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इलाज में लापरवाही से नहीं हुई थी विधायक की मौत
बदायूं, ब्यूरो
Updated Fri, 01 Jul 2016 11:08 PM IST
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तीन महीने बाद आई उच्चस्तरीय कमेटी की रिपोर्ट
जिला अस्पताल के ईएमओ को दी गई क्लीनचिट
मुरादाबाद जिले की बिलारी विधानसभा से सपा विधायक हाजी इरफान की मौत इलाज में लापरवाही से नहीं हुई थी। तीन महीने बाद आई उच्चस्तरीय जांच रिपोर्ट में जिला अस्पताल के ईएमओ डॉ. राजेश वर्मा को क्लीनचिट दी गई है। हालांकि, जांच रिपोर्ट में माना गया कि तत्कालीन सीएमएस डॉ. एसके दीक्षित ने मामले में प्रशासनिक सूझबूझ का परिचय नहीं दिया। राज्यपाल ने इसके लिए सीएमएस की निंदा की है।
बिलारी के सपा विधायक हाजी इरफान की फॉच्र्यूनर गाड़ी 10 मार्च को मुजरिया-कछला रोड पर दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। हादसे में दो लोगों की मौके पर मौत हो गई। विधायक गंभीर घायल हो गए। उनको पहले सीएचसी उझानी लाया गया यहां से जिला अस्पताल भेजा दिया गया। जिला अस्पताल के ईएमओ डॉ. राजेश वर्मा ने विधायक को बेहतर इलाज के लिए बरेली रेफर कर दिया था। विधायक ने रामगंगा पुल के पास दम तोड़ दिया था। विधायक की मौत पर काफी बवाल हुआ।
विधायक के बेटे मोहम्मद फहीम ने सीएमएस डॉ. एसके अग्निहोत्री और ईएमओ डॉ. राजेश वर्मा के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। शासन के आदेश पर प्रमुख सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य अरविंद कुमार ने जांच के लिए दो सदस्यों की उच्च स्तरीय कमेटी गठित की। जांच कमेटी में शामिल डॉ. एसपी त्रिपाठी और डॉ. सीपी आर्य ने तन महीने बाद रिपोर्ट शासन को सौंप दी। जांच रिपोर्ट में ईएमओ डॉ. राजेश वर्मा को क्लीनचिट देते हुए साफ कहा गया है कि विधायक के इलाज में कोई लापरवाही नहीं हुई। हालांकि सीएमएस स्तर पर प्रशासनिक चूक मानी गई है। ऐसे में राज्यपाल ने सीएमएस की निंदा का आदेश दिया है।
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मैं पहले से ही कह रहा था कि विधायक के इलाज में कोई लापरवाही नहीं बरती गई। जो भी संभव था वह इलाज किया गया। विधायक को बचाने की हर संभव कोशिश की गई। जांच रिपोर्ट से सच सामने आ गया है।
-डॉ. राजेश वर्मा, ईएमओ जिला अस्पताल बदायूं
यहां हुई प्रशासनिक चूक
जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसे मौके पर सीएमएस को अपने विवेक का इस्तेमाल करते हुए एक चिकित्सक को एंबुलेंस के साथ भेजना चाहिए था। जिसका निर्णय करने में सीएमएस ने प्रशासनिक चूक का परिचय दिया। ऐसे में राज्यपाल ने सीएमएस की निंदा का आदेश दिया है।
जिला अस्पताल के ईएमओ को दी गई क्लीनचिट
मुरादाबाद जिले की बिलारी विधानसभा से सपा विधायक हाजी इरफान की मौत इलाज में लापरवाही से नहीं हुई थी। तीन महीने बाद आई उच्चस्तरीय जांच रिपोर्ट में जिला अस्पताल के ईएमओ डॉ. राजेश वर्मा को क्लीनचिट दी गई है। हालांकि, जांच रिपोर्ट में माना गया कि तत्कालीन सीएमएस डॉ. एसके दीक्षित ने मामले में प्रशासनिक सूझबूझ का परिचय नहीं दिया। राज्यपाल ने इसके लिए सीएमएस की निंदा की है।
बिलारी के सपा विधायक हाजी इरफान की फॉच्र्यूनर गाड़ी 10 मार्च को मुजरिया-कछला रोड पर दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। हादसे में दो लोगों की मौके पर मौत हो गई। विधायक गंभीर घायल हो गए। उनको पहले सीएचसी उझानी लाया गया यहां से जिला अस्पताल भेजा दिया गया। जिला अस्पताल के ईएमओ डॉ. राजेश वर्मा ने विधायक को बेहतर इलाज के लिए बरेली रेफर कर दिया था। विधायक ने रामगंगा पुल के पास दम तोड़ दिया था। विधायक की मौत पर काफी बवाल हुआ।
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विधायक के बेटे मोहम्मद फहीम ने सीएमएस डॉ. एसके अग्निहोत्री और ईएमओ डॉ. राजेश वर्मा के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। शासन के आदेश पर प्रमुख सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य अरविंद कुमार ने जांच के लिए दो सदस्यों की उच्च स्तरीय कमेटी गठित की। जांच कमेटी में शामिल डॉ. एसपी त्रिपाठी और डॉ. सीपी आर्य ने तन महीने बाद रिपोर्ट शासन को सौंप दी। जांच रिपोर्ट में ईएमओ डॉ. राजेश वर्मा को क्लीनचिट देते हुए साफ कहा गया है कि विधायक के इलाज में कोई लापरवाही नहीं हुई। हालांकि सीएमएस स्तर पर प्रशासनिक चूक मानी गई है। ऐसे में राज्यपाल ने सीएमएस की निंदा का आदेश दिया है।
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मैं पहले से ही कह रहा था कि विधायक के इलाज में कोई लापरवाही नहीं बरती गई। जो भी संभव था वह इलाज किया गया। विधायक को बचाने की हर संभव कोशिश की गई। जांच रिपोर्ट से सच सामने आ गया है।
-डॉ. राजेश वर्मा, ईएमओ जिला अस्पताल बदायूं
यहां हुई प्रशासनिक चूक
जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसे मौके पर सीएमएस को अपने विवेक का इस्तेमाल करते हुए एक चिकित्सक को एंबुलेंस के साथ भेजना चाहिए था। जिसका निर्णय करने में सीएमएस ने प्रशासनिक चूक का परिचय दिया। ऐसे में राज्यपाल ने सीएमएस की निंदा का आदेश दिया है।