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आरोपी भतीजा पकड़ा तो चाचा को मिली राहत
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बदायूं। जिस देशद्रोह की बात सुनकर सराफा व्यापारी की रूह कांप गई थी, उसे तो यकीन ही नहीं हो रहा कि उसे फंसाने में किसी और का नहीं बल्कि उसके सगे भतीजे का हाथ है। उसका खून ही उसे धोखा दे रहा था। जब से यह मामला प्रकाश में आया, तब से व्यापारी चैन से नहीं सो पाया लेकिन असली आरोपी का पता चलने के बाद सराफा व्यापारी ने राहत की सांस ली है।
सराफा व्यापारी दिलीप वर्मा दो भाई थे। उसका बड़ा भाई रामकुमार वर्मा अक्सर बीमार रहता था। उसका इलाज चल रहा था लेकिन रामकुमार का बेटा अरविंद कुमार वर्मा समझता था कि उसके पिता के साथ अन्याय किया जा रहा है। वह अंदर ही अंदर दुश्मनी पाल रहा था। दिलीप वर्मा इससे अनभिज्ञ था। फेसबुक पर जब पहला मेसेज डाला गया तो उसे पढ़कर वह सन्न रह गया था। उसी दिन उसे यकीन हो गया था कि कोई दुश्मन है, लेकिन कोई अपना इतना करीबी होगा, इसका उसे अंदाजा नहीं था। फेसबुक पर देशद्रोह की पोस्ट पढ़कर तो उसके होश ही उड़ गए थे। उसकी रातों की नींद और दिन का चैन खो गया था। वह समझ ही नहीं पा रहा था क्या करे। उसके खिलाफ कौन साजिश रच रहा था यह नहीं पता था। जिस दिन दिलीप वर्मा को पता चला उसके खिलाफ साजिश रचने वाला और कोई बल्कि उसका सगा भतीजा अरविंद है और पुलिस ने उसे दबोच लिया है तो पहले तो दिलीप को यकीन नहीं हुआ लेकिन पुलिस को मिले सुबूत देखे तो वह सन्न रह गया अब जाकर उसने राहत की सांस ली है।
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सराफा व्यापारी दिलीप वर्मा दो भाई थे। उसका बड़ा भाई रामकुमार वर्मा अक्सर बीमार रहता था। उसका इलाज चल रहा था लेकिन रामकुमार का बेटा अरविंद कुमार वर्मा समझता था कि उसके पिता के साथ अन्याय किया जा रहा है। वह अंदर ही अंदर दुश्मनी पाल रहा था। दिलीप वर्मा इससे अनभिज्ञ था। फेसबुक पर जब पहला मेसेज डाला गया तो उसे पढ़कर वह सन्न रह गया था। उसी दिन उसे यकीन हो गया था कि कोई दुश्मन है, लेकिन कोई अपना इतना करीबी होगा, इसका उसे अंदाजा नहीं था। फेसबुक पर देशद्रोह की पोस्ट पढ़कर तो उसके होश ही उड़ गए थे। उसकी रातों की नींद और दिन का चैन खो गया था। वह समझ ही नहीं पा रहा था क्या करे। उसके खिलाफ कौन साजिश रच रहा था यह नहीं पता था। जिस दिन दिलीप वर्मा को पता चला उसके खिलाफ साजिश रचने वाला और कोई बल्कि उसका सगा भतीजा अरविंद है और पुलिस ने उसे दबोच लिया है तो पहले तो दिलीप को यकीन नहीं हुआ लेकिन पुलिस को मिले सुबूत देखे तो वह सन्न रह गया अब जाकर उसने राहत की सांस ली है।
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