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एकादशी पर कृष्णमय हो गया शहर
ब्यूरो /बदायूं
Updated Mon, 29 Aug 2016 12:08 AM IST
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एकादशी पर कृष्णमय हो गया शहर
- फोटो : बदायूं/उत्ततर प्रदेश्ा
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भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के तीन दिन बाद सूतक समाप्ति पर एकादशी को यहां धार्मिक उत्साह के मनाए जाने की परंपरा है। यह परंपरा कब और कैसे पड़ी? यह तो बुजुर्ग भी नहीं बता पाते, लेकिन एकादशी को यहां की छटा ही निराली होती है। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव एकादशी को ही वृहद रूप में मनाया जाता है। इसी के चलते रविवार को सुसज्जित मंदिरों की शोभा देखते ही बनी। बिजली के नए-नए प्रकार के आइटमों से मंदिर आकर्षक छवि बिखेरते नजर आए। शहर ही नहीं आसपास के गांव के लोग भी सुसज्जित मंदिरों की छटा देखने को उमड़ पड़े।
भले ही पूरे जिले में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर मंदिर सजते हों, लेकिन शहर में एकादशी पर मंदिरों को सजा का भगवान श्रीकृष्ण का जन्मदिन मनाया जाता है। जन्माष्टमी के बाद एकादशी जैसा धार्मिक महत्व का दिन पहला होता है। इसलिए भी इसकी बड़ी महत्ता है। रविवार को सूरज ढलते ही बिजली की रोशनी से जगमगाती सड़कों पर रौनक लौट आई। बाकी दिनों से आज का दिन विशेष था। गली-गली मंदिरों में जहां देवी देवताओं को नवीन वस्त्रों और आभूषणों से अलंकृत किया गया था, वहीं मंदिर बिजली झालरों से जगमगाते नजर आ रहे थे।
स्वचालित झांकियां रही आकर्षण का केंद्र
बच्चों को आकर्षित करने के लिए मंदिरों में कई स्वचालित झांकियां बनाई गईं थीं। योगिराज कृष्ण के जीवन की कथा से जुड़ी झांकियां आकर्षक का केंद्र रहीं। अलावा इसके वर्फ से बनाए पहाड़ों के बीच समाधिस्थ भगवान भोले नाथ, पर्वत उठा, महावीर बजरंगबली, दधि मंथन करती मां यशोदा, नटखट नंद गोपाल की झांकियां अपने आप में सजीवता प्रस्तुत कर रहीं थीं तो मथुरा की जेल में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की झांकी रोमांचित करने में सबसे आगे थीं।
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काली सड़क पर सबसे अधिक रौनक, मेला लगा
शहर का पुराना बाईपास का गौरव हासिल करने वाली काली सड़क पर सबसे अधिक भीड़ दिखी। इस मार्ग पर प्रसिद्ध बिरुआबाड़ी मंदिर, हर प्रसाद मंदिर, नाराण मंदिर, रघुनाथ मंदिर पंजाबी मंदिर आदि को रास्ता हैं। इसलिए यहां सबसे अधिक रौनक रही। यही नहीं आवास विकास की ओर गौरी शंकर मंदिर की आकर्षक सजावाट देखने को जनसमूह उमड़ पड़ा। रेलवे स्टेशन कचहरी रोड और मोहल्लों में पुराने मंदिरों में भी अतुलनीय सजावट हुई।
पुलिस फोर्स की निगरानी में रहा धार्मिक उत्सव
अपने आप में अनूठी परंपरा का त्योहार एकादशी पर भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने पहले ही रणनीति बना ली थी। सीसीटीवी कैमरों के अलावा प्रमुख स्थानों पर पुलिस की पिकेट लगाई गई। मोबाइल पुलिस टीमें भी जायजा लेती रहीं। पुलिस के लिए सबसे ज्यादा चुनौती काली सड़क पर भीड़ और पथिक चौक से बिरुआबाड़ी मंदिर तक लगे मेला की सुरक्षा को लेकर थी।
रात्रि में बिजली अधिकारियों को बनी रही धुकधुकी
