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स्कूल के प्रबंधक और कैंटीन संचालक पर रिपोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो बदायूं।
Updated Sun, 30 Apr 2017 12:08 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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बीआरबी स्कूल में घटिया चाउमीन खाने से 24 बच्चों के बीमार होने का मामला
जांच में पाए गए थे दोषी, सभी पर धारा 3/7 के तहत मुकदमा दर्ज
चाउमीन खाकर 24 बच्चों के बीमार पड़ने के मामले में जिला प्रशासन ने शनिवार को शहर में बरेली रोड स्थित बीआरबी स्कूल के प्रबंधन और कैंटीन संचालक पर कार्रवाई कर दी। स्कूल प्रबंधक सुभाष बत्रा और कैंटीन संचालक विनीत कश्यप के खिलाफ शनिवार को दोपहर सिविल लाइंस थाने में मुकदमा दर्ज करा दिया गया।
मामले में आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3/7 के तहत पूर्ति निरीक्षक जयवीर सिंह की ओर से मुकदमा दर्ज कराया गया है। स्कूल में शुक्रवार को घटिया क्वालिटी की चाउमीन खाने से 24 छात्र-छात्राएं बीमार हो गए थे। डीएम ने मामले में जांच के लिए सिटी मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में पांच सदस्यों की टीम बनाई थी। टीम ने जांच में प्रबंधक सुभाष बत्रा, प्रधानाचार्य राजीव राठौर और कैंटीन संचालक विनीत कश्यप को दोषी पाया था।
बीआरबी स्कूल की कैंटीन में शुक्रवार लंच टाइम में बच्चों ने चाउमीन खाई थी। कुछ ही देर के बाद बच्चों को पेट में दर्द के साथ उल्टियां होने लगीं। विद्यालय प्रबंधन ने बिना प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को सूचना दिए 24 बच्चों को डॉ. संतोख सिंह के नर्सिंग होम में भर्ती करा दिया। इस बारे में नवागत डीएम अनिता श्रीवास्तव को जैसे ही पता लगा तो उन्होंने सिटी मजिस्ट्रेट समेत अधिकारियों की टीम को मौके पर भेजा। इस दौरान स्कूल प्रबंधन ने साक्ष्य मिटाने के लिए कैंटीन से फास्ट फूड को कूड़े के ढेर में फिकवा दिया। परिसर में तलाशी के बाद जिला अभिहीत अधिकारी संजय शर्मा ने टीम के साथ यहां परिसर से ढूंढकर फास्ट फूड के नमूने लिए थे।
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डीएम की जांच कमेटी में शामिल सिटी मजिस्ट्रेट श्रीराम यादव, डीआईओएस राकेश कुमार, बीएसए पीसी यादव, अभिहीत अधिकारी संजय शर्मा और संक्रामक रोग नियंत्रण सेल प्रभारी डॉ. कौशल गुप्ता ने बीआरबी स्कूल के प्रबंधक सुभाष बत्रा, प्रधानाचार्य राजीव राठौर और कैंटीन संचालक विनीत कश्यप को दोषी पाया था। सोमवार को प्रबंधक और कैंटीन संचालक के खिलाफ सिविल लाइंस पुलिस ने धारा 3/7 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया। हालांकि, प्रधानाचार्य को इसमें आरोपी नहीं बनाया गया है।
कैंटीन संचालक से रोज 350 रुपये लेता था स्कूल प्रबंधन
बदायूं। जांच के दौरान पूछताछ में कैंटीन संचालक विनीत कश्यप ने अधिकारियों को यह भी बताया था कि प्रबंधक सुभाष बत्रा उससे कैंटीन के किराए के रूप में रोज 350 रुपये लिया करते थे। खाद्य पदार्थ भी सुभाष बत्रा के निर्देशों पर तैयार किए जाते थे। जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा है कि स्कूल प्रबंधन ने आर्थिक लाभ के लालच में बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया है।
ब्लैक में खरीदे गैस सिलेंडर, चूल्हा भी जांच को भेजा
बदायूं। जिला पूर्ति अधिकारी रामेंद्र प्रताप सिंह को स्कूल में मौके पर दो रसोई गैस सिलेंडर और एक चूल्हा मिला था। एक सिलेंडर भरा हुआ था और दूसरा कुछ खाली था। यह सिलेंडर भी ब्लैक में खरीदे गए थे। पूर्ति निरीक्षक जसवीर सिंह ने बताया कि घरेलू गैस सिलेंडरों का व्यवसायिक इस्तेमाल पैट्रोलियम गैस विनियमन और वितरण आदेश का उल्लंघन है। यह आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3/7 के तहत दंडनीय अपराध है। मौके पर मिले दो घरेलू गैस सिलेंडर और व्यवसायिक चूल्हों को अभिरक्षा में लेकर मैसर्स सिंह इंटरप्राइजेज और भारत गैस एजेंसी की सुपुर्दगी में दे दिया गया है।
