फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Budaun News ›   Dataganj be made in Hashish is fake

दातागंज में बनाई जा रही नकली चरस

Sat, 30 May 2015 07:17 PM IST
Dataganj
Dataganj Updated Sat, 30 May 2015 07:17 PM IST
विज्ञापन

क्षेत्र में शराब की तरह चरस भी बड़े पैमाने पर नकली तैयार किया जा रहा है। नकली चरस जानलेवा साबित हो सकता है, लेकिन इसकी रोकथाम को प्रयास नहीं हो रहे हैं। मामूली लागत पर तैयार होने वाला चरस बाजार में 25-30 हजार रुपये प्रति किलो ग्राम की दर से बेचा जा रहा है। अंधाधुंध कमाई की वजह से इस धंधे में महिलाएं और बच्चे भी उतर गए हैं।

विज्ञापन

क्षेत्र में सड़क किनारे, धार्मिक स्थलों के पास गांजे की फसल खुद व खुद तैयार हो जाती है। कुछ लोग इसे नष्ट कर देते हैं, लेकिन नसेड़ी और धंधेबाज लोग इसकी सुरक्षा भी करते हैं। इसी पौधे से चरस (सुल्फा) तैयार होता है। पौधे के पकने पर कुछ विशेषज्ञ किस्म के लोग इनके पत्तों को हल्के हाथ से रगड़ते हैं। तभी उनके हाथों में काला-काला सा पदार्थ जम जाता है, जिसे बाद में छुटा लेते हैं। इसके अलावा यदि गांजे की फसल ज्यादा बीच में है, तो कुछ लोग सिर्फ लंगोटी बांधकर और शरीर पर सरसों का तेल लगाकर सूर्य की किरणें फूटने से पहले पूरी फसल को रगड़ते हुए घूमते रहते हैं। इनके पूरे शरीर पर वही काला-काला पदार्थ जम जाता है, जिसको बाद में ये छुटा लेते हैं। यह असली चरस (सुल्फा) माना जाता है। क्षेत्र में इसे हत्थू नाम भी दिया गया है। मगर यह बहुत कम मात्रा में तैयार होता है। और इसका मूल्य भी ज्यादा रहता है।
विज्ञापन


ऐसे बनता है नकली चरस
वर्तमान में गांजे के पत्तों को उबाल कर उनका पानी निचोड़कर उसमें धतूरे के बीज पीस कर मिलाए जाते हैं। धतूरे के बीज स्वास्थ्य के लिए बेहद घातक होते हैं। इसके अलावा काली धूपबत्ती, तारकोल का चूरा उबले हुए पत्तों में मिला दिया जाता है। इससे असली चरस से कहीं ज्यादा चमकदार नकली चरस तैयार हो जाता है। यही चरस क्षेत्र में बेचा जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


नेपाल में होता है अधिक उत्पादन
इसका सबसे ज्यादा उत्पादन नेपाल में होता है। महिलाओं, बच्चों और अपंग लोगों के मार्फत नेपाल से यह चरस लाया जाता है। साइकिल के ट्यूब में भी भरकर इसकी तस्करी की जाती है। इस धंधे में कमाई अंधाधुंध होती है। इसीलिए महिलाएं-बच्चे भी इस धंधे से जुड़ रहे हैं।

पुलिस ने बरामद किया था चरस
कुछ धार्मिक संस्थाओं से जुड़े लोग भी यह धंधा कर रहे हैं। एक सप्ताह पहले एक झोले में करीब एक किलो नकली चरस दातागंज पुलिस ने धार्मिक स्थल से बरामद किया था, लेकिन कारोबारी हाथ नहीं लगा। धार्मिकस्थल पर झोला बरामद होने पर पुलिस ने कोई कार्रवाई भी आगे नहीं बढ़ाई।


चरस पीने से हो सकता है कैंसर
किसी भी तरह का चरस व्यक्ति के लिए बेहद नुकसानदायक होता है। चरस पीने से कैंसर हो सकता है। यह किडनी और लीवर को डैमेज करता है। अधिक समय तक सेवन करने से मनुष्य शारीरिक रूप से बेकार हो जाता है।

-डॉ.सनोज मिश्रा, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, दातागंज

अवैध रूप से बेचे जा रहे नशीले पदार्थों की धरपकड़ के लिए अभियान चल रहा है। असली-नकली चरस की पहचान तो प्रयोगशाला में जांच के बाद होगी। ऐसे धंधेबाजों की तलाश की जा रही है।
- जेके तोमर, कोतवाल, दातागंज

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed