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बूचड़खानों पर रोक से ठंडा पड़ा पशु व्यापार

Sun, 02 Apr 2017 11:17 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ उझानी
अमर उजाला ब्यूरो/ उझानी Updated Sun, 02 Apr 2017 11:17 PM IST
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Slaughterhouses have stopped cold trade for cattle trade
बूचड़खाना
बूचड़खानों पर रोक से ठंडा पड़ा पशु व्यापार
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-दो सप्ताह में पशुओं की खरीद-फरोख्त में जबरदस्त गिरावट
-कई नखासे सूने पड़े, पैंठ के दिन भी नहीं पहुंचे पशुपालक

योगी आदित्यनाथ के प्रदेश की सत्ता संभालते ही बूचड़खानों पर चले पुलिस और प्रशासन के डंडे ने पशु व्यापार को ठंडा कर दिया है। एक समय पशु नखासे खरीदारों से गुलजार रहते थे लेकिन अब ऐसा नहीं है। ऐसा ही नजारा यहां साप्ताहिक बाजार (पैंठ) में भी देखने को मिला। पैंठ के दिन खरीदारों को छोड़िए, पशुपालक भी जानवर लेकर नहीं पहुंचे।
यहां अढौली रोड पर रेलवे स्टेशन के पास, कछला में पिपरौल रोड और बरेली-मथुरा हाईवे पर बुटला बोर्ड के पास पशु नखासे लगते थे। बुटला के पशु नखासे को लेकर संचालक अहवरन सिंह की माने तो पशुपालकों का उसी दिन से यहां का मोहभंग हो गया था जब पशु तस्करी के केस बढ़े। किसान दुधारू पशुओं को नखासे तक ले जाने से परहेज करने लगे। अढौली रोड वाला पशु नखासा तीन सप्ताह पहले तक गुलजार था। शनिवार और मंगलवार को लगने वाले नखासे में पशुओं के पहुंचने से पहले ही व्यापारी सौदा कर लिया करते थे। उस वक्त सर्वाधिक डिमांड पड्डे, पड़ियों और गोवंशीय पशुओं की हुआ करती थी। बूढे़ बैल और भैंस के खरीदार भी मिल जाते थे लेकिन दो सप्ताह से नखासे में पशुओं को लेकर एक भी पशुपालक नहीं पहुंचा। जानकारों की माने तो ज्यादातर पशुपालक जानते हैं कि नखासों में वही लोग ज्यादा पहुंचते हैं जो पशुओं की तस्करी को बढ़ावा देते हैं। जिले में कौल्हाई, खितौरा, अलापुर, कादरचौक, म्याऊं, बिसौली, दहगवां आदि में पशु नखासे लगते हैं। कुछेक नखासे ही हल्के-फुल्के गुलजार हैं।
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बिक्री में भी 60 फीसदी तक गिरावट
उझानी। नझियाई मोहल्ले में सप्ताह में दो बार लगने वाले बकरे-बकरियों के नखासे पर भी असर नजर आ रहा है। सकरीजंगल गांव से बकरा बेचने के लिए पहुंचे शमीम ने बताया कि पिछले महीना उसने एक बकरा आठ हजार रुपये में बेचा था। दूसरे के लिए पांच हजार रुपये से अधिक का खरीदार नहीं मिला। बकरियों का रेट भी गिर गया है।
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