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भविष्य के डॉक्टर बोले-मंजिल तय, लक्ष्य की ओर बढ़ रहे कदम
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बदायूं। एक जुलाई को डॉक्टर्स डे को ध्यान में रखते हुए बृहस्पतिवार को राजकीय मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस फर्स्ट ईयर के कुछ विद्यार्थियों से बात करके उनका मन टटोलने का प्रयास किया गया तो अधिकतर का लक्ष्य तय दिखा।
अपना तथा माता पिता का सपना पूरा करके इस क्षेत्र में नाम कमाने के उद्देश्य लेकर बैठे ये युवा आने लक्ष्य को लेकर जरा भी आशंकित दिखाई नहीं दिखे। उनकी मंजिल तय है और लक्ष्य की तरफ धीरे-धीरे उनके कदम बढ़ रहे हैं।
साइंस स्ट्रीम से पढ़ाई करने वाले अधिकतर छात्र-छात्राओं का सपना डॉक्टर बनने का होता है तो कुछ अपने माता-पिता की इच्छा और उनके सपने को पूरा करने के लिए डॉक्टर बनने का ठान लेते हैं। किसी में समाजसेवा का जज्बा होता है तो कोई अपने किसी परिजन की परेशानी को देखकर डॉक्टर बनना चाहता है। वजह चाहें जो भी हो लेकिन डॉक्टरी एक ऐसा पेशा है जहां चिकित्सकीय जानकारी से ज्यादा मरीज की भावनाएं समझकर उनके रोग का इलाज करना जरूरी होता है। राजकीय मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस फर्स्ट ईयर की पढ़ाई करने वाले कुछ ऐसे ही मेडिकल स्टूडेंट्स ने अपनी बातें साझा कीं।
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किसी क्षेत्र में इतनी नहीं है समाजसेवा : पूर्वी
बुलंदशहर के कस्बा सिकंदराबा निवासी पूर्वी अग्रवाल राजकीय मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहीं हैं। पूर्वी के अनुसार, उन्हें यह क्षेत्र शुरू से ही पसंद था। डॉक्टर बनकर ही दूसरे की जान बचाई जा सकती है। अन्य किसी क्षेत्र में समाजसेवा का इतना बड़ा मौका नहीं मिल सकता। पूर्वी का कहना है कि आज हृदय के क्षेत्र में विशेषज्ञों की कमी है, साथ ही आज दिल की बीमारियां कॉमन होने लगी हैं, इसलिए वह एक कॉर्डियोलॉजिस्ट बनना चाहती हैं।
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यही सोचते थे कि मस्तिष्क कैसे काम करता है : कार्तिकेय
एमबीबीएस फर्स्ट ईयर की ही पढ़ाई कर रहे कार्तिकेय सक्सेना वैसे तो बिल्सी के मोहल्ला नंबर पांच के निवासी हैं लेकिन पापा अनिल कुमार सक्सेना शिक्षक हैं और मम्मी व भाई समेत अलीगढ़ में रहे हैं। कार्तिक के अनुसार उन्हें शुरू से ही यह जानने की इच्छा होती थी कि मानव मस्तिष्क कैसे काम करता है। इसके अंदर से कैसे पूरा शरीर संचालित करने की शक्ति होती है। इसलिए उन्होंने डॉक्टर बनने का सोचा और आगे जाकर वह न्यूरो के क्षेत्र में काम करके एक अच्छे न्यूरो सर्जन बनना चाहते हैं। उनके अनुसार उनके पापा ने डॉक्टर बनने के लिए काफी प्रेरित किया।
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पापा चाहते थे फोर्स में जाएं, पर मेरा सपना डॉक्टर बनने का : अनुज
कानपुर के रहने वाले अनुज बताते हैं कि उनके पापा चार भाई हैं। सभी फोर्स में है। पापा हाकिम सिंह भी एयर फोर्स में हैं। ऐसे में पापा भी चाहते थे कि वह भी फोर्स में जाए, लेकिन उनका सपना डॉक्टर बनने का था। ऐसे में पापा ने भी पूरा सहयोग किया। यही वजह है कि आज वह एमबीबीएस कर रहे हैं। अनुज कहते हैं कि इसक अलावा वह डॉक्टर बनने तक ही सीमित नहीं रहना चाहते हैं, बल्कि ज्यादा से ज्यादा जानकारी एकत्र कर उसे लोगों को साझा करना भी उनका शौक है। इसके लिए वह अपना एक यूट्यूब चैनल भी चला रहे हैं, हालांकि वह कार्डियोलॉजिस्ट बनना चाहते हैं।
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शुरू से बनना डॉक्टर बनना चाहती थी : कनिका
कनिका अग्रवाल भी राजकीय मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस कर रही हैं। कनिका का सपना डॉक्टर बनाने का था, हालांकि उनके परिवार, रिश्तेदारी में कोई डॉक्टर नहीं है। उनके पापा विकास अग्रवाल हापुड़ में बिजनेसमैन हैं, लेकिन वह शुरू से ही डॉक्टर बनना चाहती थीं। जो काम एक डॉक्टर कर सकता है वह दूसरा कोई नहीं कर सकता। वह मेहनत से अपनी पढ़ाई कर रही हैं, लेकिन अभी उन्होंने यह तय नहीं किया है कि वह किसकी स्पेशलिस्ट बनेंगी। उनके अनुसार जिस विषय में उनकी पकड़ सबसे बेहतर बनेगी, वह उसी क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहेंगी।
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अपना तथा माता पिता का सपना पूरा करके इस क्षेत्र में नाम कमाने के उद्देश्य लेकर बैठे ये युवा आने लक्ष्य को लेकर जरा भी आशंकित दिखाई नहीं दिखे। उनकी मंजिल तय है और लक्ष्य की तरफ धीरे-धीरे उनके कदम बढ़ रहे हैं।
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साइंस स्ट्रीम से पढ़ाई करने वाले अधिकतर छात्र-छात्राओं का सपना डॉक्टर बनने का होता है तो कुछ अपने माता-पिता की इच्छा और उनके सपने को पूरा करने के लिए डॉक्टर बनने का ठान लेते हैं। किसी में समाजसेवा का जज्बा होता है तो कोई अपने किसी परिजन की परेशानी को देखकर डॉक्टर बनना चाहता है। वजह चाहें जो भी हो लेकिन डॉक्टरी एक ऐसा पेशा है जहां चिकित्सकीय जानकारी से ज्यादा मरीज की भावनाएं समझकर उनके रोग का इलाज करना जरूरी होता है। राजकीय मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस फर्स्ट ईयर की पढ़ाई करने वाले कुछ ऐसे ही मेडिकल स्टूडेंट्स ने अपनी बातें साझा कीं।
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किसी क्षेत्र में इतनी नहीं है समाजसेवा : पूर्वी
बुलंदशहर के कस्बा सिकंदराबा निवासी पूर्वी अग्रवाल राजकीय मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहीं हैं। पूर्वी के अनुसार, उन्हें यह क्षेत्र शुरू से ही पसंद था। डॉक्टर बनकर ही दूसरे की जान बचाई जा सकती है। अन्य किसी क्षेत्र में समाजसेवा का इतना बड़ा मौका नहीं मिल सकता। पूर्वी का कहना है कि आज हृदय के क्षेत्र में विशेषज्ञों की कमी है, साथ ही आज दिल की बीमारियां कॉमन होने लगी हैं, इसलिए वह एक कॉर्डियोलॉजिस्ट बनना चाहती हैं।
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यही सोचते थे कि मस्तिष्क कैसे काम करता है : कार्तिकेय
एमबीबीएस फर्स्ट ईयर की ही पढ़ाई कर रहे कार्तिकेय सक्सेना वैसे तो बिल्सी के मोहल्ला नंबर पांच के निवासी हैं लेकिन पापा अनिल कुमार सक्सेना शिक्षक हैं और मम्मी व भाई समेत अलीगढ़ में रहे हैं। कार्तिक के अनुसार उन्हें शुरू से ही यह जानने की इच्छा होती थी कि मानव मस्तिष्क कैसे काम करता है। इसके अंदर से कैसे पूरा शरीर संचालित करने की शक्ति होती है। इसलिए उन्होंने डॉक्टर बनने का सोचा और आगे जाकर वह न्यूरो के क्षेत्र में काम करके एक अच्छे न्यूरो सर्जन बनना चाहते हैं। उनके अनुसार उनके पापा ने डॉक्टर बनने के लिए काफी प्रेरित किया।
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पापा चाहते थे फोर्स में जाएं, पर मेरा सपना डॉक्टर बनने का : अनुज
कानपुर के रहने वाले अनुज बताते हैं कि उनके पापा चार भाई हैं। सभी फोर्स में है। पापा हाकिम सिंह भी एयर फोर्स में हैं। ऐसे में पापा भी चाहते थे कि वह भी फोर्स में जाए, लेकिन उनका सपना डॉक्टर बनने का था। ऐसे में पापा ने भी पूरा सहयोग किया। यही वजह है कि आज वह एमबीबीएस कर रहे हैं। अनुज कहते हैं कि इसक अलावा वह डॉक्टर बनने तक ही सीमित नहीं रहना चाहते हैं, बल्कि ज्यादा से ज्यादा जानकारी एकत्र कर उसे लोगों को साझा करना भी उनका शौक है। इसके लिए वह अपना एक यूट्यूब चैनल भी चला रहे हैं, हालांकि वह कार्डियोलॉजिस्ट बनना चाहते हैं।
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शुरू से बनना डॉक्टर बनना चाहती थी : कनिका
कनिका अग्रवाल भी राजकीय मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस कर रही हैं। कनिका का सपना डॉक्टर बनाने का था, हालांकि उनके परिवार, रिश्तेदारी में कोई डॉक्टर नहीं है। उनके पापा विकास अग्रवाल हापुड़ में बिजनेसमैन हैं, लेकिन वह शुरू से ही डॉक्टर बनना चाहती थीं। जो काम एक डॉक्टर कर सकता है वह दूसरा कोई नहीं कर सकता। वह मेहनत से अपनी पढ़ाई कर रही हैं, लेकिन अभी उन्होंने यह तय नहीं किया है कि वह किसकी स्पेशलिस्ट बनेंगी। उनके अनुसार जिस विषय में उनकी पकड़ सबसे बेहतर बनेगी, वह उसी क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहेंगी।