{"_id":"45073e272028165949d4d50518be89c1","slug":"gangreap-hindi-news-6","type":"story","status":"publish","title_hn":"...तो शरणदाता नेताओं ने दिया बचाने का भरोसा","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
...तो शरणदाता नेताओं ने दिया बचाने का भरोसा
badaun
Updated Sun, 11 Jan 2015 11:23 PM IST
विज्ञापन
मूसाझाग में किशोरी के साथ गैंगरेप के आरोपी अवनीश की गिरफ्तारी की तरह वीरपाल यादव के पकड़े जाने की पटकथा भी काफी सोच समझकर लिखी गई। उसके तेवर भी यही बता रहे थे कि किसी ने उसे बचा लेने का पूरा भरोसा दिलाया है। घटना के बाद इतने दिनों तक वह सत्ताधारी दल के अपने आकाओं की शरण में रहा। उनसे सलाह मशविरा लेता रहा। उन्हीं के समझाने पर अंतत: उसको पुलिस की सुपुर्दगी में देने का खाका तैयार किया गया।
सरेंडर अर्जी डालने के लिए उझानी के एक सपा नेता की कार से ही वीरपाल बदायूं गया था। वहां काम हो जाने के बाद वीरपाल को वही नेता बरेली में छोड़ गया। यहां उसके ठहरने की व्यवस्था सपा के दो बड़े नेताओं ने की। सूत्रों के अनुसार सरकार की किरकिरी बचाने के लिए पुलिस के आला अधिकारियों ने सपा के नेताओं से संपर्क किया। सपा के नेता भी सरकार की किरकिरी नहीं चाहते थे सो दूसरी बिरादरी के नेता के जरिये वीरपाल को पुलिस के कब्जे में देना तय हुआ। तीन बजे से ही बारादरी थाने की पुलिस सेटेलाइट बस अड्डे के पास जाकर खड़ी हो गई और वीरपाल पुलिस की गिरफ्त में आ गया। अवनीश भी कहानी गिरफ्तारी की कहानी भी कुछ इसी तरह की थी। उसे जंक्शन के पास से ही गिरफ्तार दिखाया गया। इसके पहले अचानक पुलिस ने वाहनों की चेकिंग शुरू कर दी थी। चेकिंग के बीच अचानक अवनीश की गिरफ्तारी की सूचना आ गई और आनन-फानन में मीडिया कर्मियों को कोतवाली बुलाकर थाना मूसाझाग के गैंगरेप के आरोपी अवनीश से सामना करा दिया गया।
हमने पहले की कहा था बरेली में है
अमर उजाला ने पहले की कहा था कि गैंगरेप का आरोपी वीरपाल यादव बरेली में छिपा है। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस कुछ सपा नेताओं के संपर्क में है। पुलिस बरेली या शाहजहांपुर से वीरपाल यादव की गिरफ्तारी दिखा सकती है। इससे पहले अमर उजाला ने प्रथम पृष्ठ पर प्रमुखता से प्रकाशित किया था कि वीरपाल शाहजहांपुर में छुपा है। सच भी यही निकला। दिल्ली, राजस्थान होकर आने के बाद वीरपाल ने अपने रिश्तेदारों की मदद से बरेली में ठिकाना बनाया था। आठ जनवरी की सुबह निगोही के सहजादपुर गांव से वीरपाल अपनी पत्नी और बच्चे को छोड़कर भाग गया था। अगले दिन पुलिस ने उसकी पत्नी, बेटे और साढू और साली को पकड़ा तो वह टूट गया। इसके अगले ही दिन उसने सरेंडर अर्जी डाल दी थी।
विज्ञापन
आईजी बोले, इश्यू यह नहीं कि कहां से पकड़ा गया
बरेली (ब्यूरो)। आईजी विजय सिंह मीना ने कहा कि वीरपाल ने प्रारंभिक पूछताछ में बताया है कि वह सेटेलाइट बस अड्डे पर कहीं जाने के लिए प्लान बना रहा था। वहीं से बदायूं और बरेली पुलिस की टीम ने उसे पकड़ा।
