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Budaun News: डीएम ने तीन संविदा स्वास्थ्य कर्मियों की सेवा समाप्त की
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बदायूं। महिला अस्पताल के तीन संविदा कर्मचारियों की सेवा समाप्ति की कार्रवाई के बाद कर्मचारियों में खलबली है। सिटी मजिस्ट्रेट की जांच रिपोर्ट करीब दो महीने तक दबी पड़ी रही। कार्रवाई तब हुई जब मानवाधिकार आयोग ने प्रकरण में दखल दिया। डीएम ने आयोग को जवाब देने से पहले ही तीनों की सेवा समाप्त करा दी।
प्रसव पीड़िता को भर्ती करने में देरी पर अस्पताल के द्वार पर ही बच्चे की डिलीवरी हो गई थी। इस मामले में संविदाकर्मी जितेंद्र, मुकेश व लता चौहान जिम्मेदारी पाए गए थे। इनकी सेवाएं समाप्त करने के लिए 11 जनवरी को सिटी मजिस्ट्रेट की जांच रिपोर्ट, डीएम की ओर से सीएमएस के पास भेजी गई थी। वे जांच रिपोर्ट पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहे थे।
पीड़ित रवि ने कार्रवाई न करने का आरोप लगाते हुए मानवाधिकार आयोग में शिकायत की थी। मामले पर संज्ञान लेते हुए आयोग ने जवाब तलब किया तो अधिकारी चेते। डीएम मनोज कुमार ने सीएमएस को फटकार लगाते हुए तत्काल कार्रवाई करते हुए संविदा समाप्त कर दी।
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स्वास्थ्य समिति की बैठक में सामने आया था कि दो माह बाद भी कर्मचारियों पर कार्रवाई नहीं की है। तत्काल तीनों कर्मचारियों की संविदा समाप्त कर दी गई है। -मनोज कुमार, डीएम
यह था मामला
गौरतलब है कि कबूलपुरा निवासी रवि अपनी पत्नी शिवानी को प्रसव पीड़ा होने पर महिला अस्पताल 29 फरवरी को लाए थे। अस्पताल के कर्मचारी और महिला डॉक्टर ने देखा और हालत गंभीर बताई। कर्मचारियों ने कहा कि जच्चा-बच्चा दोनों में से किसी की गारंटी नहीं है। कई प्रकार की जांचें लिखीं। जांच के नाम पर इधर-उधर घुमाया। उधर, गर्भवती की हालत बिगड़ती जा रही थी, बावजूद इसके महिला को भर्ती तक नहीं किया गया। जब परिजन उसे अन्यत्र अस्पताल लेकर जाने लगे तो महिला अस्पताल के गेट पर ही महिला की डिलीवरी हो गई। मौके पर ही नवजात की मौत हो गई। इससे आहत परिजनों ने कार्रवाई की मांग की थी।
फोटो :
बर्खास्त कर्मचारी बोले- बिना पक्ष सुने की गई कार्रवाई
बदायूं। संविदा समाप्त होने के बाद कर्मचारियों ने डीएम को पत्र लिखा है। उनका कहना है कि जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में डीएम मनोज कुमार सहित कमेटी ने बिना पक्ष सुने ही कार्रवाई की है। प्रसव को आई महिला से उनका कोई लेना देना नहीं था। कार्रवाई से पहले उनका पक्ष लेना चाहिए था। आरोप है कि जो लोग इस मामले में लिप्त थे उनको बचाने का काम किया गया है। संविदा कर्मी लता चौहान, जितेंद्र पाल, मुकेश कुमार शुक्रवार को डीएम मनोज कुमार से मिलने उनके कार्यालय पहुंचे लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी। कर्मचारी शनिवार को डीएम से मिलकर बहाली की मांग करेंगे। संवाद
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प्रसव पीड़िता को भर्ती करने में देरी पर अस्पताल के द्वार पर ही बच्चे की डिलीवरी हो गई थी। इस मामले में संविदाकर्मी जितेंद्र, मुकेश व लता चौहान जिम्मेदारी पाए गए थे। इनकी सेवाएं समाप्त करने के लिए 11 जनवरी को सिटी मजिस्ट्रेट की जांच रिपोर्ट, डीएम की ओर से सीएमएस के पास भेजी गई थी। वे जांच रिपोर्ट पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहे थे।
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पीड़ित रवि ने कार्रवाई न करने का आरोप लगाते हुए मानवाधिकार आयोग में शिकायत की थी। मामले पर संज्ञान लेते हुए आयोग ने जवाब तलब किया तो अधिकारी चेते। डीएम मनोज कुमार ने सीएमएस को फटकार लगाते हुए तत्काल कार्रवाई करते हुए संविदा समाप्त कर दी।
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स्वास्थ्य समिति की बैठक में सामने आया था कि दो माह बाद भी कर्मचारियों पर कार्रवाई नहीं की है। तत्काल तीनों कर्मचारियों की संविदा समाप्त कर दी गई है। -मनोज कुमार, डीएम
यह था मामला
गौरतलब है कि कबूलपुरा निवासी रवि अपनी पत्नी शिवानी को प्रसव पीड़ा होने पर महिला अस्पताल 29 फरवरी को लाए थे। अस्पताल के कर्मचारी और महिला डॉक्टर ने देखा और हालत गंभीर बताई। कर्मचारियों ने कहा कि जच्चा-बच्चा दोनों में से किसी की गारंटी नहीं है। कई प्रकार की जांचें लिखीं। जांच के नाम पर इधर-उधर घुमाया। उधर, गर्भवती की हालत बिगड़ती जा रही थी, बावजूद इसके महिला को भर्ती तक नहीं किया गया। जब परिजन उसे अन्यत्र अस्पताल लेकर जाने लगे तो महिला अस्पताल के गेट पर ही महिला की डिलीवरी हो गई। मौके पर ही नवजात की मौत हो गई। इससे आहत परिजनों ने कार्रवाई की मांग की थी।
फोटो :
बर्खास्त कर्मचारी बोले- बिना पक्ष सुने की गई कार्रवाई
बदायूं। संविदा समाप्त होने के बाद कर्मचारियों ने डीएम को पत्र लिखा है। उनका कहना है कि जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में डीएम मनोज कुमार सहित कमेटी ने बिना पक्ष सुने ही कार्रवाई की है। प्रसव को आई महिला से उनका कोई लेना देना नहीं था। कार्रवाई से पहले उनका पक्ष लेना चाहिए था। आरोप है कि जो लोग इस मामले में लिप्त थे उनको बचाने का काम किया गया है। संविदा कर्मी लता चौहान, जितेंद्र पाल, मुकेश कुमार शुक्रवार को डीएम मनोज कुमार से मिलने उनके कार्यालय पहुंचे लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी। कर्मचारी शनिवार को डीएम से मिलकर बहाली की मांग करेंगे। संवाद