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नेकपुर शराब भट्ठी पर महिलाओं का धावा
अमर उजाला ब्यूरो बदायूं।
Updated Wed, 05 Apr 2017 11:20 PM IST
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alchohol
- फोटो : amar ujala
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हाथों में झाड़ू, डंडे लेकर शराबी दौड़ाए, दुकान पर पड़ा ताला
शहर के मोहल्ला नेकपुर में चल रही शराब भट्ठी को बंद कराने के लिए बुधवार शाम को मोहल्ले की सैकड़ों महिलाएं हाथों में झाड़ू, लाठी और डंडे लेकर सड़क पर उतर आईं। महिलाओं ने शराब की भट्ठी पर धावा बोल दिया और वहां बैठकर शराब पी रहे शराबियों को लाठी-डंडे फटकार कर दौड़ा दिया। सेल्समैन ने विरोध किया तो उसको भी दौड़ाया। महिलाओं के आंदोलन से भगदड़ मच गई। सिविल लाइंस थाना पुलिस और दुकान के ठेकेदार के लोग पहुंचे। महिलाओं को समझाने की कोशिश की लेकिन उन्होंने एक न सुनी। वह दुकान बंद करने के अलावा कोई बात मानने को तैयार नहीं हुईं। इस पर उनसे दुकान शिफ्ट करने के लिए आठ दिन का समय मांगा गया लेकिन उन्होंने साफ-साफ कह दिया कि आज से वह दुकान नहीं खुलने देंगी। करीब तीन घंटे तक चला यह आंदोलन दुकान पर ताला जड़ने के बाद ही खत्म हुआ।
आंदोलनकारी महिलाओं का कहना था कि शराब की भट्ठी ने उनके मोहल्ले को नरक बना दिया है। शराबी हर दिन हंगामा करते हैं। खुलेआम गालियां बकते हैं। इससे मोहल्ले के बच्चे भी बिगड़ रहे हैं। महिलाओं ने एलान किया कि वह अब किसी भी हाल में शराब की दुकान नहीं चलने देंगी। चाहे उन्हें किसी भी स्तर पर लड़ाई लड़नी पड़े। दोपहर बाद करीब चार बजे महिलाओं ने शराब की दुकान पर धावा बोला। यहां शराबियों को दौड़ाने के बाद विक्रेता से दुकान बंद करने को कहा तो उसने इंकार कर दिया। इस पर महिलाएं गुस्सा गईं और उन्होंने कर्मचारी को दौड़ा दिया। जैसे-तैसे वह भागा। मौके पर पहुंचे सिविल लाइंस थाना प्रभारी जमीरुल हसन ने भी महिलाओं को समझाया लेकिन वह नहीं मानीं और प्रदर्शन करती रहीं। बाद में भाजपा नेता दीपमाला भी पहुंच गईं। उन्होंने भी दुकान बंद कराने के लिए महिलाओं को समय देने के लिए समझाने की कोशिश की लेकिन उन्होंने उनकी बात भी न सुनी। महिलाओं के आक्रोश को देखते हुए शाम को करीब सात बजे शराब की दुकान पर ताला डाल दिया गया। महिलाओं ने कह दिया है कि अगर सुबह दुकान खुली तो वह आंदोलन करेंगी।
कबूलपुरा में भी महिलाओं ने किया प्रदर्शन
बदायूं। शहर के मोहल्ला कबूलपुरा में भी शराब की दुकान के विरोध में महिलाओं ने प्रदर्शन किया। उन्होंने दुकान हटाने की मांग की। कहा कि वे किसी भी हाल में दुकान नहीं चलने देंगी। जिले भर में एक अप्रैल से शराब की दुकानों को लेकर आंदोलन हो रहा है। कुछ तो पुरानी दुकानें हैं जबकि कुछ स्थानों पर एक अप्रैल से नई दुकानें खोल दी गई हैं। तीन दिन पहले महिलाओं ने कबूलुपरा में शराब की दुकान की घेराबंदी की थी। उस समय अधिकारियों ने समझा-बुझाकर मामला शांत कर दिया था। दुकान को भी बंद करा दिया गया। बुधवार को यह दुकान फिर से खुल गई। इससे महिलाएं गुस्सा गईं। दर्जनों महिलाओं ने शराब की दुकान की घेराबंदी कर ली। महिलाएं घनी आबादी के बीच से शराब की दुकान हटाने की मांग पर अड़ी हुई हैं।
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बच्चे बिगड़ रहे हैं, गालियां बकते हैं शराबी
बदायूं। नेकपुर में आंदोलनकारी महिलाओं में शराब की दुकान को लेकर जबरदस्त नाराजगी थी। उन्होंने कहा कि अब बर्दाश्त से बाहर हो गया है। मोहल्ले में दुकान होने से माहौल लगातार बिगड़ता जा रहा है। शराबी रोजाना हंगामा करते हैं। खुलेआम गालियां बकते हैं। इसका असर नई पीढ़ी के बच्चों पर भी पड़ने लगा है, इसलिए दुकान बंद होनी चाहिए। चंद्रवती ने बताया कि अब पानी सिर से ऊपर जा चुका है इसलिए मजबूर होकर आंदोलन करना पड़ा। राजनदेवी ने कहा कि शराब की दुकान ने मोहल्ले को नरक बना दिया है। अंगूरी बोलीं- अब तो दुकान बंद कराकर ही रहेंगे। चंपा, गायत्री, रेशम, मुन्नी, सुखदेवी, झब्बो, कोमल, राधा, जयदेवी, कमला और ज्ञानश्री का भी यही कहना था।
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शहर के मोहल्ला नेकपुर में चल रही शराब भट्ठी को बंद कराने के लिए बुधवार शाम को मोहल्ले की सैकड़ों महिलाएं हाथों में झाड़ू, लाठी और डंडे लेकर सड़क पर उतर आईं। महिलाओं ने शराब की भट्ठी पर धावा बोल दिया और वहां बैठकर शराब पी रहे शराबियों को लाठी-डंडे फटकार कर दौड़ा दिया। सेल्समैन ने विरोध किया तो उसको भी दौड़ाया। महिलाओं के आंदोलन से भगदड़ मच गई। सिविल लाइंस थाना पुलिस और दुकान के ठेकेदार के लोग पहुंचे। महिलाओं को समझाने की कोशिश की लेकिन उन्होंने एक न सुनी। वह दुकान बंद करने के अलावा कोई बात मानने को तैयार नहीं हुईं। इस पर उनसे दुकान शिफ्ट करने के लिए आठ दिन का समय मांगा गया लेकिन उन्होंने साफ-साफ कह दिया कि आज से वह दुकान नहीं खुलने देंगी। करीब तीन घंटे तक चला यह आंदोलन दुकान पर ताला जड़ने के बाद ही खत्म हुआ।
आंदोलनकारी महिलाओं का कहना था कि शराब की भट्ठी ने उनके मोहल्ले को नरक बना दिया है। शराबी हर दिन हंगामा करते हैं। खुलेआम गालियां बकते हैं। इससे मोहल्ले के बच्चे भी बिगड़ रहे हैं। महिलाओं ने एलान किया कि वह अब किसी भी हाल में शराब की दुकान नहीं चलने देंगी। चाहे उन्हें किसी भी स्तर पर लड़ाई लड़नी पड़े। दोपहर बाद करीब चार बजे महिलाओं ने शराब की दुकान पर धावा बोला। यहां शराबियों को दौड़ाने के बाद विक्रेता से दुकान बंद करने को कहा तो उसने इंकार कर दिया। इस पर महिलाएं गुस्सा गईं और उन्होंने कर्मचारी को दौड़ा दिया। जैसे-तैसे वह भागा। मौके पर पहुंचे सिविल लाइंस थाना प्रभारी जमीरुल हसन ने भी महिलाओं को समझाया लेकिन वह नहीं मानीं और प्रदर्शन करती रहीं। बाद में भाजपा नेता दीपमाला भी पहुंच गईं। उन्होंने भी दुकान बंद कराने के लिए महिलाओं को समय देने के लिए समझाने की कोशिश की लेकिन उन्होंने उनकी बात भी न सुनी। महिलाओं के आक्रोश को देखते हुए शाम को करीब सात बजे शराब की दुकान पर ताला डाल दिया गया। महिलाओं ने कह दिया है कि अगर सुबह दुकान खुली तो वह आंदोलन करेंगी।
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कबूलपुरा में भी महिलाओं ने किया प्रदर्शन
बदायूं। शहर के मोहल्ला कबूलपुरा में भी शराब की दुकान के विरोध में महिलाओं ने प्रदर्शन किया। उन्होंने दुकान हटाने की मांग की। कहा कि वे किसी भी हाल में दुकान नहीं चलने देंगी। जिले भर में एक अप्रैल से शराब की दुकानों को लेकर आंदोलन हो रहा है। कुछ तो पुरानी दुकानें हैं जबकि कुछ स्थानों पर एक अप्रैल से नई दुकानें खोल दी गई हैं। तीन दिन पहले महिलाओं ने कबूलुपरा में शराब की दुकान की घेराबंदी की थी। उस समय अधिकारियों ने समझा-बुझाकर मामला शांत कर दिया था। दुकान को भी बंद करा दिया गया। बुधवार को यह दुकान फिर से खुल गई। इससे महिलाएं गुस्सा गईं। दर्जनों महिलाओं ने शराब की दुकान की घेराबंदी कर ली। महिलाएं घनी आबादी के बीच से शराब की दुकान हटाने की मांग पर अड़ी हुई हैं।
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बच्चे बिगड़ रहे हैं, गालियां बकते हैं शराबी
बदायूं। नेकपुर में आंदोलनकारी महिलाओं में शराब की दुकान को लेकर जबरदस्त नाराजगी थी। उन्होंने कहा कि अब बर्दाश्त से बाहर हो गया है। मोहल्ले में दुकान होने से माहौल लगातार बिगड़ता जा रहा है। शराबी रोजाना हंगामा करते हैं। खुलेआम गालियां बकते हैं। इसका असर नई पीढ़ी के बच्चों पर भी पड़ने लगा है, इसलिए दुकान बंद होनी चाहिए। चंद्रवती ने बताया कि अब पानी सिर से ऊपर जा चुका है इसलिए मजबूर होकर आंदोलन करना पड़ा। राजनदेवी ने कहा कि शराब की दुकान ने मोहल्ले को नरक बना दिया है। अंगूरी बोलीं- अब तो दुकान बंद कराकर ही रहेंगे। चंपा, गायत्री, रेशम, मुन्नी, सुखदेवी, झब्बो, कोमल, राधा, जयदेवी, कमला और ज्ञानश्री का भी यही कहना था।