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Budaun News: जलस्तर घटने से सिकुड़ा गंगा का दायरा
Mon, 25 Sep 2023 01:48 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
Updated Mon, 25 Sep 2023 01:48 AM IST
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कछला घाट पर जलस्तर कम होने पर खूंटे गाड कर रोकी गईं मोटर वोट। संवाट
उझानी (बदायूं)। पिछले आठ-नौ दिनों में गंगा नदी के जलस्तर में तेजी से गिरावट के साथ कछला घाट का भूगोल बिगड़ता जा रहा है। रविवार को भी ऐसा ही देखने को मिला। श्रद्धालुओं को किनारे तक पहुंचाने की बजाय मोटरबोट करीब 20 मीटर पहले ही फंस गईं। चालक उन्हें कमर तक गहराई वाले पानी में ही रोकने का मजबूर हो गए। मोटरबोट तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को पैदल अंदर तक जाना पड़ा।
जलस्तर गिरने के साथ मुख्य जलधारा कासगंज जिले के छोर वाले घाट की तरफ बढ़ती जा रही है। बाढ़ के दिनों में जलस्तर बदायूं वाले छोर पर बने पक्के घाट और आरती स्थल तक आ गया था। घाट पर प्रसाद बेचेन वाले हरीओम ने बताया कि जलस्तर कम हो जाने से पक्के घाट से गंगा की मुख्यधारा करीब 50 मीटर दूर हो गई है।
इसके बाद घाट पर आठ-नौ मीटर तक एक-डेढ़ फुट तक ही गहराई बची है। श्रद्धालुओं को डुबकी लगाने के लिए कासगंज जिले के छोर की तरफ बढ़ना पड़ता है। सबसे ज्यादा दिक्कत मोटरबोट चालकों को हो रही है। मोटर वोट कम गहराई में नहीं चलाई जा सकतीं। उन्हें गंगा में ही रोकना पड़ रहा है।
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मोटरबोट संचालक रिंकू के मुताबिक जलस्तर में कमी के चलते उन्हें दूसरी छोर के घाट पर कूच करना पड़ रहा है। आने वाले दिनों में ऐसे ही जलस्तर कम होता रहा तो गंगा की मुख्यधारा सिकुड़ कर कासगंज जिले के छोर के घाट के आसपास ही बहने के आसार बन रहे हैं। घाट पर पूर्वी ओर बालू के टापुओं पर उगे फूंस के सिवाय कुछ और नजर नहीं आता। कुछ इसी तरह करीब दो-तीन किलोमीटर पश्चिम की तरफ गांव पिपरौल और हुसैनपुर खेड़ा के आसपास भी गंगा का फांट चपेट में आ गया है।
जलस्तर घटने-बढ़ने पर प्रसाद विक्रेताओं को नुकसान
कछला में गंगाघाट के दोनों ओर आठ दर्जन से अधिक प्रसाद और खानपान की वस्तुओं की झोंपड़ीनुमा दुकानें हैं। कई लोग ठेला आदि पर भी प्रसाद बेचते हैं। गंगा का जलस्तर बढ़ने पर दुकानदारों को अपना सामान समेट कर दूर खिसना मुश्किल हो जाता है। कभी-कभी तो उनकी झोंपड़ीनुमा दुकानें गंगा में बह जाती हैं। जलस्तर कम होने पर उन्हें फिर से घाट पर जलस्तर के करीब झोंपड़ी तैयार करनी पड़ती है। इसका सबसे ज्यादा नुकसान उन्हें आर्थिक रूप से उठाना पड़ता है। प्रसाद विकेताओं में ओमकार ने बताया कि पिछले साल उन्हें झोंपड़ी तीन बार तैयार करनी पड़ी थी। दो बार तक गंगा में बह भी गई।
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जलस्तर गिरने के साथ मुख्य जलधारा कासगंज जिले के छोर वाले घाट की तरफ बढ़ती जा रही है। बाढ़ के दिनों में जलस्तर बदायूं वाले छोर पर बने पक्के घाट और आरती स्थल तक आ गया था। घाट पर प्रसाद बेचेन वाले हरीओम ने बताया कि जलस्तर कम हो जाने से पक्के घाट से गंगा की मुख्यधारा करीब 50 मीटर दूर हो गई है।
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इसके बाद घाट पर आठ-नौ मीटर तक एक-डेढ़ फुट तक ही गहराई बची है। श्रद्धालुओं को डुबकी लगाने के लिए कासगंज जिले के छोर की तरफ बढ़ना पड़ता है। सबसे ज्यादा दिक्कत मोटरबोट चालकों को हो रही है। मोटर वोट कम गहराई में नहीं चलाई जा सकतीं। उन्हें गंगा में ही रोकना पड़ रहा है।
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मोटरबोट संचालक रिंकू के मुताबिक जलस्तर में कमी के चलते उन्हें दूसरी छोर के घाट पर कूच करना पड़ रहा है। आने वाले दिनों में ऐसे ही जलस्तर कम होता रहा तो गंगा की मुख्यधारा सिकुड़ कर कासगंज जिले के छोर के घाट के आसपास ही बहने के आसार बन रहे हैं। घाट पर पूर्वी ओर बालू के टापुओं पर उगे फूंस के सिवाय कुछ और नजर नहीं आता। कुछ इसी तरह करीब दो-तीन किलोमीटर पश्चिम की तरफ गांव पिपरौल और हुसैनपुर खेड़ा के आसपास भी गंगा का फांट चपेट में आ गया है।
जलस्तर घटने-बढ़ने पर प्रसाद विक्रेताओं को नुकसान
कछला में गंगाघाट के दोनों ओर आठ दर्जन से अधिक प्रसाद और खानपान की वस्तुओं की झोंपड़ीनुमा दुकानें हैं। कई लोग ठेला आदि पर भी प्रसाद बेचते हैं। गंगा का जलस्तर बढ़ने पर दुकानदारों को अपना सामान समेट कर दूर खिसना मुश्किल हो जाता है। कभी-कभी तो उनकी झोंपड़ीनुमा दुकानें गंगा में बह जाती हैं। जलस्तर कम होने पर उन्हें फिर से घाट पर जलस्तर के करीब झोंपड़ी तैयार करनी पड़ती है। इसका सबसे ज्यादा नुकसान उन्हें आर्थिक रूप से उठाना पड़ता है। प्रसाद विकेताओं में ओमकार ने बताया कि पिछले साल उन्हें झोंपड़ी तीन बार तैयार करनी पड़ी थी। दो बार तक गंगा में बह भी गई।