{"_id":"620ea0b501bba56f801fd91c","slug":"cultural-badaun-news-bly4757935154","type":"story","status":"publish","title_hn":"श्रद्धा से मनाई रविदास जयंती","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
श्रद्धा से मनाई रविदास जयंती
विज्ञापन
बिल्सी के गुधनी आर्य संस्कारशाला में रविदास जयंती मनाते श्रद्धालु। संवाद
- फोटो : BADAUN
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बिल्सी। तहसील क्षेत्र के यज्ञ तीर्थ ग्राम गुधनी स्थित आर्य समाज मंदिर में माघ माह की पूर्णिमा तथा संत रविदास की जयंती मनाई गई।
बुधवार शाम आर्य संस्कारशाला में गुरुकुल के बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। ईशा आर्य ने भजन और कविता सुनाई। मोना, तानिया, भावना ने सामूहिक गीत गाया। कौशिकी की प्रस्तुति भी सराही गई।
संस्कारशाला के संचालक सुप्रसिद्ध वैदिक विद्वान आचार्य संजीव रूप ने कहा कि गुरु रविदास एक महान संत थे। उनका कथन था सब की जाति एक है, और वह है मनुष्य। सबके कल्याण के लिए वेद का ही रास्ता सर्वोत्तम है। हमें कभी वेदों का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए।
प्रज्ञा आर्य ने पूर्णिमा का महत्व बताते हुए कहा कि स्नान केवल तन का न हो, स्नान मन, बुद्धि और आत्मा का भी होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पानी से तन शुद्ध होता है लेकिन सत्य के संग से मन शुद्ध होता है। बुद्धि ज्ञान से शुद्ध होती है, आत्मा विद्या और तप से शुद्ध होती है। इस मौके पर राकेश आर्य, साहब सिंह, बद्री प्रसाद आर्य, पंकज कुमार सिंह, प्रश्रय आर्य, विनीत कुमार सिंह, ज्योति रानी आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
--
उझानी गुरुद्वारे में हुआ शबद कीर्तन
उझानी (बदायूं)। पंजाबी कॉलोनी स्थित गुरुद्वारे में संत रविदास की जयंती पर ज्ञानी सोहन सिंह ने शबद कीर्तन किया। उन्होंने कहा कि रविदास जी ने हमेशा मोह माया से दूर रहकर परमात्मा से मन जोड़ने की बात कही।
उनकी लिखी एक शबद की व्याख्या करते हुए ज्ञानी जी ने कहा कि परमात्मा हमें इतनी शक्ति दे कि इस जन्म में हम बंदगी करके उससे मिलाप कर सकें। चौरासी लाख योनियों से मुक्ति मिल जाए।
ज्ञानी जी ने कहा कि आज माया के मोह में फंसकर मानव रूपी मिट्टी को पुतला नाच रहा है। वह माया कमाने के लिए दौड़ता रहता है।
ज्ञानी सोहन सिंह ने कहा कि रविदास सभी के प्रति समान विचार रखते थे। इस मौके पर लंगर भी हुआ। गूंज जनकल्याण शिक्षा समिति के फाउंडर राजन मेंदीरत्ता ने ज्ञानी समेत प्रमुख लोगों को सम्मानित किया। इस मौके पर सुजाता माथुर, गुरुचरन सिंह भाटिया, दिलबाग सिंह, जयपाल थरेजा, अमरजीत सिंह, पुलकित भाटिया, सुदर्शना भाटिया, पूजा अदलक्खा आदि मौजूद थे। संवाद
विज्ञापन
बुधवार शाम आर्य संस्कारशाला में गुरुकुल के बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। ईशा आर्य ने भजन और कविता सुनाई। मोना, तानिया, भावना ने सामूहिक गीत गाया। कौशिकी की प्रस्तुति भी सराही गई।
संस्कारशाला के संचालक सुप्रसिद्ध वैदिक विद्वान आचार्य संजीव रूप ने कहा कि गुरु रविदास एक महान संत थे। उनका कथन था सब की जाति एक है, और वह है मनुष्य। सबके कल्याण के लिए वेद का ही रास्ता सर्वोत्तम है। हमें कभी वेदों का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए।
विज्ञापन
प्रज्ञा आर्य ने पूर्णिमा का महत्व बताते हुए कहा कि स्नान केवल तन का न हो, स्नान मन, बुद्धि और आत्मा का भी होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पानी से तन शुद्ध होता है लेकिन सत्य के संग से मन शुद्ध होता है। बुद्धि ज्ञान से शुद्ध होती है, आत्मा विद्या और तप से शुद्ध होती है। इस मौके पर राकेश आर्य, साहब सिंह, बद्री प्रसाद आर्य, पंकज कुमार सिंह, प्रश्रय आर्य, विनीत कुमार सिंह, ज्योति रानी आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
--
उझानी गुरुद्वारे में हुआ शबद कीर्तन
उझानी (बदायूं)। पंजाबी कॉलोनी स्थित गुरुद्वारे में संत रविदास की जयंती पर ज्ञानी सोहन सिंह ने शबद कीर्तन किया। उन्होंने कहा कि रविदास जी ने हमेशा मोह माया से दूर रहकर परमात्मा से मन जोड़ने की बात कही।
उनकी लिखी एक शबद की व्याख्या करते हुए ज्ञानी जी ने कहा कि परमात्मा हमें इतनी शक्ति दे कि इस जन्म में हम बंदगी करके उससे मिलाप कर सकें। चौरासी लाख योनियों से मुक्ति मिल जाए।
ज्ञानी जी ने कहा कि आज माया के मोह में फंसकर मानव रूपी मिट्टी को पुतला नाच रहा है। वह माया कमाने के लिए दौड़ता रहता है।
ज्ञानी सोहन सिंह ने कहा कि रविदास सभी के प्रति समान विचार रखते थे। इस मौके पर लंगर भी हुआ। गूंज जनकल्याण शिक्षा समिति के फाउंडर राजन मेंदीरत्ता ने ज्ञानी समेत प्रमुख लोगों को सम्मानित किया। इस मौके पर सुजाता माथुर, गुरुचरन सिंह भाटिया, दिलबाग सिंह, जयपाल थरेजा, अमरजीत सिंह, पुलकित भाटिया, सुदर्शना भाटिया, पूजा अदलक्खा आदि मौजूद थे। संवाद