{"_id":"6622efd828c5063a6b00cec4","slug":"government-employees-wandering-contract-employees-occupying-their-houses-badaun-news-c-123-1-sbly1018-117331-2024-04-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Budaun News: सरकारी कर्मचारी भटक रहे, ठेका कर्मचारियों का आवासों पर कब्जा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Budaun News: सरकारी कर्मचारी भटक रहे, ठेका कर्मचारियों का आवासों पर कब्जा
विज्ञापन
दबादला के बाद आवास में लगा कर्मचारी रूबी का ताला ।संवाद
बदायूं। जिला महिला अस्पताल में बने सरकारी आवासों पर ठेका कर्मचारी और सेवानिवृत कर्मचारी कब्जा जमाए बैठे हैं, जिससे सरकारी कर्मचारी आवास के लिए भटक रहे हैं। कर्मचारियों ने उच्चाधिकारियों को पत्र भेज कर नियमानुसार आवास आवंटित कराने की मांग की है।
दो माह पहले वार्ड आया रूबी शर्मा की एएनएम पद पर ब्लाॅक जगत सीएचसी पर नियुक्ति हो चुकी है। उन्होंने अब तक सरकारी आवास खाली नहीं किया गया है। नियमानुसार किसी कर्मचारी का ट्रांसफर या नियुक्ति कहीं दूसरी जगह हो जाती है तो एक सप्ताह में उसे आवास छोड़ना पड़ता है। इसको एएनएम की हठधर्मिता कहें या सीएमएस की मेहरबानी।
स्टाफ नर्स मीनू अग्रवाल और रिचा ने सरकारी आवास घेर रखे हैं, जबकि वह एनएचएम से तैनात हैं। नियमत: उनको सरकारी आवास आवंटित नहीं किया जा सकता। इसी तरह वार्ड आया कुसुम लता, दीपा ने भी आवास आवंटित करा रखे हैं। वहीं गार्ड के पद पर तैनात फैजान ने भी सीएमएस से मिलकर आवास आवंटित करा लिया है। यही कारण है कि फार्मासिस्ट पंकज कटियार, विनीत गुप्ता और एलटी दीपेश को आवास नहीं मिल पा रहे हैं। वह सभी किराए पर कमरा लेकर रहने को मजबूर हैं।
विज्ञापन
जो भी आवास आवंटित किए गए हैं वह हमारे समय के नहीं हैं। हमारे आने से पहले से ही कर्मचारी आवासों में रह रहे हैं। अगर किसी सरकारी कर्मचारी को आवास की जरूरत है तो वह प्रार्थना पत्र दे तो ताला लगे आवासों को खाली कराके उनको आवंटित कर दिया जाएगा। नियम विरुद्ध जो भी कर्मचारी आवासों में रह रहे हैं, वह उसने खाली करा लिए जाएंगे। -डॉ. इंदु कांत वर्मा, सीएमएस महिला अस्पताल
विज्ञापन
दो माह पहले वार्ड आया रूबी शर्मा की एएनएम पद पर ब्लाॅक जगत सीएचसी पर नियुक्ति हो चुकी है। उन्होंने अब तक सरकारी आवास खाली नहीं किया गया है। नियमानुसार किसी कर्मचारी का ट्रांसफर या नियुक्ति कहीं दूसरी जगह हो जाती है तो एक सप्ताह में उसे आवास छोड़ना पड़ता है। इसको एएनएम की हठधर्मिता कहें या सीएमएस की मेहरबानी।
विज्ञापन
स्टाफ नर्स मीनू अग्रवाल और रिचा ने सरकारी आवास घेर रखे हैं, जबकि वह एनएचएम से तैनात हैं। नियमत: उनको सरकारी आवास आवंटित नहीं किया जा सकता। इसी तरह वार्ड आया कुसुम लता, दीपा ने भी आवास आवंटित करा रखे हैं। वहीं गार्ड के पद पर तैनात फैजान ने भी सीएमएस से मिलकर आवास आवंटित करा लिया है। यही कारण है कि फार्मासिस्ट पंकज कटियार, विनीत गुप्ता और एलटी दीपेश को आवास नहीं मिल पा रहे हैं। वह सभी किराए पर कमरा लेकर रहने को मजबूर हैं।
विज्ञापन
जो भी आवास आवंटित किए गए हैं वह हमारे समय के नहीं हैं। हमारे आने से पहले से ही कर्मचारी आवासों में रह रहे हैं। अगर किसी सरकारी कर्मचारी को आवास की जरूरत है तो वह प्रार्थना पत्र दे तो ताला लगे आवासों को खाली कराके उनको आवंटित कर दिया जाएगा। नियम विरुद्ध जो भी कर्मचारी आवासों में रह रहे हैं, वह उसने खाली करा लिए जाएंगे। -डॉ. इंदु कांत वर्मा, सीएमएस महिला अस्पताल