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सजायाफ्ता को मौज कराने वाले दोनों सिपाही बर्खास्त
बदायूं, ब्यूरो
Updated Sun, 03 Apr 2016 11:34 PM IST
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सीओ लाइन की जांच रिपोर्ट पर एसएसपी ने की कार्रवाई
जांच में दोषी पाए जाने पर सिपाहियों पर गिरी गाज
हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे मोरपाल यादव को 14 दिन तक मौज कराने वाले दोनों सिपाहियों को एसएसपी ने बर्खास्त कर दिया है। यह कार्रवाई सीओ लाइन श्योराज सिंह की जांच रिपोर्ट पर हुई है।
मूसाझाग थाने के गांव नवदिया नगला सुलरा निवासी मोरपाल यादव एमएलसी और दर्जा राज्यमंत्री बनवारी सिंह यादव के रिश्तेदार है। मोरपाल को हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा हो चुकी है। जेल प्रशासन से सांठगांठ कर मोरपाल ने 14 मार्च को खुद को जेल से अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज के लिए इलाज के बहाने रेफर करा लिया था। मोरपाल की अभिरक्षा में सिपाही दुर्गा सिंह और रामप्रसाद को भेजा गया था। मोरपाल मेडिकल कॉलेज में भर्ती ही नहीं हुआ। सिपाही उसे मौज कराते रहे। जेल प्रशासन और पुलिस की यह कारगुजारी अखबारों की सुर्खियों में आई, तो 31 मार्च को मोरपाल जेल पहुंचा।
बिना डिस्चार्ज स्लिप के ही जेल प्रशासन ने उसे जेल में दाखिल कर लिया था। सिपाहियों ने लिखित जवाब में कहा था कि इतने दिन तक वह मेडिकल कॉलेज के रैन बसेरा में रहे। एसएसपी सौमित्र यादव ने प्रथम दृष्टया दोनों सिपाहियों को दोषी मानते हुए सस्पेंड कर दिया था। पूरे मामले में जांच सीओ लाइन श्योराज सिंह को सौंपी गई थी। सीओ लाइन ने जांच में दोनों सिपाहियों को दोषी पाया। उन्होंने अपनी रिपोर्ट एसएसपी सौमित्र यादव को सौंप दी। रिपोर्ट के आधार पर एसएसपी ने दोनों सिपाहियों को बर्खास्त कर दिया है।
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जांच में दोनों सिपाहियों की संलिप्तता पाई गई है। सजायाफ्ता किसी अस्पताल में भर्ती नहीं हुआ। उसने कहीं इलाज भी नहीं कराया। सिपाहियों ने इस संबंध में विभागीय अधिकारियों को कुछ नहीं बताया। दोषी पाते हुए दोनों सिपाहियों को बर्खास्त कर दिया गया है।
-सौमित्र यादव, एसएसपी
जांच में दोषी पाए जाने पर सिपाहियों पर गिरी गाज
हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे मोरपाल यादव को 14 दिन तक मौज कराने वाले दोनों सिपाहियों को एसएसपी ने बर्खास्त कर दिया है। यह कार्रवाई सीओ लाइन श्योराज सिंह की जांच रिपोर्ट पर हुई है।
मूसाझाग थाने के गांव नवदिया नगला सुलरा निवासी मोरपाल यादव एमएलसी और दर्जा राज्यमंत्री बनवारी सिंह यादव के रिश्तेदार है। मोरपाल को हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा हो चुकी है। जेल प्रशासन से सांठगांठ कर मोरपाल ने 14 मार्च को खुद को जेल से अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज के लिए इलाज के बहाने रेफर करा लिया था। मोरपाल की अभिरक्षा में सिपाही दुर्गा सिंह और रामप्रसाद को भेजा गया था। मोरपाल मेडिकल कॉलेज में भर्ती ही नहीं हुआ। सिपाही उसे मौज कराते रहे। जेल प्रशासन और पुलिस की यह कारगुजारी अखबारों की सुर्खियों में आई, तो 31 मार्च को मोरपाल जेल पहुंचा।
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बिना डिस्चार्ज स्लिप के ही जेल प्रशासन ने उसे जेल में दाखिल कर लिया था। सिपाहियों ने लिखित जवाब में कहा था कि इतने दिन तक वह मेडिकल कॉलेज के रैन बसेरा में रहे। एसएसपी सौमित्र यादव ने प्रथम दृष्टया दोनों सिपाहियों को दोषी मानते हुए सस्पेंड कर दिया था। पूरे मामले में जांच सीओ लाइन श्योराज सिंह को सौंपी गई थी। सीओ लाइन ने जांच में दोनों सिपाहियों को दोषी पाया। उन्होंने अपनी रिपोर्ट एसएसपी सौमित्र यादव को सौंप दी। रिपोर्ट के आधार पर एसएसपी ने दोनों सिपाहियों को बर्खास्त कर दिया है।
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जांच में दोनों सिपाहियों की संलिप्तता पाई गई है। सजायाफ्ता किसी अस्पताल में भर्ती नहीं हुआ। उसने कहीं इलाज भी नहीं कराया। सिपाहियों ने इस संबंध में विभागीय अधिकारियों को कुछ नहीं बताया। दोषी पाते हुए दोनों सिपाहियों को बर्खास्त कर दिया गया है।
-सौमित्र यादव, एसएसपी