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करोड़ों खर्च, फिर भी दिक्कत
बदायूं।
Updated Thu, 22 Jun 2017 11:47 PM IST
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लाइन में लगीं महिलाएं।
- फोटो : अमर उजाला
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सूरत-ए-हाल महिला अस्पताल: घंटों लाइन में लगकर परेशान होती हैं गर्भवती महिलाएं
करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी जिले की स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं। अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। इसी के चलते पिछले दिनों मंडलायुक्त ने सीएमओ को प्रतिकूल प्रविष्टि भी दी थी। इसके बावजूद अब तक व्यवस्थाओं में सुधार देखने को नहीं मिल रहा। जिला अस्पताल के साथ जिला महिला अस्पताल की व्यवस्थाएं भी बदहाल हैं। बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए जिला महिला अस्पताल में 20 करोड़ की लागत से आधुनिक वार्ड बनाया गया है। इसका भी लाभ गर्भवती महिलाओं और प्रसूताओं को नहीं मिल रहा। इसकी प्रमुख वजह है, अस्पताल के डॉक्टरों और स्टाफ की मनमानी। डॉक्टर समय से नहीं आते। ऐसे में गर्भवती महिलाओं को घंटों लाइन में लगकर परेशान होना पड़ता है। कई बार तो उनकी हालत तक बिगड़ जाती है। बृहस्पतिवार को भी जिला महिला अस्पताल में ऐसा ही नजारा देखने को मिला। मनमानी के चलते दोपहर 12 बजे तक डॉक्टर नहीं पहुंचे। अनेक महिलाओं को यहां घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ा। इस दौरान मोहल्ला खंडसारी के राजा की पत्नी अंजुम की हालत तक बिगड़ गई।
डॉक्टरों की मनमानी की शिकायत करने कुछ लोग सीएमओ ऑफिस पहुंचे तो पता चला कि सीएमओ भी अपने ऑफिस में नहीं हैं। ऐसे में उनको मायूस होकर लौटना पड़ा। गौर करने वाली बात यह है कि प्रदेश सरकार बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं पर जोर दे रही है। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार करने में नाकाम सीएमओ के खिलाफ कार्रवाई भी की जा रही है। इसके बावजूद स्वास्थ्य सेवाएं दुरुस्त नहीं हो रहीं।
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सघन चिकित्सा केंद्र बंद
बदायूं। जिला महिला अस्पताल में करोड़ों रुपये की लागत से आधुनिक नवजात सघन चिकित्सा केंद्र स्थापित किया गया है। यह केंद्र बंद है। इस ओर भी जिम्मेदार अधिकारियों का ध्यान नहीं जाता। गौर करने वाली बात यह है कि आर्थिक रूप से कमजोर और गरीब परिवार ही सरकारी अस्पतालों में महिलाओं का प्रसव कराते हैं। अगर किसी नवजात की हालत गंभीर होती है तो उसे रेफर कर दिया जाता है। महिला अस्पताल में बने नवजात शिशु सघन चिकित्सा केंद्र में उसके इलाज की कोई व्यवस्था नहीं है।
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वर्जन-
स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी का हर संभव प्रयास किया जा रहा है। अगर कुछ डॉक्टर लापरवाही कर रहे हैं तो उनके खिलाफ उच्च स्तर पर लिखा जाएगा। जिन नवजात शिशुओं को जरूरी होता है उनको सघन चिकित्सा उपचार दिया जा रहा है या नहीं इसकी भी जांच कराई जाएगी। -डॉ. नेमी चंद्रा, सीएमओ
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करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी जिले की स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं। अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। इसी के चलते पिछले दिनों मंडलायुक्त ने सीएमओ को प्रतिकूल प्रविष्टि भी दी थी। इसके बावजूद अब तक व्यवस्थाओं में सुधार देखने को नहीं मिल रहा। जिला अस्पताल के साथ जिला महिला अस्पताल की व्यवस्थाएं भी बदहाल हैं। बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए जिला महिला अस्पताल में 20 करोड़ की लागत से आधुनिक वार्ड बनाया गया है। इसका भी लाभ गर्भवती महिलाओं और प्रसूताओं को नहीं मिल रहा। इसकी प्रमुख वजह है, अस्पताल के डॉक्टरों और स्टाफ की मनमानी। डॉक्टर समय से नहीं आते। ऐसे में गर्भवती महिलाओं को घंटों लाइन में लगकर परेशान होना पड़ता है। कई बार तो उनकी हालत तक बिगड़ जाती है। बृहस्पतिवार को भी जिला महिला अस्पताल में ऐसा ही नजारा देखने को मिला। मनमानी के चलते दोपहर 12 बजे तक डॉक्टर नहीं पहुंचे। अनेक महिलाओं को यहां घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ा। इस दौरान मोहल्ला खंडसारी के राजा की पत्नी अंजुम की हालत तक बिगड़ गई।
डॉक्टरों की मनमानी की शिकायत करने कुछ लोग सीएमओ ऑफिस पहुंचे तो पता चला कि सीएमओ भी अपने ऑफिस में नहीं हैं। ऐसे में उनको मायूस होकर लौटना पड़ा। गौर करने वाली बात यह है कि प्रदेश सरकार बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं पर जोर दे रही है। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार करने में नाकाम सीएमओ के खिलाफ कार्रवाई भी की जा रही है। इसके बावजूद स्वास्थ्य सेवाएं दुरुस्त नहीं हो रहीं।
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सघन चिकित्सा केंद्र बंद
बदायूं। जिला महिला अस्पताल में करोड़ों रुपये की लागत से आधुनिक नवजात सघन चिकित्सा केंद्र स्थापित किया गया है। यह केंद्र बंद है। इस ओर भी जिम्मेदार अधिकारियों का ध्यान नहीं जाता। गौर करने वाली बात यह है कि आर्थिक रूप से कमजोर और गरीब परिवार ही सरकारी अस्पतालों में महिलाओं का प्रसव कराते हैं। अगर किसी नवजात की हालत गंभीर होती है तो उसे रेफर कर दिया जाता है। महिला अस्पताल में बने नवजात शिशु सघन चिकित्सा केंद्र में उसके इलाज की कोई व्यवस्था नहीं है।
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वर्जन-
स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी का हर संभव प्रयास किया जा रहा है। अगर कुछ डॉक्टर लापरवाही कर रहे हैं तो उनके खिलाफ उच्च स्तर पर लिखा जाएगा। जिन नवजात शिशुओं को जरूरी होता है उनको सघन चिकित्सा उपचार दिया जा रहा है या नहीं इसकी भी जांच कराई जाएगी। -डॉ. नेमी चंद्रा, सीएमओ