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जमीन की रंजिश ले चुकी है मूंछ की लड़ाई का रूप
Updated Sun, 25 Nov 2018 04:55 PM IST
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जमीन की रंजिश ले चुकी है
‘मूंछ की लड़ाई’ का रूप
हुसैनपुर गांव के राजीव तोमर की हत्या का मामला
दो दशक पहले इंद्रपाल ठाकुर की हत्या से हुई थी खूनी खेल की शुरुआत
अब तक दोनों पक्षों के पांच लोगों की हो चुकी है हत्या
अमर उजाला ब्यूरो
उझानी (बदायूं)। हुसैनपुर में खूनी खेल की असल वजह तो कटरी में गंगा किनारे की जमीन ही रही है लेकिन करीब दो दशक पहले इंद्रपाल ठाकुर की हत्या के बाद रंजिश बढ़ती ही चली गई। एक के बाद एक हत्याओं का सिलसिला ऐसा चला कि राजीव की मौत के साथ ही मरने वालों की संख्या पांच हो गई। पहले जमीन को लेकर भले ही लड़ाई शुरू हुई लेकिन अब यह ‘मूंछ की लड़ाई’ का रूप ले चुकी है।
कटरी में गंगा किनारे सैकड़ों बीघा ऐसी जमीन है जिस पर मालिकाना हक को लेकर विवाद होता ही रहता है। ऐसा इसलिए भी कि गंगा में जब भी बाढ़ आए तो किसानों की कृषि योग्य भूमि उसके आगोश में समा जाती है। जलस्तर में गिरावट के बाद खाली पड़ी भूमि को अपने हिस्से की मानकर किसान कब्जा कर लेते हैं। कुछ इसी अंदाज में करीब दो दशक पहले जब जमीन पर कब्जे को लेकर विवाद बढ़ा तो इंद्रपाल ठाकुर की हत्या कर दी गई थी। इंद्रपाल की हत्या के बाद करीब एक दशक तक मामूली झगड़े तो हुए लेकिन बाद में विवाद ने ‘मूंछ की लड़ाई’ का रूप ले लिया। इंद्रपाल के साथ ही ठाकुर पक्ष की ओर से छुटकन सिंह और राजीव उर्फ राजू तो दूसरे पक्ष से दयाराम कश्यप ओर उसके भाई सुखपाल का खून बह चुका है। दो-तीन हत्याएं तो बदले की भावना का कारण बनी। हुसैनपुर के दोनों पक्ष को लेकर पुलिस अफसर भी हकीकत जानते हैं। जब भी कोई हत्या होती है, तब-तब गांव में अतिरिक्त फोर्स तैनात करके हमलावर पक्ष के घरों की रखवाली करनी पड़ती है। बता दें कि शुक्रवार शाम को एक पक्ष के चार सगे भाइयों ने राजीव तोमर को गोली मार दी थी। अगले दिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी।
हुसैनपुर की राजनीति में दोनों पक्ष असरदार
उझानी। हुसैनपुर में छुटकन ठाकुर और वीरेंद्र कश्यप के परिवार का खासा दखल रहा है। पंचायत चुनाव में उनका प्रभाव बरकरार रहा। इस समय छुटकन की मां प्रधान हैं लेकिन पहले वीरेंद्र के छोटे भाई की पत्नी का प्रधानी पर कब्जा रहा। इन्हीं दोनों के परिवारों के इर्दगिर्द गांव की राजनीति चली आई है। यही नहीं, इलाके में भी दोनों परिवार के लोग अपना प्रभाव दिखाने में पीछे नहीं रहते।
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नामजदों की गिरफ्तारी को दबिशों का दौर शुरू
उझानी। राजीव तोमर उर्फ राजू की हत्या के बाद पुलिस ने नामजदों की तलाश में शनिवार रात हुसैनपुर समेत आसपास गांवों में दबिश दी। पुलिस की दो टीमों के लिए आरोपियों की रिश्तेदारियों में दबिश को भेजा गया लेकिन कहीं पर भी पुलिस को गिरफ्तारी की दिशा में सफलता नहीं मिली। सूत्रों की माने तो आरोपियों ने गिरफ्तारी के डर से राजनीतिक शरण हासिल कर ली है।
हुसैनपुर से अतिरिक्त पुलिस फोर्स को हटा लिया गया है। पीएसी के साथ कछला चौकी पुलिस कर्मियों को गांव में रहने को कहा गया है। दोनों पक्ष के लोगों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।
