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श्रीमद् भागवत कथा के समापन पर भंडारा
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बिल्सी के बांस बरोलिया में भागवत कथा के समापन पर आयोजित भंडारे में प्रसाद ग्रहण करते श्रद्धालु। ?
- फोटो : BADAUN
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बिल्सी। तहसील क्षेत्र के गांव बांस बरोलिया स्थित वृद्धाश्रम पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा का सातवें दिन मंगलवार को समापन हो गया। इससे पहले मध्य प्रदेश से पधारे कथावाचक दीपक शास्त्री ने भक्तों को शुकदेव महाराज द्वारा राजा परीक्षित को सुनाई कथा का श्रवण कराया।
कथा को पूर्णता प्रदान करते हुए कथा व्यास ने विभिन्न प्रसंगों श्रीकृष्ण का स्वधाम गमन एवं अंत में राजा परीक्षित के मोक्ष प्राप्ति का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान जब अपनी लीला समाप्त करके गोलोक धाम गए। तभी से कलियुग का वास पृथ्वी पर हो गया। तक्षक नाग ने गंगा किनारे बैठे राजा परीक्षित को आकर डसा तो उनका शरीर जलकर भस्म हो गया। उन्होंने सात दिन श्रीमद्भागवत कथा सुनकर मोक्ष को प्राप्त किया।
उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा कल्पवृक्ष के समान है। इसके श्रवण करने से व्यक्ति का सोया हुआ भाग्य जाग जाता है। इसको सफल बनाने में आश्रम के संचालक उमाशंकर शास्त्री, वेदव्यास शर्मा, शिवगौड़, जगदीश चंद तिवारी, धनेश्वर सिंह पुंडीर, अशोक मिश्रा, रा मकिशोर शर्मा, ह रिओम, खेमपाल, यादकिशोर माथुर, प्रमोद पांडे, लोकेश पांडे, मदन लाल, संतोष सोमानी, उमेश शर्मा, राहुल, प्रिंस माहेश्वरी आदि का विशेष सहयोग रहा। कथा के समापन पर भंडारा आयोजित किया गया। इसमें सभी लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। संवाद
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कथा को पूर्णता प्रदान करते हुए कथा व्यास ने विभिन्न प्रसंगों श्रीकृष्ण का स्वधाम गमन एवं अंत में राजा परीक्षित के मोक्ष प्राप्ति का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान जब अपनी लीला समाप्त करके गोलोक धाम गए। तभी से कलियुग का वास पृथ्वी पर हो गया। तक्षक नाग ने गंगा किनारे बैठे राजा परीक्षित को आकर डसा तो उनका शरीर जलकर भस्म हो गया। उन्होंने सात दिन श्रीमद्भागवत कथा सुनकर मोक्ष को प्राप्त किया।
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उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा कल्पवृक्ष के समान है। इसके श्रवण करने से व्यक्ति का सोया हुआ भाग्य जाग जाता है। इसको सफल बनाने में आश्रम के संचालक उमाशंकर शास्त्री, वेदव्यास शर्मा, शिवगौड़, जगदीश चंद तिवारी, धनेश्वर सिंह पुंडीर, अशोक मिश्रा, रा मकिशोर शर्मा, ह रिओम, खेमपाल, यादकिशोर माथुर, प्रमोद पांडे, लोकेश पांडे, मदन लाल, संतोष सोमानी, उमेश शर्मा, राहुल, प्रिंस माहेश्वरी आदि का विशेष सहयोग रहा। कथा के समापन पर भंडारा आयोजित किया गया। इसमें सभी लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। संवाद
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