कोई दिक्कत नहीं आएगी। हर समय चिकित्सक अस्पताल में मौजूद रहेंगे।
डॉ. उदयवीर सिंह, प्रभारी सीएमएस जिला अस्पताल
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मरीजों का सबसे ज्यादा भार जिला अस्पताल पर ही रहता है। कभी-कभी मरीजों की संख्या इतनी हो जाती है कि बेड तक खाली नहीं रहते। गत वर्ष जिले में फैले बुखार से यह हाल हो गया था कि अस्पताल में मरीजों को जमीन पर भर्ती करने की नौबत आ गई थी। एक-एक बेड पर दो-दो मरीज भर्ती किए गए थे। उस समय अस्पताल के कर्मचारी तक कम पड़ गए थे। ऐसी दोबारा स्थिति न हो, इसके लिए प्रभारी सीएमएस डॉ. उदयवीर सिंह ने बुखार के गंभीर मरीजों के लिए डेंगू वार्ड पहले से ही तैयार करा दिया है। उसमें मच्छरदानी आदि भी उपलब्ध करा दी गई हैं। विशेष रूप से सफाई कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वार्ड में किसी तरह की गंदगी न रहे। रोजाना दो-चार बार सफाई करनी है।
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इसके अलावा इलाज के लिए चिकित्सकों की पांच सदस्यीय टीम गठित की गई है। इस टीम की जिम्मेदारी डॉ. शिवमोहन कमल को सौंपी गई है। डॉ. शिवमोहन कमल स्वयं फिजीशियन हैं। दूसरे फिजीशियन डॉ. एनके सिंह, बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. शिवकुमार अग्रवाल, बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. कप्तान सिंह यादव, पैथोलॉजिस्ट डॉ. मिति गुप्ता को लगाया गया है।
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बुखार से निपटने को ट्रेनिंग ले रहे डॉक्टर और कर्मचारी
-जिला अस्पताल के पैथोलॉजिस्ट डॉ. एपी गौतम और लैब टैक्नीशियन अमित कुमार ट्रेनिंग लेने लखनऊ गए हैं। उनकी तीन दिवसीय ट्रेनिंग है। डॉ. उदयवीर सिंह ने बताया कि यह ट्रेनिंग नए-नए तरह के बुखार जैसे चिकनगुनिया, जेई (जापानी इंसेफेलाइटिस) को जानने और उनसे निपटने के लिए है।
इमरजेंसी के बाहर बनवाई रैंप
-जिला अस्पताल की इमरजेंसी के बाहर पहले रैंप नहीं बनी थी। मरीजों को स्ट्रेचर पर ले जाने के दौरान उठाना पड़ता था। इससे कर्मचारियों को दिक्कत होती थी लेकिन अब इमरजेंसी के बाहर रैंप बनवा दी गई है। अब मरीजों को सीधे इमरजेंसी में ले जाया जा सकेगा।
जिला अस्पताल में बुखार के मरीजों के लिए चिकित्सकों की पांच सदस्यीय टीम गठित कर दी गई है। इससे उनके इलाज से लेकर ब्लड जांच कराने में कोई दिक्कत नहीं आएगी। हर समय चिकित्सक अस्पताल में मौजूद रहेंगे।
डॉ. उदयवीर सिंह, प्रभारी सीएमएस जिला अस्पताल