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आग की लपट़ों में घिरे बच्चों समेत गृहस्वामी झुलसा
बदायूं, ब्यूरो
Updated Tue, 21 Feb 2017 11:31 PM IST
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हुसैनपुर खेड़ा में हुआ हादसा, दीये की लौ से लगी आग
झोपड़ीनुमा घर में रखा अनाज और सामान भी स्वाहा
हुसैनपुर खेड़ा गांव में दीये की लौ ने झोपड़ीनुमा घर को जला दिया। उस वक्त गृहस्वामी धर्मवीर समेत परिवार के सभी सदस्य सो रहे थे। आग की लपटों में घिर जाने के बाद गृहस्वामी ने बच्चों को बाहर निकालने की कोशिश की लेकिन वह अपने दोनों बच्चों और भाई समेत मामूली रूप से झुलस गया। लेखपाल ने आग से हुए नुकसान का आकलन कर रिपोर्ट तहसीलदार को भेज दी है।
कोतवाली क्षेत्र के गांव हुसैनपुर खेड़ा में हादसा रात करीब 11 बजे हुआ। धर्मवीर सिंह के कच्चे मकान के ऊपर छप्पर पड़ा था। खाना खाने के बाद गृहस्वामी समेत उसके परिवार के सदस्य सो गए थे। उसी दौरान छप्पर में आग की लपटें उठने लगीं। सबसे पहले गृहस्वामी और उसका बड़ा भाई लीलाधर जागा। दोनों से बच्चों को निकालने के लिए गोद में उठा लिया। बच्चों में तीन वर्षीय खुशबू और पांच वर्षीय अंकित को लेकर दोनों बाहर निकलते, उससे पहले ही लपटों ने उन्हें घेर लिया। खुशबू, अंकित और भाई लीलाधर तथा गृहस्वामी मामूली रूप से झुलस गए। चीख पुकार सुन जागे ग्रामीणों ने निजी संसाधनों से आग पर काबू तो पा लिया लेकिन तब घर में रखा अनाज, घरेलू सामान और रोजमर्रा इस्तेमाल के कपड़े आग की भेंट चढ़ चुके थे। आग से करीब एक लाख रुपये का नुकसान हो गया। झुलसे बच्चों का निजी क्लीनिक पर इलाज भी कराया गया। आग की सूचना के बाद सुबह में मौके पर पहुंचे लेखपाल रामनरेश ने पीड़ित परिवार समेत आसपास के लोगों से हादसे के बारे में जानकारी हासिल की। लेखपाल ने बताया कि आग से हुए नुकसान की रिपोर्ट तैयार कर उन्होंने तहसीलदार को भेज दी है। हादसे की वजह से देर रात तक गांव में अफरातफरी का माहौल बना रहा।
झोपड़ीनुमा घर में रखा अनाज और सामान भी स्वाहा
हुसैनपुर खेड़ा गांव में दीये की लौ ने झोपड़ीनुमा घर को जला दिया। उस वक्त गृहस्वामी धर्मवीर समेत परिवार के सभी सदस्य सो रहे थे। आग की लपटों में घिर जाने के बाद गृहस्वामी ने बच्चों को बाहर निकालने की कोशिश की लेकिन वह अपने दोनों बच्चों और भाई समेत मामूली रूप से झुलस गया। लेखपाल ने आग से हुए नुकसान का आकलन कर रिपोर्ट तहसीलदार को भेज दी है।
कोतवाली क्षेत्र के गांव हुसैनपुर खेड़ा में हादसा रात करीब 11 बजे हुआ। धर्मवीर सिंह के कच्चे मकान के ऊपर छप्पर पड़ा था। खाना खाने के बाद गृहस्वामी समेत उसके परिवार के सदस्य सो गए थे। उसी दौरान छप्पर में आग की लपटें उठने लगीं। सबसे पहले गृहस्वामी और उसका बड़ा भाई लीलाधर जागा। दोनों से बच्चों को निकालने के लिए गोद में उठा लिया। बच्चों में तीन वर्षीय खुशबू और पांच वर्षीय अंकित को लेकर दोनों बाहर निकलते, उससे पहले ही लपटों ने उन्हें घेर लिया। खुशबू, अंकित और भाई लीलाधर तथा गृहस्वामी मामूली रूप से झुलस गए। चीख पुकार सुन जागे ग्रामीणों ने निजी संसाधनों से आग पर काबू तो पा लिया लेकिन तब घर में रखा अनाज, घरेलू सामान और रोजमर्रा इस्तेमाल के कपड़े आग की भेंट चढ़ चुके थे। आग से करीब एक लाख रुपये का नुकसान हो गया। झुलसे बच्चों का निजी क्लीनिक पर इलाज भी कराया गया। आग की सूचना के बाद सुबह में मौके पर पहुंचे लेखपाल रामनरेश ने पीड़ित परिवार समेत आसपास के लोगों से हादसे के बारे में जानकारी हासिल की। लेखपाल ने बताया कि आग से हुए नुकसान की रिपोर्ट तैयार कर उन्होंने तहसीलदार को भेज दी है। हादसे की वजह से देर रात तक गांव में अफरातफरी का माहौल बना रहा।
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