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Budaun News: कुत्तों के हमले बढ़े, 49 दिन में 6,326 लोगों को काटा
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एंटी रेबीज का टीका लगवाती सुधा देवी, उझानी संवाद
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बदायूं। जिले में कुत्ते कटखने हो रहे हैं। जनवरी व 18 फरवरी तक 49 दिन में 6,326 से अधिक लोगों को कुत्तों ने काटा है। इसी बीच बिल्ली ने 331, बंदर ने 1637 व अन्य के काटने से 50 लोग घायल हुए हैं। जिला अस्पताल के रिकॉर्ड में 7,984 मरीजों ने एंटी रैबीज के इंजेक्शन लगवाए हैं।
शहर से लेकर गांव-देहात में भी कुत्ते खूंखार हो रहे हैं। पिछले साल कुत्तों ने 30,195 लोगों को निशाना बनाया था। हर रोज औसतन 82 लोग कुत्तों के हमले के शिकार हुए थे। इस साल स्थिति और खराब है। जनवरी और 18 फरवरी तक की पड़ताल में पता चला कि जिला अस्पताल में औसतन हर रोज 129 लोगों को एंटी रैबीज के इंजेक्शन लगाए जा चुके हैं। ये आंकड़े जिला अस्पताल में एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने आने वालों के हैं। इनके अलावा ऐसे भी लोग हैं जिन्हें कुत्तों ने काटा और उन्होंने कहीं और भी इंजेक्शन लगवाए हैं।
जिला अस्पताल में हर रोज एंटी रैबीज के इंजेक्शन लगवाने वालों की कतार लगी रहती है। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. कप्तान सिंह ने बताया कि हर रोज काफी संख्या में मरीज एआरवी के लिए आ रहे हैं। वैक्सीन की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है ताकि लोगों को परेशानी न हो।
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रैबीज से बिगड़ जाता है मानसिक संतुलन
कुत्ता, बंदर, लंगूर आदि के काटने से जो लार व्यक्ति के खून में मिल जाती है, उससे रैबीज की बीमारी होने का खतरा रहता है। रैबीज रोग मानसिक संतुलन बिगाड़ता है। यह रोग 19 साल तक मरीज को अपनी गिरफ्त में ले सकता है।
लक्षण
रैबीज के रोगी को सबसे ज्यादा पानी से डर लगता है। रोगी के मुंह से लार निकलती है। यहां तक की वह भौंकना भी शुरू कर देता है।
उपचार
रैबीज रोग की रोकथाम के लिए अस्पतालों में एंटी रैबीज वैक्सीन के इंजेक्शन लगाए जाते हैं। इससे बचाव हो सकता है। नियमानुसार पहला इंजेक्शन 72 घंटे के अंदर, दूसरा तीन दिन बाद, तीसरा सात दिन बाद, चौथा 14 दिन बाद और पांचवां 28 दिन के बाद लगाया जाता है।
एंटी रैबीज सीरम लगाने की जिला अस्पताल में व्यवस्था नहीं
कुत्ता अगर हल्के से काटता है तो एंटी रैबीज वैक्सीन लगती है, लेकिन अगर मांस नोच ले तो उसमें एंटी रैबीज वैक्सीन के अलावा एंटी रैबीज सीरम भी लगाना पड़ता है। एंटी रैबीज सीरम यहां नहीं है। लिहाजा मरीज को बता दिया जाता है कि एंटी रैबीज सीरम लगवाना जरूरी है।
एंटी रैबीज सीरम इसलिए लगाना पड़ता है, क्योंकि उसका असर जल्दी होता है और वह जख्म पर ही लगता है, जबकि एंटी रैबीज वैक्सीन हाथ पर लगती है। इसका असर थोड़ा देरी से होता है। सामान्य कुत्ते काटे में तो यह सही है, लेकिन मांस नोचने में संक्रमण जल्दी फैलने का खतरा रहता है, इसलिए सीरम लगवाई जाती है। सीरम की आपूर्ति जिले में नहीं होती। -रामेश्वर मिश्रा, सीएमओ
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शहर से लेकर गांव-देहात में भी कुत्ते खूंखार हो रहे हैं। पिछले साल कुत्तों ने 30,195 लोगों को निशाना बनाया था। हर रोज औसतन 82 लोग कुत्तों के हमले के शिकार हुए थे। इस साल स्थिति और खराब है। जनवरी और 18 फरवरी तक की पड़ताल में पता चला कि जिला अस्पताल में औसतन हर रोज 129 लोगों को एंटी रैबीज के इंजेक्शन लगाए जा चुके हैं। ये आंकड़े जिला अस्पताल में एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने आने वालों के हैं। इनके अलावा ऐसे भी लोग हैं जिन्हें कुत्तों ने काटा और उन्होंने कहीं और भी इंजेक्शन लगवाए हैं।
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जिला अस्पताल में हर रोज एंटी रैबीज के इंजेक्शन लगवाने वालों की कतार लगी रहती है। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. कप्तान सिंह ने बताया कि हर रोज काफी संख्या में मरीज एआरवी के लिए आ रहे हैं। वैक्सीन की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है ताकि लोगों को परेशानी न हो।
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रैबीज से बिगड़ जाता है मानसिक संतुलन
कुत्ता, बंदर, लंगूर आदि के काटने से जो लार व्यक्ति के खून में मिल जाती है, उससे रैबीज की बीमारी होने का खतरा रहता है। रैबीज रोग मानसिक संतुलन बिगाड़ता है। यह रोग 19 साल तक मरीज को अपनी गिरफ्त में ले सकता है।
लक्षण
रैबीज के रोगी को सबसे ज्यादा पानी से डर लगता है। रोगी के मुंह से लार निकलती है। यहां तक की वह भौंकना भी शुरू कर देता है।
उपचार
रैबीज रोग की रोकथाम के लिए अस्पतालों में एंटी रैबीज वैक्सीन के इंजेक्शन लगाए जाते हैं। इससे बचाव हो सकता है। नियमानुसार पहला इंजेक्शन 72 घंटे के अंदर, दूसरा तीन दिन बाद, तीसरा सात दिन बाद, चौथा 14 दिन बाद और पांचवां 28 दिन के बाद लगाया जाता है।
एंटी रैबीज सीरम लगाने की जिला अस्पताल में व्यवस्था नहीं
कुत्ता अगर हल्के से काटता है तो एंटी रैबीज वैक्सीन लगती है, लेकिन अगर मांस नोच ले तो उसमें एंटी रैबीज वैक्सीन के अलावा एंटी रैबीज सीरम भी लगाना पड़ता है। एंटी रैबीज सीरम यहां नहीं है। लिहाजा मरीज को बता दिया जाता है कि एंटी रैबीज सीरम लगवाना जरूरी है।
एंटी रैबीज सीरम इसलिए लगाना पड़ता है, क्योंकि उसका असर जल्दी होता है और वह जख्म पर ही लगता है, जबकि एंटी रैबीज वैक्सीन हाथ पर लगती है। इसका असर थोड़ा देरी से होता है। सामान्य कुत्ते काटे में तो यह सही है, लेकिन मांस नोचने में संक्रमण जल्दी फैलने का खतरा रहता है, इसलिए सीरम लगवाई जाती है। सीरम की आपूर्ति जिले में नहीं होती। -रामेश्वर मिश्रा, सीएमओ

एंटी रेबीज का टीका लगवाती सुधा देवी, उझानी संवाद

एंटी रेबीज का टीका लगवाती सुधा देवी, उझानी संवाद