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Budaun News: खतरे के निशान से पांच सेमी दूर गंगा, नरौरा बैराज से छोड़ा गया पानी
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बाढ़ खंड की जलस्तर दर्शाती मंगलवार की रिपोर्ट। संवाद
बदायूं/ कछला। नरौरा बैराज से मंगलवार को 1.22 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद गंगा उफान पर है। इससे पहले कछला में मीटर गेज पर खतरे के निशान से गंगा महज पांच सेमी दूर है। ऐसे में बुधवार तक पानी खतरे के निशान को पार जा सकता है।
उत्तराखंड में पिछले दिनों हुई भारी बारिश के बाद से गंगा में जलस्तर बढ़ने लगा। सोमवार को कछला घाट पर गंगा का जलस्तर 162.33 मीटर था। इसी दिन 78 हजार क्यूसेक पानी नरौरा बैराज से छोड़ा गया था। इससे जलस्तर में 12 सेमी की वृद्धि हुई। अब जलस्तर 162.45 मीटर पहुंच गया है। यहां पर खतरे का निशान 162.50 मीटर है। मंगलवार को सुबह नरौरा बैराज से 1.22 लाख क्यूसेक पानी फिर छोड़ा गया है। यह पानी आने पर जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर जा सकता है। बुधवार की सुबह तक जलस्तर बढ़ने का असर दिखेगा।
वहीं, पिपरौल बाढ़ खंड चौकी पर बाढ़ से निपटने की तैयारियां कर ली गई हैं। इसके अलावा कछला ननाखेड़ा रोड पर बहोरा नगला और चौसिंगा के सामने से गुजर रही सड़क के मुख्य मार्ग पर पानी भरने के बाद आवागमन प्रभावित होने की संभावना है। इसके लिए कोई इंतजाम नहीं किया गया है। पानी बढ़ने के साथ ही गंगा किनारे के गांवों में लोग सतर्क हो गए हैं। बाढ़ खंड को चेताने के लिए बैठकों का दौर चल रहा है।
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गंगा किनारे के गांवों में किए गए बाढ़ से बचाव के इंतजाम
उसहैत। क्षेत्र में गंगा का करीब आठ किलोमीटर का तट है। पिछले चार महीने से बाढ़ खंड बाढ़ बचाव की तैयारियों में जुटा हुआ था। भुंडी गांव के पास स्पर व पैचिंग का कार्य व कटरा के पास भी स्पर का काम किया गया था। स्पर गंगा के पानी के तेज बहाव को मोड़ने का कार्य करता है। बाढ़ खंड के जेई राधे श्याम ने बताया कि दो दिनों से पानी बढ़ रहा है, लेकिन अभी किसी भी गांव में पानी का खतरा नहीं है। अटैना पुल पर लगे मीटर गेज में पानी 162 मीटर पर चल रहा है, जो खतरे के निशान से नीचे है। आज नरौरा बैराज से पानी छोडे़ जाने के बाद यहां बु़धवार की सुबह तक पहुंचने की उम्मीद है। बाढ़ खंड सतर्क है और किसी भी तरह की स्थिति के लिए नजर बनाए हुए है। संवाद
आसपास के गांव के लोग सतर्ककादरचौक। ननाखेड़ा और पलिया की ओर से गंगा का पानी आ जाता है। इसमें भैंसोर नदी के भदरौल इलाके में मिलकर खेतों और गांवों में फैल जाता है। इसलिए हाल ही में छोड़े गए पानी को देखते हुए आसपास गांव के लोग सतर्क हो गए हैं। खुड़वारा से राम सहाय नगला तक जमीराना बांध है। वह पहले तीन लाख क्यूसेक क्षमता का था। उसकी क्षमता 2014 में पांच लाख क्यूसेक तक की कर दी गई है। यहां गंगा का पानी भैंसोर नदी के पानी से मिलने के बाद क्षेत्र जलमग्न हो जाता है और गनियाई, जैतपुर, कौआनगला, खुड़वारा गांव में पानी भरने लगता है। इस तरफ अभी बाढ़ खंड का कोई ध्यान नहीं है। गंगा में पानी बढ़ने के साथ ही इन चार गांवों के लोग दहशत में हैं। संवाद
गंगा-महावा बांध के करीब पहुंचा गंगा का पानी
सहसवान। गंगा-महावा बांध के उस पार बसे भमरौलिया, वीर सहाय नगला, खागी नगला आदि गांवों के पास भी बाढ़ का पानी पहुंच गया है। किसी गांव में अभी पानी नहीं भरा है। बहाव तेज होने के कारण जामनी गांव के सामने कटान शुरू हो गया है। बाढ़ खंड के अधिकारियों का कहना है कि इससे अभी बांध व तटबंधों को कोई खतरा नहीं है। ईख की फसल में पानी भर गया है। एसडीएम प्रेमपाल सिंह ने बताया कि अभी कहीं खतरे की स्थिति नहीं है। संवाद
