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Budaun News: डराने लगा गंगा का जलस्तर, कई गांव कटान के मुहाने पर
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उसहैत में इस तरफ कटान रोकने के लिए बाढ़ खंड की ओर से तैयारी की गई है। संवाद
बदायूं। लगातार बारिश होने की वजह से गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। इस वजह से गंगा किनारे बसे गांवों के ग्रामीणों की धड़कनें पूर्व के सालों में आई बाढ़ के दृश्यों का ध्यान करते हुए तेज होने लगी हैं। बता दें कि प्रशासन हर साल करोड़ों रुपये खर्च कर बाढ़ सुरक्षा और कटान रोकने के दावे करता है, लेकिन हकीकत यही है कि कई गांवों का अस्तित्व खत्म हो चुका है। कई गांव कटान के मुहाने पर हैं।
गंगा नदी सहसवान से लेकर कछला, कादरचौक, उसहैत होते हुए शाहजहांपुर की ओर जाती है। पिछले वर्षों की भांति इस बार भी गंगा और रामगंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। सहसवान क्षेत्र में कई गांव गंगा नदी के किनारे बसे हैं। यहां पर रहने वाले लोगों को काफी परेशानी होती है। यही हाल उसहैत क्षेत्र के जटा, ठकुरी नगला, जसवंत नगला, प्रेमी नगला, सिठोली खाम, कदम नगला, अहमद नगर बछौरा, कमल नगला, कटरा सहादतगंज, रमपुरा, भुंडी, ललोमई, बेहटी, असमयारफतपुर, कोनका नगला गांव का है।
दातागंज क्षेत्र में रामगंगा किनारे के नगरिया खनू, कुंडरा मजरा, नवादा बदन, अकत, लालपुर खादर, नौनी, टिकना, रुकुमपुर समेत 30 से अधिक गांव बाढ़ की जद में हैं। लगातार गंगा का पानी बढ़ रहा है। आठ जुलाई को नरौरा धाम से 10,395 क्यूसेक पानी छोड़ा गया, 10 जुलाई को 57,677 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। आठ जुलाई को कछला में गंगा का गेज 160.61 मीटर रिकॉर्ड हुआ था। शुक्रवार को बढ़कर 161.34 हो गया है। आने वाले समय में पानी और बढ़ने की संभावना है।
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बाढ़ ने दातागंज के गांवों का बदल दिया भूगोल
दातागंज। रामगंगा की बाढ़ ने कई गांवों का भूगोल बदल दिया है। कई गांव खाली हो चुके हैं तो कई गांवों के लोग हर साल बाढ़ आने पर पलायन कर जाते हैं।
रामगंगा के किनारे बसे ग्राम पंचायत मौसमपुर के मजरा जरतौली के करीब 50 परिवार लगभग 10 किलोमीटर दूर कोड़ा जयकरण के जंगल में बसे हुए हैं। प्रशासन ने उन्हें वहां जमीन आवंटित की, जबकि इतने ही परिवार पिपला गांव में बस गए। इन परिवारों को आज भी खेती करने के लिए रोज कई किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है।
ग्राम पंचायत रयपुरा का मजरा कटकौरा पूरी तरह नदी में समा चुका है। कभी हजारों की आबादी वाला गांव अब केवल सरकारी अभिलेखों और लोगों की यादों में रह गया है। चार दशक पहले लगभग चार हजार की आबादी वाला रमपुरा गांव पांच हिस्सों में बंट चुका है। आधे से अधिक परिवार पलायन कर चुके हैं। कभी समृद्ध गांवों में गिने जाने वाले चितरी की आबादी भी पांच हजार से सिमटकर सैकड़ों में रह गई है।
यहां के लोग अलग-अलग स्थानों पर जाकर बस गए हैं। रामगंगा पार स्थित कुंडरा मजरा भी छह छोटे-छोटे गांवों में बंट चुका है। नौनी, टिकना, रुकुमपुर, नवादा, बदन सहित कई गांव हर साल कटान का दर्द झेल रहे हैं। कटकौरा पूरी तरह समाप्त हो गया। रमपुरा पांच हिस्सों में बंट चुका है। संवाद