थाना बारादरी में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि वीरपाल की गिरफ्तारी में असफलता के पीछे वजह यह रही कि वह सिपाही था। इसलिए पुलिस से सभी तौर-तरीके जानता था। उसने घटना के अगले ही दिन अपना सिम और मोबाइल तोड़कर नाले में डाल दिया था। परिवार में भी किसी के संपर्क में नहीं था। दोनों की गिरफ्तारी पुलिस चौकी के पास से होने के सवाल पर आईजी बोले, इश्यू यह नहीं है कि गिरफ्तारी कहां से हुई। अच्छा यह हुआ कि दोनों पकड़े गए। उन्होंने कहा कि घटना को लेकर सरकार बेहद गंभीर थी। घटना के बाद इस मामले में कई लोगों पर कार्रवाई की गई। लड़की के ब्लड सैंपल दोबारा करा लिए गए हैं। वह सैंपल मामले में डॉक्टरों से फि र से बात करेंगे। इस केस में सुबूत जुटाकर सामान्य अपराधी की तरह सजा दिलाई जाएगी।
डॉन की तरह थाने पहुंचा भगोड़ा सिपाही
बरेली। गैंगरेप के आरोपी भगोड़े बर्खास्त सिपाही वीरपाल यादव पुलिस के कब्जे में आने के बाद बिल्कुल डॉन के अंदाज में बारादरी थाने लाया गया। बदायूं क्राइम ब्रांच की टीम की सफेद रंग की बोलेरो में वीरपाल था। उसके पीछे सीओ द्वितीय की बोलरो और सबसे पीछे थाना बारादरी की जीप चल रही थी। वीरपाल के बोलेरो से उतरते ही मीडिया कर्मियों ने उसे घेरकर सवाल करने शुरू कर दिए।
वीरपाल के चेहरे पर पछतावा जैसा कोई भाव नहीं था। चंद मिनट मीडिया के सामने सफाई देना भी उसको अपनी तौहीन लग रही थी। मीडिया पर गुस्सा उसने जाहिर कर ही दिया। कहने लगा, मुझे मीडिया ने डॉन बना दिया। उससे सवाल करना थाने में मौजूद उसके हमदर्दोें को बुरा लगने लगा। थाने के एक जिम्मेदारी वर्दी वाले ने तो उसके सवालों का खुद ही जवाब देना शुरू कर दिया। उसके बाद आनन-फानन में उसे मेडिकल के लिए भेजा गया।
वीरपाल ने कहा, मैं निर्दोष
सुनाई रटी-रटाई कहानी
वीरपाल यादव का कहना है कि उसका गैंगरेप की घटना से कोई लेना-देना नहीं है। वह निर्दोष है। बोला, ‘आप लोगों को क्या बताऊं, कोर्ट के सामने अपनी बात रखूंगा। पुलिस से इसलिए भाग रहा था कि परिस्थिति ऐसी थीं। मीडिया वालों ने उसे बिना वजह डॉन की तरह पेश करके और बदनाम कर दिया। सच्चाई यह है कि वह लड़की को जानता तक नहीं है। उसने लड़की के चाचा को शराब मामले में बंद कर दिया था। इसलिए उसके साजिशन फंसाया गया है। फरारी के दौरान वह इधर-उधर भटकता रहा। किसी ने उसका साथ नहीं दिया। वह शाहजहांपुर जाने के लिए बस का इंतजार कर रहा था। सेटेलाइट बस अड्डे के पास से पुलिस ने उसे पकड़ लिया।’
विज्ञापन
सरेंडर अर्जी डालने के लिए उझानी के एक सपा नेता की कार से ही वीरपाल बदायूं गया था। वहां काम हो जाने के बाद वीरपाल को वही नेता बरेली में छोड़ गया। यहां उसके ठहरने की व्यवस्था सपा के दो बड़े नेताओं ने की। सूत्रों के अनुसार सरकार की किरकिरी बचाने के लिए पुलिस के आला अधिकारियों ने सपा के नेताओं से संपर्क किया। सपा के नेता भी सरकार की किरकिरी नहीं चाहते थे सो दूसरी बिरादरी के नेता के जरिये वीरपाल को पुलिस के कब्जे में देना तय हुआ। तीन बजे से ही बारादरी थाने की पुलिस सेटेलाइट बस अड्डे के पास जाकर खड़ी हो गई और वीरपाल पुलिस की गिरफ्त में आ गया। अवनीश भी कहानी गिरफ्तारी की कहानी भी कुछ इसी तरह की थी। उसे जंक्शन के पास से ही गिरफ्तार दिखाया गया। इसके पहले अचानक पुलिस ने वाहनों की चेकिंग शुरू कर दी थी। चेकिंग के बीच अचानक अवनीश की गिरफ्तारी की सूचना आ गई और आनन-फानन में मीडिया कर्मियों को कोतवाली बुलाकर थाना मूसाझाग के गैंगरेप के आरोपी अवनीश से सामना करा दिया गया।
विज्ञापन
हमने पहले की कहा था बरेली में है
