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देवी चंद्रघंटा की हुई आराधना, माता रानी के दर्शन कर मानी मनौतियां
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बदायूं। शारदीय नवरात्र के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की आराधना की गई। शहर के नगला मंदिर के बाहर सुबह से ही भक्तों की लंबी लाइन लगी रही। माता रानी के दर्शन करने के लिए भक्तों को काफी इंतजार करना पड़ा। नंबर आने पर भक्तों ने माता रानी की पूजा अर्चना कर मनौतियां मानी, साथ ही परिवार की खुशहाली के लिए प्रार्थना की। मंदिर मेें भक्तों के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
इधर माता रानी पिंडी रूप दर्शन व बाबा बर्फानी की आरती डॉ. संदीप वार्ष्णेय द्वारा संपन्न हुई। सुंदरकांड का पाठ महंत पंडित सुरेश चंद्र पाठक की ओर से माता रानी की इच्छा तक चला। माता रानी के पिंडी दर्शन गुफा के सेवक राम सेठी ने बताया कि गुफा में माता रानी के दर्शन प्रतिदिन शाम सात बजे प्रारंभ होते है। लाला हरप्रसाद मंदिर में माता-रानी व बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए हजारों की संख्या भक्त दर्शन को उमड़ रहे हैं। सेवा में विशाल गुप्ता, राम सेठी, केशव सपड़ा, आयुष गुप्ता, टीटू सिंह, अनिल कुमार, ध्रुव देव गुप्ता, कुनाल आर्य, विशाल वर्मा मौजूद रहे।
उघैती। करनपुर मार्ग पर स्थित माता रानी के मंदिर के बाहर भक्तों की लंबी लाइन लगी रही। आचार्य देवेश द्विवेदी ने बताया कि मां दुर्गा की नौ शक्तियों की तीसरी स्वरूपा भगवती चंद्रघंटा की पूजा नवरात्र के तीसरे दिन की जाती है। माता के माथे पर घंटे आकार का अर्धचंद्र है। जिस कारण से इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। इनका रूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी है।
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इधर माता रानी पिंडी रूप दर्शन व बाबा बर्फानी की आरती डॉ. संदीप वार्ष्णेय द्वारा संपन्न हुई। सुंदरकांड का पाठ महंत पंडित सुरेश चंद्र पाठक की ओर से माता रानी की इच्छा तक चला। माता रानी के पिंडी दर्शन गुफा के सेवक राम सेठी ने बताया कि गुफा में माता रानी के दर्शन प्रतिदिन शाम सात बजे प्रारंभ होते है। लाला हरप्रसाद मंदिर में माता-रानी व बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए हजारों की संख्या भक्त दर्शन को उमड़ रहे हैं। सेवा में विशाल गुप्ता, राम सेठी, केशव सपड़ा, आयुष गुप्ता, टीटू सिंह, अनिल कुमार, ध्रुव देव गुप्ता, कुनाल आर्य, विशाल वर्मा मौजूद रहे।
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उघैती। करनपुर मार्ग पर स्थित माता रानी के मंदिर के बाहर भक्तों की लंबी लाइन लगी रही। आचार्य देवेश द्विवेदी ने बताया कि मां दुर्गा की नौ शक्तियों की तीसरी स्वरूपा भगवती चंद्रघंटा की पूजा नवरात्र के तीसरे दिन की जाती है। माता के माथे पर घंटे आकार का अर्धचंद्र है। जिस कारण से इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। इनका रूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी है।
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