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नाम वापसी के दिन होगा साफ, चुनाव डीपी लडे़ंगे या बेटे को करेंगे लांच
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बदायूं। राष्ट्रीय परिवर्तन दल मुखिया डीपी यादव के साथ ही उनकी पत्नी पूर्व विधायक उमलेश यादव और बेटे कुणाल यादव ने भी सहसवान विधानसभा सीट से नामांकन दाखिल किया है। डीपी ने अभी पत्ते नहीं खोले हैं कि वह चुनाव लड़ेंगे, उनकी पत्नी मैदान में रहेंगी या फिर बेटे कुणाल यादव को लांच करेंगे। हालांकि पत्रकारों से डीपी ने कहा कि कोविड की वजह से परिवार के तीनों लोगों ने नामांकन किया है। जिसका स्वास्थ्य सही रहेगा, वह चुनाव लड़ लेगा।
डीपी यादव का बदायूं की राजनीति में खासा दखल रहा है। उन्होंने 2002 में अपने बेटे विकास यादव को बिसौली सीट से चुनाव लड़ाया था। इस चुनाव में विकास यादव 35 हजार से ज्यादा वोट पाकर दूसरे नंबर पर रहे। सपा के योगेंद्र कुमार कुन्नू बाबू विधायक चुने गए। इसके बाद 2007 के चुनाव में डीपी यादव खुद सहसवान सीट से चुनाव लड़े और अपनी पत्नी उमलेश यादव को बिसौली सीट से चुनाव लड़ाया। पहली बार जिले की दो सीटों पर डीपी का कब्जा हुआ था। डीपी और उनकी पत्नी उमलेश यादव इसके बाद बसपा में शामिल हो गए। 2012 का विधानसभा चुनाव आते-आते बिसौली सीट सुरक्षित हो गई। सहसवान से डीपी को बसपा ने टिकट नहीं दिया तो उन्होंने फिर अपनी पार्टी रापद से चुनाव लड़ा। इस बार सपा के ओमकार सिंह ने जीत दर्ज की। डीपी तीसरे नंबर पर रहे।
जिले में अपनी राजनीतिक जमीन फिर से हासिल करने के लिए 2017 में डीपी यादव ने अपनी पत्नी उमलेश यादव को सहसवान से चुनाव लड़ाया। उमलेश यादव 57 हजार से ज्यादा वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहीं। अब इस विधानसभा चुनाव में डीपी यादव फिर से मैदान में हैं। मंगलवार को उनके साथ ही रापद से उनकी पत्नी उमलेश यादव और बेटे कुणाल यादव ने भी नामांकन दाखिल किया है। डीपी यादव की चुनाव को लेकर रणनीति क्या है यह अभी साफ नहीं हुआ है। हालांकि, डीपी ने कहा है कि भाजपा से उनकी गठबंधन की बात चल रही थी जो पूरी नहीं हो सकी। वह देखेंगे कि तीनों में से कौन चुनाव लड़ेगा। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि वह अपने बेटे कुणाल यादव को भी लांच कर सकते हैं।
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भारतीय राष्ट्रीय पार्टी की शिल्पी मौर्य ने भी नामांकन कराया
मंगलवार को जो दस नामांकन हुए उनमें डीपी यादव के परिवार के दो सदस्यों के अलावा बिल्सी से भारतीय राष्ट्रीय पार्टी की शिल्पी मौर्य का नाम भी शामिल है। शिल्पी मूल रूप से रायबरेली की निवासी हैं। संवाद
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डीपी यादव का बदायूं की राजनीति में खासा दखल रहा है। उन्होंने 2002 में अपने बेटे विकास यादव को बिसौली सीट से चुनाव लड़ाया था। इस चुनाव में विकास यादव 35 हजार से ज्यादा वोट पाकर दूसरे नंबर पर रहे। सपा के योगेंद्र कुमार कुन्नू बाबू विधायक चुने गए। इसके बाद 2007 के चुनाव में डीपी यादव खुद सहसवान सीट से चुनाव लड़े और अपनी पत्नी उमलेश यादव को बिसौली सीट से चुनाव लड़ाया। पहली बार जिले की दो सीटों पर डीपी का कब्जा हुआ था। डीपी और उनकी पत्नी उमलेश यादव इसके बाद बसपा में शामिल हो गए। 2012 का विधानसभा चुनाव आते-आते बिसौली सीट सुरक्षित हो गई। सहसवान से डीपी को बसपा ने टिकट नहीं दिया तो उन्होंने फिर अपनी पार्टी रापद से चुनाव लड़ा। इस बार सपा के ओमकार सिंह ने जीत दर्ज की। डीपी तीसरे नंबर पर रहे।
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जिले में अपनी राजनीतिक जमीन फिर से हासिल करने के लिए 2017 में डीपी यादव ने अपनी पत्नी उमलेश यादव को सहसवान से चुनाव लड़ाया। उमलेश यादव 57 हजार से ज्यादा वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहीं। अब इस विधानसभा चुनाव में डीपी यादव फिर से मैदान में हैं। मंगलवार को उनके साथ ही रापद से उनकी पत्नी उमलेश यादव और बेटे कुणाल यादव ने भी नामांकन दाखिल किया है। डीपी यादव की चुनाव को लेकर रणनीति क्या है यह अभी साफ नहीं हुआ है। हालांकि, डीपी ने कहा है कि भाजपा से उनकी गठबंधन की बात चल रही थी जो पूरी नहीं हो सकी। वह देखेंगे कि तीनों में से कौन चुनाव लड़ेगा। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि वह अपने बेटे कुणाल यादव को भी लांच कर सकते हैं।
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भारतीय राष्ट्रीय पार्टी की शिल्पी मौर्य ने भी नामांकन कराया
मंगलवार को जो दस नामांकन हुए उनमें डीपी यादव के परिवार के दो सदस्यों के अलावा बिल्सी से भारतीय राष्ट्रीय पार्टी की शिल्पी मौर्य का नाम भी शामिल है। शिल्पी मूल रूप से रायबरेली की निवासी हैं। संवाद