- विनोद कुमार, कोतवाल
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‘मूंछ की लड़ाई’ का रूप
हुसैनपुर गांव के राजीव तोमर की हत्या का मामला
दो दशक पहले इंद्रपाल ठाकुर की हत्या से हुई थी खूनी खेल की शुरुआत
अब तक दोनों पक्षों के पांच लोगों की हो चुकी है हत्या
अमर उजाला ब्यूरो
उझानी (बदायूं)। हुसैनपुर में खूनी खेल की असल वजह तो कटरी में गंगा किनारे की जमीन ही रही है लेकिन करीब दो दशक पहले इंद्रपाल ठाकुर की हत्या के बाद रंजिश बढ़ती ही चली गई। एक के बाद एक हत्याओं का सिलसिला ऐसा चला कि राजीव की मौत के साथ ही मरने वालों की संख्या पांच हो गई। पहले जमीन को लेकर भले ही लड़ाई शुरू हुई लेकिन अब यह ‘मूंछ की लड़ाई’ का रूप ले चुकी है।
कटरी में गंगा किनारे सैकड़ों बीघा ऐसी जमीन है जिस पर मालिकाना हक को लेकर विवाद होता ही रहता है। ऐसा इसलिए भी कि गंगा में जब भी बाढ़ आए तो किसानों की कृषि योग्य भूमि उसके आगोश में समा जाती है। जलस्तर में गिरावट के बाद खाली पड़ी भूमि को अपने हिस्से की मानकर किसान कब्जा कर लेते हैं। कुछ इसी अंदाज में करीब दो दशक पहले जब जमीन पर कब्जे को लेकर विवाद बढ़ा तो इंद्रपाल ठाकुर की हत्या कर दी गई थी। इंद्रपाल की हत्या के बाद करीब एक दशक तक मामूली झगड़े तो हुए लेकिन बाद में विवाद ने ‘मूंछ की लड़ाई’ का रूप ले लिया। इंद्रपाल के साथ ही ठाकुर पक्ष की ओर से छुटकन सिंह और राजीव उर्फ राजू तो दूसरे पक्ष से दयाराम कश्यप ओर उसके भाई सुखपाल का खून बह चुका है। दो-तीन हत्याएं तो बदले की भावना का कारण बनी। हुसैनपुर के दोनों पक्ष को लेकर पुलिस अफसर भी हकीकत जानते हैं। जब भी कोई हत्या होती है, तब-तब गांव में अतिरिक्त फोर्स तैनात करके हमलावर पक्ष के घरों की रखवाली करनी पड़ती है। बता दें कि शुक्रवार शाम को एक पक्ष के चार सगे भाइयों ने राजीव तोमर को गोली मार दी थी। अगले दिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी।
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हुसैनपुर की राजनीति में दोनों पक्ष असरदार
उझानी। हुसैनपुर में छुटकन ठाकुर और वीरेंद्र कश्यप के परिवार का खासा दखल रहा है। पंचायत चुनाव में उनका प्रभाव बरकरार रहा। इस समय छुटकन की मां प्रधान हैं लेकिन पहले वीरेंद्र के छोटे भाई की पत्नी का प्रधानी पर कब्जा रहा। इन्हीं दोनों के परिवारों के इर्दगिर्द गांव की राजनीति चली आई है। यही नहीं, इलाके में भी दोनों परिवार के लोग अपना प्रभाव दिखाने में पीछे नहीं रहते।
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नामजदों की गिरफ्तारी को दबिशों का दौर शुरू
उझानी। राजीव तोमर उर्फ राजू की हत्या के बाद पुलिस ने नामजदों की तलाश में शनिवार रात हुसैनपुर समेत आसपास गांवों में दबिश दी। पुलिस की दो टीमों के लिए आरोपियों की रिश्तेदारियों में दबिश को भेजा गया लेकिन कहीं पर भी पुलिस को गिरफ्तारी की दिशा में सफलता नहीं मिली। सूत्रों की माने तो आरोपियों ने गिरफ्तारी के डर से राजनीतिक शरण हासिल कर ली है।
हुसैनपुर से अतिरिक्त पुलिस फोर्स को हटा लिया गया है। पीएसी के साथ कछला चौकी पुलिस कर्मियों को गांव में रहने को कहा गया है। दोनों पक्ष के लोगों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।
- विनोद कुमार, कोतवाल