{"_id":"305af11bbfc8e5f236198ca9faeeec01","slug":"badaun-crime-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"चलो खेलें! ‘कातिल भाग पुलिस आई’ का खेल क्रासर.......... ","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
चलो खेलें! ‘कातिल भाग पुलिस आई’ का खेल क्रासर..........
उझानी (बदायूं)।
Updated Sat, 13 Dec 2014 12:05 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कोतवाली पुलिस इन दिनों अजीब उलझन में है। हाल ही में हत्या की ताबड़तोड़ घटनाएं हुईं। नामजदों की संख्या में भी इजाफा होता गया। प्रत्येक घटना में शामिल आरोपियों को तो पकड़ना है, सो उसे नामजदों के साथ कातिल भाग पुलिस आई के खेल से भी रूबरू होना पड़ रहा है।
सात नवंबर को सबसे मनहूस दिन मान रही इलाके की पुलिस के सामने सबसे बड़ी मुसीबत इस बात को लेकर है कि किसी एक सभी केस के सभी नामजद पकड़ में आते, उससे पहले ही एक-एक करके हत्या की घटनाओं में इजाफा होता गया। गद्दीटोला मोहल्ले के बबलू मौर्य और उसकी पत्नी की हत्या के बहुचर्तित केस में नामजद रूपचंद्र अभी भी फरार है। ज्योरा पारवाला के पप्पू के कातिलों में भी दो आरोपी पुलिस की पकड़ से दूर हैं। हुसैनपुर खेड़ा के छुटकन ठाकुर के कातिलों में प्रधान पति वीरेंद्र को खोजना मुश्किल हो गया है।
कातिल भाग पुलिस आई का खेल खेलते हुए पुलिस ने शुक्रवार को छुटकन के कातिलों में से सुखपाल और बन्ना को हिरासत में ले लिया। सुकटिया निवासी सब्जी विक्रेता रामसिंह की हत्या के मामले में भला हो ग्रामीणों का जो उन्होंने घेराबंदी करके कातिल को मौके पर ही दबोच लिया था। नौ दिसंबर को भैंसोरा के प्रधान पति की हत्या और बेटे केशपाल को घायल कर देने के मामले में पुलिस कटरी की खाक छाननी पड़ रही है।
विज्ञापन
32 दिन में 7 मर्डर, 28 नामजद
उझानी। क्राइम ऑफ कंट्रोल कहें या फिर कुछ और जो हत्या की घटनाओं को ग्राफ इस कदर तेजी से बढ़ा कि 32 दिन में दंपति समेत हत्या की छह घटना हो गईं। इन छह घटनाओं में मृतक संख्या सात है। पुलिस रिकार्ड पर गौर करें तो महिला समेत 28 लोग नामजद हुए। नामजदों की सर्वाधिक संख्या-आठ हुसैनपरु खेड़ा के छुटकन ठाकुर की हत्या में सामने आई।
विज्ञापन
सात नवंबर को सबसे मनहूस दिन मान रही इलाके की पुलिस के सामने सबसे बड़ी मुसीबत इस बात को लेकर है कि किसी एक सभी केस के सभी नामजद पकड़ में आते, उससे पहले ही एक-एक करके हत्या की घटनाओं में इजाफा होता गया। गद्दीटोला मोहल्ले के बबलू मौर्य और उसकी पत्नी की हत्या के बहुचर्तित केस में नामजद रूपचंद्र अभी भी फरार है। ज्योरा पारवाला के पप्पू के कातिलों में भी दो आरोपी पुलिस की पकड़ से दूर हैं। हुसैनपुर खेड़ा के छुटकन ठाकुर के कातिलों में प्रधान पति वीरेंद्र को खोजना मुश्किल हो गया है।
विज्ञापन
कातिल भाग पुलिस आई का खेल खेलते हुए पुलिस ने शुक्रवार को छुटकन के कातिलों में से सुखपाल और बन्ना को हिरासत में ले लिया। सुकटिया निवासी सब्जी विक्रेता रामसिंह की हत्या के मामले में भला हो ग्रामीणों का जो उन्होंने घेराबंदी करके कातिल को मौके पर ही दबोच लिया था। नौ दिसंबर को भैंसोरा के प्रधान पति की हत्या और बेटे केशपाल को घायल कर देने के मामले में पुलिस कटरी की खाक छाननी पड़ रही है।
विज्ञापन
32 दिन में 7 मर्डर, 28 नामजद
उझानी। क्राइम ऑफ कंट्रोल कहें या फिर कुछ और जो हत्या की घटनाओं को ग्राफ इस कदर तेजी से बढ़ा कि 32 दिन में दंपति समेत हत्या की छह घटना हो गईं। इन छह घटनाओं में मृतक संख्या सात है। पुलिस रिकार्ड पर गौर करें तो महिला समेत 28 लोग नामजद हुए। नामजदों की सर्वाधिक संख्या-आठ हुसैनपरु खेड़ा के छुटकन ठाकुर की हत्या में सामने आई।