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...तो क्या मौत कर रही थी इंतजार
अमर उजाला ब्यूरो,बदायूं
Updated Thu, 21 Sep 2017 12:31 AM IST
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हादसा
- फोटो : अमर उजाला
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वक्त का कुछ पता नहीं होता। एक दिन पहले निकाह होने के बाद बेगम को बुलाने के लिए अमजद अपने बहनोई तारिक के साथ ससुराल जा रहा था कि ससुराल से फोन आया कि कम से कम पांच महिलाओं को साथ लाना। सो अमजद को रास्ते से ही घर लौटना पड़ा।
17 सितंबर को गांव आसपुर निवासी इदरीस के घर बेहद खुशी का माहौल था। शादी के अगले दिन ही वलीमा था सो बेगम नाजरीन को उसके मायके वाले शाम को ही बुलाकर ले गए थे। इसके अगले दिन यानि की बुधवार को नाजरीन को फिर ससुराल जाना था। सो उसे विदा करने के लिए अमजद अपने बहनोई तारिक के साथ बाइक से रवाना हुआ।
रोते हुए अमजद के घर वालों ने बताया कि जब अमजद ककराला पहुंचा, तभी ससुराल वालों ने पूछा कि कौन-कौन आ रहा है। अमजद ने कहा कि वह अपने बहनोई तारिक के साथ बाइक से आ रहा है और ककराला तक आ गया है। इस पर ससुराल वालों ने कहा कि पहली विदा है इसलिए कम से कम पांच महिलाएं भी आएं। ससुराल वालों की बात को सुनकर अमजद ककराला से ही घर लौट पड़ा। बाद में वह चचेरे भाई राजा की जाइलो से अन्य 13 लोगों के साथ बेगम को बुलाने के लिए ससुराल को निकला। किस को पता था कि ये अमजद का अंतिम सफर है। हादसे में अमजद समेत 10 जिंदगियां चलीं गईं।
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मुंबई में रहकर कॅरियर बनाना चाहता था अमजद
बीए की कर रहा था पढ़ाई, बहनोई के पास रहकर चलाता था टेंपो
संजय श्रीवास्तव
बदायूं। अमजद बहन-भाइयों में छठे नंबर का था। छोटे से गांव में रहने वाला अमजद के सपने बड़े थे। वह कॅरियर बनाने के लिए मुंबई जाकर अपने बहनोई के पास रहने लगा। वहां शुरुआती गुजारे के लिए टेंपो चलाने लगा। इसके साथ ककराला के ही मुस्लिम डिग्री कालेज से स्नातक की पढ़ाई व्यक्तिगत छात्र के रूप में शुरू की। इस साल उसका स्नातक द्वितीय वर्ष था।। साथियों से कहता था पढ़ाई पूरी करने के बाद एक दिन बड़ा आदमी बनूंगा। इधर, डेढ़ महीने पहले परिवार वालों ने अमजद की शादी तय कर दी थी। शादी से दो दिन पहले ही 15 दिन के लिए गांव आया था।
गुरु के भी छलके आंसू
बदायूं। अमजद के गुरु रहे अलवर खां भी उसके मौत की खबर सुनकर गांव आसपुर पहुंच गए। वह भी आंसुओं को रोक नहीं पा रहे थे। उन्होंने बताया कि अमजद पढ़ने में बहुत अच्छा था सो हर साल वह क्लास में अच्छे नंबर से पास होता था। वह मेहनती भी बेहद था।
अम्मी बोलीं, अब कौन रूठेगा
बदायूं। जवान बेटे अमजद, बेटियों और अन्य लोगों की लाश को देखकर मां तसरीकन का बुरा हाल है। रोते हुए मां तसरीकन ने बताया कि जब अमजद अपनी बेगम को विदा कराने को जा रहा था तो उसने उनसे 15 सौ रुपये मांगे थे। उन्होंने रुपये देने से मना किया, तो वह कुछ नाराज होकर लेट गया। तब उन्होंने बड़े बेटे से यह रुपये दिलाए। बोली- अब कौन रुपये मांगेगा?
