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‘झूला तो पड़ गए...आमवा की डार पे जी’
ब्यूरो, अमर उजाला बदायूं
Updated Tue, 18 Aug 2015 12:44 AM IST
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सुबह से ही मेंहदी रचाकर, शृंगार कर महिलाओं और बालाओं ने अपने त्योहार को रंगीन बना दिया। घरों में गौरी की पूजा अर्चना के बाद पूड़ी-पुआ जैसे पकवान घर-घर तैयार किए गए। इस मौके पर ससुराल से मायके आईं विवाहिताएं अपनी संग-सहेलियों से मिलीं और एक दूसरे से अपने सुख-दुख साझा किए। देहात में देर शाम तक बालाएं मल्हारें गाती रहीं। सबसे लोकप्रिय मल्हार झूला तो पड़ गए...आमवा की डार पेजी की गूंज रही।
शहर में नगला मंदिर के बाहर बाग में तीज मेला का आयोजन हुआ। यहां झूले पड़े। महिलाओं और युवतियों ने झूलों पर पैंग तो बढ़ाईं तो मेले का लुफ्त भी लिया। चाट-पकौड़े आदि के ठेले-खोमचे लगे। शृंगारिक वस्तुओं की भी खूब बिक्री हुई। शहरों के पार्कों में भी भी मेला जैसा माहौल रहा।
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शहर में नगला मंदिर के बाहर बाग में तीज मेला का आयोजन हुआ। यहां झूले पड़े। महिलाओं और युवतियों ने झूलों पर पैंग तो बढ़ाईं तो मेले का लुफ्त भी लिया। चाट-पकौड़े आदि के ठेले-खोमचे लगे। शृंगारिक वस्तुओं की भी खूब बिक्री हुई। शहरों के पार्कों में भी भी मेला जैसा माहौल रहा।
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