गांव और नदी के बीच की दूरी बहुत कम
मकरंदापुर गांव तीन बार उजड़कर अलग-अलग स्थानों पर बस चुका है। पिछले वर्ष हुए कटान के बाद गांव और नदी के बीच मात्र 20 मीटर की दूरी बची है। यहां प्रशासन पिछले एक वर्ष से बचाव कार्य करा रहा है, लेकिन अब तक केवल 20 से 25 मीटर तक ही कार्य पूरा हो सका है।
जिले में बनाई गईं 19 बाढ़ चौकियां
बाढ़ काल शुरू होने के साथ ही जिले में 19 बाढ़ चौकी स्थापित की गई हैं। इन चौकियों पर विकास विभाग से लेकर स्वास्थ्य विभाग, पंचायती राज विभाग, राजस्व विभाग आदि विभागों के कर्मचारियों की तैनाती की गई है। ये बाढ़ आने की दशा में अपनी रिपोर्ट तहसील को देंगे। तहसील से यह रिपोर्ट जिला मुख्यालय पहुंचेगी।
-- -- ग्रामीणों ने बताई अपनी-अपनी परेशानी-- -
पिछले साल भी गांव में बाढ़ आई थी, जिस वजह से दो महीने पहले ही गांव छोड़ना पड़ गया था। इस बार अब तक कोई अधिकारी गांव में नहीं आया है। इस बार क्या होगा, अभी पता नहीं है। - शीला, जटा
इस साल शुरू से ही बारिश होने लगी है, पिछले साल भी ऐसा ही मौसम था। गांव में पानी घुस गया था। इस साल भी अगर ऐसा ही हुआ तो काफी परेशानी हो जाएगी। - अकीला, प्रेमी नगला
सभी 19 बाढ़ चौकियों को अलर्ट कर दिया गया है कि वह अपने-अपने क्षेत्रों में निगाह बनाए रखें। गांव वालों को गंगा व रामगंगा के किनारे जाने से मना करें। साथ ही वहां के अपडेट देते रहें। - त्रिभुवन, एडीएम एफआर
गंगा में लगातार पानी बढ़ रहा है। इसको लेकर सभी को निर्देशित कर दिया गया है। सहसवान में जाकर आज स्थिति देखी थी, अब तक स्थिति सामान्य है। लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। -उमेश चंद्र, एक्सईएन बाढ़ खंड
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गंगा नदी सहसवान से लेकर कछला, कादरचौक, उसहैत होते हुए शाहजहांपुर की ओर जाती है। पिछले वर्षों की भांति इस बार भी गंगा और रामगंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। सहसवान क्षेत्र में कई गांव गंगा नदी के किनारे बसे हैं। यहां पर रहने वाले लोगों को काफी परेशानी होती है। यही हाल उसहैत क्षेत्र के जटा, ठकुरी नगला, जसवंत नगला, प्रेमी नगला, सिठोली खाम, कदम नगला, अहमद नगर बछौरा, कमल नगला, कटरा सहादतगंज, रमपुरा, भुंडी, ललोमई, बेहटी, असमयारफतपुर, कोनका नगला गांव का है।
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दातागंज क्षेत्र में रामगंगा किनारे के नगरिया खनू, कुंडरा मजरा, नवादा बदन, अकत, लालपुर खादर, नौनी, टिकना, रुकुमपुर समेत 30 से अधिक गांव बाढ़ की जद में हैं। लगातार गंगा का पानी बढ़ रहा है। आठ जुलाई को नरौरा धाम से 10,395 क्यूसेक पानी छोड़ा गया, 10 जुलाई को 57,677 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। आठ जुलाई को कछला में गंगा का गेज 160.61 मीटर रिकॉर्ड हुआ था। शुक्रवार को बढ़कर 161.34 हो गया है। आने वाले समय में पानी और बढ़ने की संभावना है।
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बाढ़ ने दातागंज के गांवों का बदल दिया भूगोल
दातागंज। रामगंगा की बाढ़ ने कई गांवों का भूगोल बदल दिया है। कई गांव खाली हो चुके हैं तो कई गांवों के लोग हर साल बाढ़ आने पर पलायन कर जाते हैं।
रामगंगा के किनारे बसे ग्राम पंचायत मौसमपुर के मजरा जरतौली के करीब 50 परिवार लगभग 10 किलोमीटर दूर कोड़ा जयकरण के जंगल में बसे हुए हैं। प्रशासन ने उन्हें वहां जमीन आवंटित की, जबकि इतने ही परिवार पिपला गांव में बस गए। इन परिवारों को आज भी खेती करने के लिए रोज कई किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है।
ग्राम पंचायत रयपुरा का मजरा कटकौरा पूरी तरह नदी में समा चुका है। कभी हजारों की आबादी वाला गांव अब केवल सरकारी अभिलेखों और लोगों की यादों में रह गया है। चार दशक पहले लगभग चार हजार की आबादी वाला रमपुरा गांव पांच हिस्सों में बंट चुका है। आधे से अधिक परिवार पलायन कर चुके हैं। कभी समृद्ध गांवों में गिने जाने वाले चितरी की आबादी भी पांच हजार से सिमटकर सैकड़ों में रह गई है।
यहां के लोग अलग-अलग स्थानों पर जाकर बस गए हैं। रामगंगा पार स्थित कुंडरा मजरा भी छह छोटे-छोटे गांवों में बंट चुका है। नौनी, टिकना, रुकुमपुर, नवादा, बदन सहित कई गांव हर साल कटान का दर्द झेल रहे हैं। कटकौरा पूरी तरह समाप्त हो गया। रमपुरा पांच हिस्सों में बंट चुका है। संवाद
गांव और नदी के बीच की दूरी बहुत कम
मकरंदापुर गांव तीन बार उजड़कर अलग-अलग स्थानों पर बस चुका है। पिछले वर्ष हुए कटान के बाद गांव और नदी के बीच मात्र 20 मीटर की दूरी बची है। यहां प्रशासन पिछले एक वर्ष से बचाव कार्य करा रहा है, लेकिन अब तक केवल 20 से 25 मीटर तक ही कार्य पूरा हो सका है।
जिले में बनाई गईं 19 बाढ़ चौकियां
बाढ़ काल शुरू होने के साथ ही जिले में 19 बाढ़ चौकी स्थापित की गई हैं। इन चौकियों पर विकास विभाग से लेकर स्वास्थ्य विभाग, पंचायती राज विभाग, राजस्व विभाग आदि विभागों के कर्मचारियों की तैनाती की गई है। ये बाढ़ आने की दशा में अपनी रिपोर्ट तहसील को देंगे। तहसील से यह रिपोर्ट जिला मुख्यालय पहुंचेगी।
पिछले साल भी गांव में बाढ़ आई थी, जिस वजह से दो महीने पहले ही गांव छोड़ना पड़ गया था। इस बार अब तक कोई अधिकारी गांव में नहीं आया है। इस बार क्या होगा, अभी पता नहीं है। - शीला, जटा
इस साल शुरू से ही बारिश होने लगी है, पिछले साल भी ऐसा ही मौसम था। गांव में पानी घुस गया था। इस साल भी अगर ऐसा ही हुआ तो काफी परेशानी हो जाएगी। - अकीला, प्रेमी नगला
सभी 19 बाढ़ चौकियों को अलर्ट कर दिया गया है कि वह अपने-अपने क्षेत्रों में निगाह बनाए रखें। गांव वालों को गंगा व रामगंगा के किनारे जाने से मना करें। साथ ही वहां के अपडेट देते रहें। - त्रिभुवन, एडीएम एफआर
गंगा में लगातार पानी बढ़ रहा है। इसको लेकर सभी को निर्देशित कर दिया गया है। सहसवान में जाकर आज स्थिति देखी थी, अब तक स्थिति सामान्य है। लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। -उमेश चंद्र, एक्सईएन बाढ़ खंड

उसहैत में इस तरफ कटान रोकने के लिए बाढ़ खंड की ओर से तैयारी की गई है। संवाद

उसहैत में इस तरफ कटान रोकने के लिए बाढ़ खंड की ओर से तैयारी की गई है। संवाद

उसहैत में इस तरफ कटान रोकने के लिए बाढ़ खंड की ओर से तैयारी की गई है। संवाद

उसहैत में इस तरफ कटान रोकने के लिए बाढ़ खंड की ओर से तैयारी की गई है। संवाद

उसहैत में इस तरफ कटान रोकने के लिए बाढ़ खंड की ओर से तैयारी की गई है। संवाद