शौहर के अंतिम दीदार को पहुंची नाजरीन
बदायूं। कितनी बदकिस्मत रही है नाजरीन। उसने जिसके साथ जीवन गुजारने के सपने संजोए थे वो तीन दिन बाद ही छोड़कर हमेशा के लिए चला गया। बुधवार को एंबुलेंस में जब नाजरीन अपने शौहर के अंतिम दर्शन को पहुंची तो उसका विलाप देख मौजूद लोग खुद के आंसू नहीं रोक पाए। कई महिलाएं उसे पकड़े थीं,लेकिन हर किसी की जुबान से यहीं शब्द निकल रहे थे यह क्या हो गया। नाजरीन का तो कल से ही बुरा हाल है। शौहर के अंतिम दर्शन कराने के बाद मानो वह होशोहवाश ही खो बैठी है।
पत्नी, बेटा, बेटी का अंतिम दीदार नहीं कर सका तारिक
हादसे में घायल अमजद का बहनोई तारिक का इलाज बरेली के निजी अस्पताल में चल रहा है। हादसे में उसकी पत्नी परवीन के साथ ही चार वर्षीय बेटे समरीन और एक माह के बच्चे की भी मौत हो गई थी। सभी को आज गांव आसपुर में सुपुर्दे खाक किया गया। लेकिन तारिक नहीं था।
पहले राजा और बाद में पत्नी नसरीन भी चल बसी
जिस गाड़ी से हादसा हुआ था। उसे दूल्हा अमजद का चचेरा भाई राजा ही चला रहा था। राजा की मौके पर ही मौत हो गई थी। उसकी पत्नी नसरीन ने बाद में दम तोड़ दिया था। मां गुड्डी बिलखते हुए कह रही थी। मेरा राजा गया तो रानी भी चली गई।
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17 सितंबर को गांव आसपुर निवासी इदरीस के घर बेहद खुशी का माहौल था। शादी के अगले दिन ही वलीमा था सो बेगम नाजरीन को उसके मायके वाले शाम को ही बुलाकर ले गए थे। इसके अगले दिन यानि की बुधवार को नाजरीन को फिर ससुराल जाना था। सो उसे विदा करने के लिए अमजद अपने बहनोई तारिक के साथ बाइक से रवाना हुआ।
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रोते हुए अमजद के घर वालों ने बताया कि जब अमजद ककराला पहुंचा, तभी ससुराल वालों ने पूछा कि कौन-कौन आ रहा है। अमजद ने कहा कि वह अपने बहनोई तारिक के साथ बाइक से आ रहा है और ककराला तक आ गया है। इस पर ससुराल वालों ने कहा कि पहली विदा है इसलिए कम से कम पांच महिलाएं भी आएं। ससुराल वालों की बात को सुनकर अमजद ककराला से ही घर लौट पड़ा। बाद में वह चचेरे भाई राजा की जाइलो से अन्य 13 लोगों के साथ बेगम को बुलाने के लिए ससुराल को निकला। किस को पता था कि ये अमजद का अंतिम सफर है। हादसे में अमजद समेत 10 जिंदगियां चलीं गईं।
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मुंबई में रहकर कॅरियर बनाना चाहता था अमजद
बीए की कर रहा था पढ़ाई, बहनोई के पास रहकर चलाता था टेंपो
संजय श्रीवास्तव
बदायूं। अमजद बहन-भाइयों में छठे नंबर का था। छोटे से गांव में रहने वाला अमजद के सपने बड़े थे। वह कॅरियर बनाने के लिए मुंबई जाकर अपने बहनोई के पास रहने लगा। वहां शुरुआती गुजारे के लिए टेंपो चलाने लगा। इसके साथ ककराला के ही मुस्लिम डिग्री कालेज से स्नातक की पढ़ाई व्यक्तिगत छात्र के रूप में शुरू की। इस साल उसका स्नातक द्वितीय वर्ष था।। साथियों से कहता था पढ़ाई पूरी करने के बाद एक दिन बड़ा आदमी बनूंगा। इधर, डेढ़ महीने पहले परिवार वालों ने अमजद की शादी तय कर दी थी। शादी से दो दिन पहले ही 15 दिन के लिए गांव आया था।
गुरु के भी छलके आंसू
बदायूं। अमजद के गुरु रहे अलवर खां भी उसके मौत की खबर सुनकर गांव आसपुर पहुंच गए। वह भी आंसुओं को रोक नहीं पा रहे थे। उन्होंने बताया कि अमजद पढ़ने में बहुत अच्छा था सो हर साल वह क्लास में अच्छे नंबर से पास होता था। वह मेहनती भी बेहद था।
अम्मी बोलीं, अब कौन रूठेगा
बदायूं। जवान बेटे अमजद, बेटियों और अन्य लोगों की लाश को देखकर मां तसरीकन का बुरा हाल है। रोते हुए मां तसरीकन ने बताया कि जब अमजद अपनी बेगम को विदा कराने को जा रहा था तो उसने उनसे 15 सौ रुपये मांगे थे। उन्होंने रुपये देने से मना किया, तो वह कुछ नाराज होकर लेट गया। तब उन्होंने बड़े बेटे से यह रुपये दिलाए। बोली- अब कौन रुपये मांगेगा?
शौहर के अंतिम दीदार को पहुंची नाजरीन
बदायूं। कितनी बदकिस्मत रही है नाजरीन। उसने जिसके साथ जीवन गुजारने के सपने संजोए थे वो तीन दिन बाद ही छोड़कर हमेशा के लिए चला गया। बुधवार को एंबुलेंस में जब नाजरीन अपने शौहर के अंतिम दर्शन को पहुंची तो उसका विलाप देख मौजूद लोग खुद के आंसू नहीं रोक पाए। कई महिलाएं उसे पकड़े थीं,लेकिन हर किसी की जुबान से यहीं शब्द निकल रहे थे यह क्या हो गया। नाजरीन का तो कल से ही बुरा हाल है। शौहर के अंतिम दर्शन कराने के बाद मानो वह होशोहवाश ही खो बैठी है।
पत्नी, बेटा, बेटी का अंतिम दीदार नहीं कर सका तारिक
हादसे में घायल अमजद का बहनोई तारिक का इलाज बरेली के निजी अस्पताल में चल रहा है। हादसे में उसकी पत्नी परवीन के साथ ही चार वर्षीय बेटे समरीन और एक माह के बच्चे की भी मौत हो गई थी। सभी को आज गांव आसपुर में सुपुर्दे खाक किया गया। लेकिन तारिक नहीं था।
पहले राजा और बाद में पत्नी नसरीन भी चल बसी
जिस गाड़ी से हादसा हुआ था। उसे दूल्हा अमजद का चचेरा भाई राजा ही चला रहा था। राजा की मौके पर ही मौत हो गई थी। उसकी पत्नी नसरीन ने बाद में दम तोड़ दिया था। मां गुड्डी बिलखते हुए कह रही थी। मेरा राजा गया तो रानी भी चली गई।