एकादशी पर मंदिर दर्शनार्थियों की अत्याधिक भीड़ और पिछली घटनाओं को देखते हुए एकादशी पर बिजली व्यवस्था को हर साल बिजली अधिकारियों को चेता दिया जाता है कि लोड को देखते हुए व्यवस्थाएं दुरुस्त रखें। शहर में एक्सईएन छैल बिहारी लोड और बिजली लाइनों की निगरानी ही कराते रहे। लाइनमैनों के दल बनाकर इस मौके पर विशेष निगरानी रखी जा रही थी। बावजूद इसके बिजली अधिकारियों की धुकधुकी बनी रही।
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भले ही पूरे जिले में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर मंदिर सजते हों, लेकिन शहर में एकादशी पर मंदिरों को सजा का भगवान श्रीकृष्ण का जन्मदिन मनाया जाता है। जन्माष्टमी के बाद एकादशी जैसा धार्मिक महत्व का दिन पहला होता है। इसलिए भी इसकी बड़ी महत्ता है। रविवार को सूरज ढलते ही बिजली की रोशनी से जगमगाती सड़कों पर रौनक लौट आई। बाकी दिनों से आज का दिन विशेष था। गली-गली मंदिरों में जहां देवी देवताओं को नवीन वस्त्रों और आभूषणों से अलंकृत किया गया था, वहीं मंदिर बिजली झालरों से जगमगाते नजर आ रहे थे।
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स्वचालित झांकियां रही आकर्षण का केंद्र
बच्चों को आकर्षित करने के लिए मंदिरों में कई स्वचालित झांकियां बनाई गईं थीं। योगिराज कृष्ण के जीवन की कथा से जुड़ी झांकियां आकर्षक का केंद्र रहीं। अलावा इसके वर्फ से बनाए पहाड़ों के बीच समाधिस्थ भगवान भोले नाथ, पर्वत उठा, महावीर बजरंगबली, दधि मंथन करती मां यशोदा, नटखट नंद गोपाल की झांकियां अपने आप में सजीवता प्रस्तुत कर रहीं थीं तो मथुरा की जेल में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की झांकी रोमांचित करने में सबसे आगे थीं।
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काली सड़क पर सबसे अधिक रौनक, मेला लगा
शहर का पुराना बाईपास का गौरव हासिल करने वाली काली सड़क पर सबसे अधिक भीड़ दिखी। इस मार्ग पर प्रसिद्ध बिरुआबाड़ी मंदिर, हर प्रसाद मंदिर, नाराण मंदिर, रघुनाथ मंदिर पंजाबी मंदिर आदि को रास्ता हैं। इसलिए यहां सबसे अधिक रौनक रही। यही नहीं आवास विकास की ओर गौरी शंकर मंदिर की आकर्षक सजावाट देखने को जनसमूह उमड़ पड़ा। रेलवे स्टेशन कचहरी रोड और मोहल्लों में पुराने मंदिरों में भी अतुलनीय सजावट हुई।
पुलिस फोर्स की निगरानी में रहा धार्मिक उत्सव
अपने आप में अनूठी परंपरा का त्योहार एकादशी पर भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने पहले ही रणनीति बना ली थी। सीसीटीवी कैमरों के अलावा प्रमुख स्थानों पर पुलिस की पिकेट लगाई गई। मोबाइल पुलिस टीमें भी जायजा लेती रहीं। पुलिस के लिए सबसे ज्यादा चुनौती काली सड़क पर भीड़ और पथिक चौक से बिरुआबाड़ी मंदिर तक लगे मेला की सुरक्षा को लेकर थी।
रात्रि में बिजली अधिकारियों को बनी रही धुकधुकी
एकादशी पर मंदिर दर्शनार्थियों की अत्याधिक भीड़ और पिछली घटनाओं को देखते हुए एकादशी पर बिजली व्यवस्था को हर साल बिजली अधिकारियों को चेता दिया जाता है कि लोड को देखते हुए व्यवस्थाएं दुरुस्त रखें। शहर में एक्सईएन छैल बिहारी लोड और बिजली लाइनों की निगरानी ही कराते रहे। लाइनमैनों के दल बनाकर इस मौके पर विशेष निगरानी रखी जा रही थी। बावजूद इसके बिजली अधिकारियों की धुकधुकी बनी रही।