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जांच में पाए गए थे दोषी, सभी पर धारा 3/7 के तहत मुकदमा दर्ज
चाउमीन खाकर 24 बच्चों के बीमार पड़ने के मामले में जिला प्रशासन ने शनिवार को शहर में बरेली रोड स्थित बीआरबी स्कूल के प्रबंधन और कैंटीन संचालक पर कार्रवाई कर दी। स्कूल प्रबंधक सुभाष बत्रा और कैंटीन संचालक विनीत कश्यप के खिलाफ शनिवार को दोपहर सिविल लाइंस थाने में मुकदमा दर्ज करा दिया गया।
मामले में आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3/7 के तहत पूर्ति निरीक्षक जयवीर सिंह की ओर से मुकदमा दर्ज कराया गया है। स्कूल में शुक्रवार को घटिया क्वालिटी की चाउमीन खाने से 24 छात्र-छात्राएं बीमार हो गए थे। डीएम ने मामले में जांच के लिए सिटी मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में पांच सदस्यों की टीम बनाई थी। टीम ने जांच में प्रबंधक सुभाष बत्रा, प्रधानाचार्य राजीव राठौर और कैंटीन संचालक विनीत कश्यप को दोषी पाया था।
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बीआरबी स्कूल की कैंटीन में शुक्रवार लंच टाइम में बच्चों ने चाउमीन खाई थी। कुछ ही देर के बाद बच्चों को पेट में दर्द के साथ उल्टियां होने लगीं। विद्यालय प्रबंधन ने बिना प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को सूचना दिए 24 बच्चों को डॉ. संतोख सिंह के नर्सिंग होम में भर्ती करा दिया। इस बारे में नवागत डीएम अनिता श्रीवास्तव को जैसे ही पता लगा तो उन्होंने सिटी मजिस्ट्रेट समेत अधिकारियों की टीम को मौके पर भेजा। इस दौरान स्कूल प्रबंधन ने साक्ष्य मिटाने के लिए कैंटीन से फास्ट फूड को कूड़े के ढेर में फिकवा दिया। परिसर में तलाशी के बाद जिला अभिहीत अधिकारी संजय शर्मा ने टीम के साथ यहां परिसर से ढूंढकर फास्ट फूड के नमूने लिए थे।
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डीएम की जांच कमेटी में शामिल सिटी मजिस्ट्रेट श्रीराम यादव, डीआईओएस राकेश कुमार, बीएसए पीसी यादव, अभिहीत अधिकारी संजय शर्मा और संक्रामक रोग नियंत्रण सेल प्रभारी डॉ. कौशल गुप्ता ने बीआरबी स्कूल के प्रबंधक सुभाष बत्रा, प्रधानाचार्य राजीव राठौर और कैंटीन संचालक विनीत कश्यप को दोषी पाया था। सोमवार को प्रबंधक और कैंटीन संचालक के खिलाफ सिविल लाइंस पुलिस ने धारा 3/7 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया। हालांकि, प्रधानाचार्य को इसमें आरोपी नहीं बनाया गया है।
कैंटीन संचालक से रोज 350 रुपये लेता था स्कूल प्रबंधन
बदायूं। जांच के दौरान पूछताछ में कैंटीन संचालक विनीत कश्यप ने अधिकारियों को यह भी बताया था कि प्रबंधक सुभाष बत्रा उससे कैंटीन के किराए के रूप में रोज 350 रुपये लिया करते थे। खाद्य पदार्थ भी सुभाष बत्रा के निर्देशों पर तैयार किए जाते थे। जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा है कि स्कूल प्रबंधन ने आर्थिक लाभ के लालच में बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया है।
ब्लैक में खरीदे गैस सिलेंडर, चूल्हा भी जांच को भेजा
बदायूं। जिला पूर्ति अधिकारी रामेंद्र प्रताप सिंह को स्कूल में मौके पर दो रसोई गैस सिलेंडर और एक चूल्हा मिला था। एक सिलेंडर भरा हुआ था और दूसरा कुछ खाली था। यह सिलेंडर भी ब्लैक में खरीदे गए थे। पूर्ति निरीक्षक जसवीर सिंह ने बताया कि घरेलू गैस सिलेंडरों का व्यवसायिक इस्तेमाल पैट्रोलियम गैस विनियमन और वितरण आदेश का उल्लंघन है। यह आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3/7 के तहत दंडनीय अपराध है। मौके पर मिले दो घरेलू गैस सिलेंडर और व्यवसायिक चूल्हों को अभिरक्षा में लेकर मैसर्स सिंह इंटरप्राइजेज और भारत गैस एजेंसी की सुपुर्दगी में दे दिया गया है।