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आर्मी कैंटीन पर पकड़ी शराब की अवैध बिक्री

Mon, 15 Dec 2014 11:33 PM IST
बदायूं।
बदायूं। Updated Mon, 15 Dec 2014 11:33 PM IST
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alcohol's black marketing
आर्मी कैंटीन से शराब की ब्लैक का एक बार फिर से भंडाफोड़ हुआ है। एक कर्मचारी ने ही कैंटीन से ब्लैक के लिए साबुन के खाली डिब्बों में ले जाई जा रहीं एक दर्जन शराब की बोतलें पकड़ लीं। इन बोतलों को कैंटीन परिसर में ही स्थित यहां के चौकीदार के कमरे में ले जाया जा रहा था। आरोप है कि चौकीदार के कमरे से ही शराब की बिक्री होती है। पूरे मामले को जिला सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास अधिकारी ले. कर्नल (सेवानिवृत्त) मोहर सिंह ने गंभीरता से लेते हुए इसकी जांच कराकर कार्रवाई की बात कही है। बता दें कि अक्तूबर में भी सोल्जर बोर्ड की एक टीम ने यहां छापेमारी करके चौकीदार के कमरे से ब्लैक में बेचने के लिए रखी शराब बरामद की थी।
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भारत, दीपक और रामपाल सिंह आर्मी कैंटीन के संविदा कर्मचारी हैं। सोमवार दोपहर साबुन के खाली डिब्बों में भरकर यहां का कर्मचारी भारत शराब चौकीदार रामपाल सिंह के कमरे पर पहुंच रहा था। ऐसा करते हुए इसे दूसरे कर्मचारी दीपक ने देख लिया। दीपक ने जब इससे बिना बिल कटे शराब को कैंटीन से बाहर ले जाने की बात पूछी तो वह हड़बड़ा गया। बाद में जब चौकीदार रामपाल के कमरे की तलाशी ली गई तो यहां भी आधा दर्जन शराब की बोतल मिलीं। सूचना पर कैंटीन मैनेजर सीपी सिंह राठौर भी पहुंच गए। चौकीदार रामपाल कैंटीन मैनेजर का रिश्तेदार है। कैंटीन मैनेजर ने पूरे मामले को पहले दबाने की कोशिश की मामला न दबने पर वह अपनी सफाई देने लगे। उनका कहना है कि दीपक नाम के जिस कर्मचारी ने शराब की ब्लैक का आरोप लगाया है दो महीने पहले उसको भी शराब की ब्लैक में पकड़ा गया था। इधर, जिला सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास अधिकारी ले. कर्नल (सेवानिवृत्त) मोहर सिंह ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई की बात कही है।
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इस तरह होता है शराब की ब्लैक का खेल
बदायूं। आर्मी कैंटीन ने दैनिक उपयोग की सभी वस्तुओं समेत शराब भी पूर्व सैनिकों और सैनिकों को रियायती दामों पर मिलती है। कैंटीन के कर्मचारी सैनिकों की विधवाओं के कार्ड पर खेल करते हैं। दरअसल, सैनिकों की विधवाएं शराब नहीं लेतीं। जब वह घरेलू सामान लेने कैंटीन पहुंचती हैं तो यहां तैनात कर्मचारी उनके स्मार्ट कार्ड से शराब का कोटा भी निकाल लेते हैं। इस तरह इर महीने सैकड़ों बोतलें निकालकर इनको बाजार मूल्य पर बेच दिया जाता है।
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जाट रेजीमेंट कमांडेंट को भेजी जाएगी रिपोर्ट
जिला सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास अधिकारी ले. कर्नल (सेवानिवृत्त) मोहर सिंह ने कहा कि कैंटीन से शराब की ब्लैक होने की शिकायतें उनको भी मिल रही हैं। करीब दो महीने पहले दीपक नाम के कर्मचारी को ब्लैक में पकड़ा गया था। इसके खिलाफ जांच चल रही है। उन्होंने कहा कि मामला बेहद गंभीर है। इस पर रिपोर्ट जाट रेजीमेंट के कमांडेंट को भेजी जाएगी। जो लोग भी सैनिकों और पूर्व सैनिकों का हक मारने का काम कर रहे हैं उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई कराई जाएगी।
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