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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Budaun News ›   Glander Persian deadly disease found in five horses in the border district

सीमावर्ती जिले में पांच घोड़ों में मिला घातक ग्लैंडर फारसी रोग

Mon, 31 Aug 2015 11:43 PM IST
कादरचौक(बदायूं)
कादरचौक(बदायूं) Updated Mon, 31 Aug 2015 11:43 PM IST
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गधा, घोड़ा, खच्चर आदि में घातक और जानलेवा संक्रामक रोग ग्लैंडर फारसी पड़ोसी जिला कासगंज मे पैर पसार चुका है। कासगंज के कस्बा गंजडुंडवारा में भट्ठों से लौटने वाले अश्व प्रजाति में इस तरह के लक्षण दिखाई दिए तो 50 अश्व प्रजाति के इन जानवरों के सैंपल जांच को भेजे गए। इनमें पांच घोड़ों में यह घातक संक्रमित बीमारी मिली। कासगंज प्रशासन ने इन पांचों घोड़ों को मारकर जमीन में दफना दिया है। अलीगढ़ के पुुसावली में भी एक घोड़े में इस प्रकार के लक्षण मिल चुके हैं। इस रोग के लक्षण मिलने से दहशत है। जिले के सीमावर्ती गंजडुंडवारा की दूरी कादरचौक से मात्र 20 किमी है। प्रतिदिन और साप्ताहिक बाजार में सैकड़ों अश्व प्रजाति के जानवरों के अलावा अन्य पशु कस्बा कादरचौक, नूरपुर, भदरौल आदि की बाजारों में आते हैं। घुमंतू, बावरिया लोग भी सैकड़ों की संख्या में गधा, घोड़ा, खच्चर आदि पालते हैं। दूसरे प्रदेशों से भी लेकर आते हैं। रमजानपुर, गौरामई, इस्माईलपुर के लोग घोड़ों को दिल्ली, झारखंड तक ले जाकर रोजगार करते हैं। भट्ठों पर काम करने वाले तमाम खच्चर दूसरे प्रांतों को भी ले जाए जाते हैं। यह बीमारी पशुओं से मनुष्यों में फैल सकती है।                                 
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लक्षण मिलने पर मार दिए जाते हैं पशु
कादरचौक। जिन अश्व प्रजातियों मे ग्लैंडर फारसी के लक्षण मिलेंगे, ऐसे अश्व प्रजाति के जानवरों को मारकर दफना देने के अलावा कोई इलाज नहीं है। जिसका पशु पालक को मुआवजा भी दिया जाता है। बदायूं में गत वर्ष दातागंज क्षेत्र में चार घोड़े इस लाइलाज बीमारी के मिले थे। इनको भी मार दिया गया था।
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ये है ग्लैंडर के लक्षण                                             
पशु के शरीर मे गांठें बनना नाक और आंख से पानी गिरना शरीर पर फफोले बन जाना, प्राथमिक पहचान है। पशु का सीरम लेकर हिसार जांच कराने के बाद ही इस रोग की पुष्टि हो पाती है।
जिले में है अश्व प्रजाति की आठ हजार संख्या है, जिनमें से दो चरणों मे चार सौ के सैंपल हिसार भेजे गए हैं। शेष के सैंपल लेने का काम चल रहा है। कादरचौक से 20, असरासी से आठ सैंपल हाल ही में लिए गए हैं।

वर्जन---
जबसे बदायूं में इस रोग के घोड़े मिले हैं। साप्ताहिक बाजारों में घोड़े लाने पर रोक लगा दी गई है। लगातार सैंपल लिये जा रहे हैं। पिछले साल चार घोड़े मार दिए जाने के बाद बदायूं में अभी तक कोई इस रोग से पीड़ित अश्व प्रजाति का जानवर नहीं मिला है। दूसरे जिलों से घोड़े आदि पशु  लाने पर जिलाधिकारी ने प्रतिबंध लगा दिया है।
- डॉ. डबल सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
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