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रास्ते से गायब हो गए डेढ़ करोड़ के गेहूं बीज

Thu, 05 Feb 2015 11:31 PM IST
बदायूं
बदायूं Updated Thu, 05 Feb 2015 11:31 PM IST
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Disappeared from the path of a half million wheat germ
किसानों को खाद और बीज की आपूर्ति की भूमिका निभाने वाली संस्था पीसीएफ (यूपी कोआपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड) में डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक का बीज घोटाला सामने आया है। अक्तूबर में हुए इस घोटाले को दबाने की भी कोशिश की गई और खुलासा करने वाले एआर कोआपरेटिव सतीश चंद्र श्रीवास्तव का पहले ही तबादला किया जा चुका है वहीं तत्कालीन पीसीएफ प्रबंधक एके गुप्ता को भी हटा दिया गया है। मामला ऊपर पहुंचने पर निदेशालय ने जांच कमेटी बना दी है।
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यह बीज अक्तूबर 2014 में पंतनगर, रुद्रपुर और पीलीभीत से चला था। इसकी कीमत करीब डेढ़ करोड़ रुपये थी। इसे उतारा कहां, यह अभी तक रहस्य है। पीसीएफ के माध्यम से जब बीज सहकारी समितियों तक नहीं पहुंचा तो तत्कालीन एआर सतीश चंद्र श्रीवास्तव ने अधीनस्थ से जांच कराई। पता चला कि पूरा गेहूं बीज खुर्द बुर्द कर दिया गया। घोटाले की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी गई। प्रकरण में कोई भी अधिकारी बात करने से कतरा रहे हैं। पीसीएफ में तीसरे प्रबंधक बलवंत ने कार्यभार संभालने के बाद संबंधित स्टाफ को नोटिस जारी कर जवाबदेह बनाया गया है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि सब्सिडी के नाम पर किसानों को यह बीज बेच दिए गए हैं।
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बीज घोटाले की जानकारी मिलने पर कार्यवाहक निदेशक स्मृतिलाल यादव ने नरेंद्र सिंह के नेतृत्व में राज्य स्तरीय जांच टीम गठित कर दी है। पीसीएफ के मौजूदा प्रबंधक ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि भंडार नायक और सहायक प्रबंधक को नोटिस जारी किया गया है। प्रकरण में इन लोगों की भूमिका की जानकारी मांगी गई है।
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कृषि विभाग के पास नहीं किसानों के नाम
मामले में सब्सिडी वाले किसानों की सूची डीडी कृषि से मांगी गई है। डीडी कृषि डॉ. अमरनाथ मिश्र ने मामले गंभीरता को देखते हुए सूची न होने की बात कही है। उनका कहना है कि ऐसे किसी किसान का नाम उनके पास नहीं है, जिसे गेहूं का बीज दिया गया हो। सूत्रों का कहना है कि सब्सिडी प्राप्त किसानों की सूची मिलने पर घोटाले के संबंध में अहम जानकारी मिल सकती थी। बता दें कि बीज पर किसानों को 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है।

जिला प्र्रबंधक, पीसीएफ बलवंत ने बताया कि जहां तक मेरी जानकारी में है, जिला सहकारी बैंक में पीसीएफ का 75 लाख से अधिक का धन जमा है। धन न निकल पाने की स्थिति में पीसीएफ ने प्राइवेट समितियों को बीज आवंटित कर दिया। हालांकि, यह गलत था। अब राज्य स्तर से इस प्रकरण की जांच शुरू होने वाली है। सच सामने आ जाएगा।

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