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उत्तराखंड में पिछले दिनों हुई भारी बारिश के बाद से गंगा में जलस्तर बढ़ने लगा। सोमवार को कछला घाट पर गंगा का जलस्तर 162.33 मीटर था। इसी दिन 78 हजार क्यूसेक पानी नरौरा बैराज से छोड़ा गया था। इससे जलस्तर में 12 सेमी की वृद्धि हुई। अब जलस्तर 162.45 मीटर पहुंच गया है। यहां पर खतरे का निशान 162.50 मीटर है। मंगलवार को सुबह नरौरा बैराज से 1.22 लाख क्यूसेक पानी फिर छोड़ा गया है। यह पानी आने पर जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर जा सकता है। बुधवार की सुबह तक जलस्तर बढ़ने का असर दिखेगा।
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वहीं, पिपरौल बाढ़ खंड चौकी पर बाढ़ से निपटने की तैयारियां कर ली गई हैं। इसके अलावा कछला ननाखेड़ा रोड पर बहोरा नगला और चौसिंगा के सामने से गुजर रही सड़क के मुख्य मार्ग पर पानी भरने के बाद आवागमन प्रभावित होने की संभावना है। इसके लिए कोई इंतजाम नहीं किया गया है। पानी बढ़ने के साथ ही गंगा किनारे के गांवों में लोग सतर्क हो गए हैं। बाढ़ खंड को चेताने के लिए बैठकों का दौर चल रहा है।
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गंगा किनारे के गांवों में किए गए बाढ़ से बचाव के इंतजाम
उसहैत। क्षेत्र में गंगा का करीब आठ किलोमीटर का तट है। पिछले चार महीने से बाढ़ खंड बाढ़ बचाव की तैयारियों में जुटा हुआ था। भुंडी गांव के पास स्पर व पैचिंग का कार्य व कटरा के पास भी स्पर का काम किया गया था। स्पर गंगा के पानी के तेज बहाव को मोड़ने का कार्य करता है। बाढ़ खंड के जेई राधे श्याम ने बताया कि दो दिनों से पानी बढ़ रहा है, लेकिन अभी किसी भी गांव में पानी का खतरा नहीं है। अटैना पुल पर लगे मीटर गेज में पानी 162 मीटर पर चल रहा है, जो खतरे के निशान से नीचे है। आज नरौरा बैराज से पानी छोडे़ जाने के बाद यहां बु़धवार की सुबह तक पहुंचने की उम्मीद है। बाढ़ खंड सतर्क है और किसी भी तरह की स्थिति के लिए नजर बनाए हुए है। संवाद
आसपास के गांव के लोग सतर्ककादरचौक। ननाखेड़ा और पलिया की ओर से गंगा का पानी आ जाता है। इसमें भैंसोर नदी के भदरौल इलाके में मिलकर खेतों और गांवों में फैल जाता है। इसलिए हाल ही में छोड़े गए पानी को देखते हुए आसपास गांव के लोग सतर्क हो गए हैं। खुड़वारा से राम सहाय नगला तक जमीराना बांध है। वह पहले तीन लाख क्यूसेक क्षमता का था। उसकी क्षमता 2014 में पांच लाख क्यूसेक तक की कर दी गई है। यहां गंगा का पानी भैंसोर नदी के पानी से मिलने के बाद क्षेत्र जलमग्न हो जाता है और गनियाई, जैतपुर, कौआनगला, खुड़वारा गांव में पानी भरने लगता है। इस तरफ अभी बाढ़ खंड का कोई ध्यान नहीं है। गंगा में पानी बढ़ने के साथ ही इन चार गांवों के लोग दहशत में हैं। संवाद
गंगा-महावा बांध के करीब पहुंचा गंगा का पानी
सहसवान। गंगा-महावा बांध के उस पार बसे भमरौलिया, वीर सहाय नगला, खागी नगला आदि गांवों के पास भी बाढ़ का पानी पहुंच गया है। किसी गांव में अभी पानी नहीं भरा है। बहाव तेज होने के कारण जामनी गांव के सामने कटान शुरू हो गया है। बाढ़ खंड के अधिकारियों का कहना है कि इससे अभी बांध व तटबंधों को कोई खतरा नहीं है। ईख की फसल में पानी भर गया है। एसडीएम प्रेमपाल सिंह ने बताया कि अभी कहीं खतरे की स्थिति नहीं है। संवाद

बाढ़ खंड की जलस्तर दर्शाती मंगलवार की रिपोर्ट। संवाद