अमर उजाला ने पहले की कहा था कि गैंगरेप का आरोपी वीरपाल यादव बरेली में छिपा है। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस कुछ सपा नेताओं के संपर्क में है। पुलिस बरेली या शाहजहांपुर से वीरपाल यादव की गिरफ्तारी दिखा सकती है। इससे पहले अमर उजाला ने प्रथम पृष्ठ पर प्रमुखता से प्रकाशित किया था कि वीरपाल शाहजहांपुर में छुपा है। सच भी यही निकला। दिल्ली, राजस्थान होकर आने के बाद वीरपाल ने अपने रिश्तेदारों की मदद से बरेली में ठिकाना बनाया था। आठ जनवरी की सुबह निगोही के सहजादपुर गांव से वीरपाल अपनी पत्नी और बच्चे को छोड़कर भाग गया था। अगले दिन पुलिस ने उसकी पत्नी, बेटे और साढू और साली को पकड़ा तो वह टूट गया। इसके अगले ही दिन उसने सरेंडर अर्जी डाल दी थी।
विज्ञापन
आईजी बोले, इश्यू यह नहीं कि कहां से पकड़ा गया
बरेली (ब्यूरो)। आईजी विजय सिंह मीना ने कहा कि वीरपाल ने प्रारंभिक पूछताछ में बताया है कि वह सेटेलाइट बस अड्डे पर कहीं जाने के लिए प्लान बना रहा था। वहीं से बदायूं और बरेली पुलिस की टीम ने उसे पकड़ा।
थाना बारादरी में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि वीरपाल की गिरफ्तारी में असफलता के पीछे वजह यह रही कि वह सिपाही था। इसलिए पुलिस से सभी तौर-तरीके जानता था। उसने घटना के अगले ही दिन अपना सिम और मोबाइल तोड़कर नाले में डाल दिया था। परिवार में भी किसी के संपर्क में नहीं था। दोनों की गिरफ्तारी पुलिस चौकी के पास से होने के सवाल पर आईजी बोले, इश्यू यह नहीं है कि गिरफ्तारी कहां से हुई। अच्छा यह हुआ कि दोनों पकड़े गए। उन्होंने कहा कि घटना को लेकर सरकार बेहद गंभीर थी। घटना के बाद इस मामले में कई लोगों पर कार्रवाई की गई। लड़की के ब्लड सैंपल दोबारा करा लिए गए हैं। वह सैंपल मामले में डॉक्टरों से फि र से बात करेंगे। इस केस में सुबूत जुटाकर सामान्य अपराधी की तरह सजा दिलाई जाएगी।
डॉन की तरह थाने पहुंचा भगोड़ा सिपाही
बरेली। गैंगरेप के आरोपी भगोड़े बर्खास्त सिपाही वीरपाल यादव पुलिस के कब्जे में आने के बाद बिल्कुल डॉन के अंदाज में बारादरी थाने लाया गया। बदायूं क्राइम ब्रांच की टीम की सफेद रंग की बोलेरो में वीरपाल था। उसके पीछे सीओ द्वितीय की बोलरो और सबसे पीछे थाना बारादरी की जीप चल रही थी। वीरपाल के बोलेरो से उतरते ही मीडिया कर्मियों ने उसे घेरकर सवाल करने शुरू कर दिए।
वीरपाल के चेहरे पर पछतावा जैसा कोई भाव नहीं था। चंद मिनट मीडिया के सामने सफाई देना भी उसको अपनी तौहीन लग रही थी। मीडिया पर गुस्सा उसने जाहिर कर ही दिया। कहने लगा, मुझे मीडिया ने डॉन बना दिया। उससे सवाल करना थाने में मौजूद उसके हमदर्दोें को बुरा लगने लगा। थाने के एक जिम्मेदारी वर्दी वाले ने तो उसके सवालों का खुद ही जवाब देना शुरू कर दिया। उसके बाद आनन-फानन में उसे मेडिकल के लिए भेजा गया।
वीरपाल ने कहा, मैं निर्दोष
सुनाई रटी-रटाई कहानी
वीरपाल यादव का कहना है कि उसका गैंगरेप की घटना से कोई लेना-देना नहीं है। वह निर्दोष है। बोला, ‘आप लोगों को क्या बताऊं, कोर्ट के सामने अपनी बात रखूंगा। पुलिस से इसलिए भाग रहा था कि परिस्थिति ऐसी थीं। मीडिया वालों ने उसे बिना वजह डॉन की तरह पेश करके और बदनाम कर दिया। सच्चाई यह है कि वह लड़की को जानता तक नहीं है। उसने लड़की के चाचा को शराब मामले में बंद कर दिया था। इसलिए उसके साजिशन फंसाया गया है। फरारी के दौरान वह इधर-उधर भटकता रहा। किसी ने उसका साथ नहीं दिया। वह शाहजहांपुर जाने के लिए बस का इंतजार कर रहा था। सेटेलाइट बस अड्डे के पास से पुलिस ने उसे पकड़ लिया।’