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‘बड़े भाई के धोखे में ले आए थे रेहान को, बाद में छोड़ दिया था’
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बदायूं। ककराला पुलिस चौकी में युवक को पीटने के मामले में निलंबित पुलिस कर्मियों ने अपने बयान दर्ज कराए हैं। उनके अनुसार वे रेहान को बड़े भाई रिजवान के धोखे में उठा लाए थे। युवक रिजवान नहीं रेहान है, इसके प्रमाण के लिए आधार कार्ड मंगाया गया था। उसकी मां और परिवार के कुछ अन्य लोगों के यह बताने पर कि पकड़ा गया युवक रेहान है, उसे तुरंत छोड़ दिया गया था।
इस प्रकरण में मंगलवार को एसपी देहात कार्यालय में ककराला पुलिस चौकी के निलंबित पुलिस कर्मियों के बयान दर्ज हुए। इससे पहले निलंबित चौकी इंचार्ज सत्यपाल सिंह, सिपाही नरेंद्र, शेखर चावला, सोनू और विपिन एसपी देहात से मिले। पांचों पुलिस कर्मियों ने बताया कि वह रेहान को उसके बड़े भाई रिजवान के धोखे में उठा लाए थे। उन्हें सूचना मिली थी कि रिजवान पशु तस्कर अमजद के लिए काम करता है। वह क्षेत्र में घुमंतू पशुओं को पकड़कर लाता है और उन्हें बाग में बांध देता है। वहां से अमजद पशुओं को पकड़वाकर दूसरे लोगों के हाथों कटवा देता है।
सूत्रों का कहना है कि पुलिस कर्मियों ने बताया कि जानकारी पाकर रेहान की मां और परिवार के अन्य लोग पहुंच गए थे। उन्होंने रेहान को पकड़ने का कारण भी पूछा था। जब पुलिस कर्मियों ने बताया कि यह रिजवान है तो उन्होंने दावा किया कि यह रेहान है। इस पर उसका आधार कार्ड भी मंगाया गया था।
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सूत्रों के अनुसार पांचों पुलिस कर्मियों ने दावा किया कि उन्होंने रेहान को कुछ समय बाद छोड़ दिया था लेकिन रेहान के परिवार वालों का आरोप था कि उसे रातभर पुलिस चौकी में रखा गया। उसके साथ मारपीट की गई। उसको करंट लगाया गया।
सूत्रों का कहना है कि पुलिस कर्मियों ने अपने निर्दोष होने की कुछ ऑडियो और वीडियो क्लिप भी दिखाईं। उनका यह भी कहना था कि जब रेहान को जिला अस्पताल ले जाया गया था। तब उसके परिवार वालों ने मारपीट नहीं बल्कि मिर्गी के दौरे पड़ने के बारे में कहा था।
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फैसलेनामे को बनाया आधार
निलंबित पुलिस कर्मी उसी फैसलेनामे को अपनी बेगुनाही का आधार बना रहे हैं, जिस पर परिवार वाले पहले ही सवाल उठा चुके हैं। परिवार वालों का कहना था कि जब युवक की हालत बिगड़ गई थी, तभी पुलिस कर्मी डर गए। उन्होंने पुलिस का रौब दिखाते हुए जबरन उनसे अंगूठा लगवा लिया जबकि उन्होंने कोई फैसलानामा नहीं दिया था।
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इस मामले की जांच चल रही है। इसमें सभी तथ्यों और सुबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। निलंबित पुलिस कर्मियों के बयान दर्ज कर लिए गए हैं।
- सिद्धार्थ वर्मा, एसपी देहात
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इस प्रकरण में मंगलवार को एसपी देहात कार्यालय में ककराला पुलिस चौकी के निलंबित पुलिस कर्मियों के बयान दर्ज हुए। इससे पहले निलंबित चौकी इंचार्ज सत्यपाल सिंह, सिपाही नरेंद्र, शेखर चावला, सोनू और विपिन एसपी देहात से मिले। पांचों पुलिस कर्मियों ने बताया कि वह रेहान को उसके बड़े भाई रिजवान के धोखे में उठा लाए थे। उन्हें सूचना मिली थी कि रिजवान पशु तस्कर अमजद के लिए काम करता है। वह क्षेत्र में घुमंतू पशुओं को पकड़कर लाता है और उन्हें बाग में बांध देता है। वहां से अमजद पशुओं को पकड़वाकर दूसरे लोगों के हाथों कटवा देता है।
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सूत्रों का कहना है कि पुलिस कर्मियों ने बताया कि जानकारी पाकर रेहान की मां और परिवार के अन्य लोग पहुंच गए थे। उन्होंने रेहान को पकड़ने का कारण भी पूछा था। जब पुलिस कर्मियों ने बताया कि यह रिजवान है तो उन्होंने दावा किया कि यह रेहान है। इस पर उसका आधार कार्ड भी मंगाया गया था।
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सूत्रों के अनुसार पांचों पुलिस कर्मियों ने दावा किया कि उन्होंने रेहान को कुछ समय बाद छोड़ दिया था लेकिन रेहान के परिवार वालों का आरोप था कि उसे रातभर पुलिस चौकी में रखा गया। उसके साथ मारपीट की गई। उसको करंट लगाया गया।
सूत्रों का कहना है कि पुलिस कर्मियों ने अपने निर्दोष होने की कुछ ऑडियो और वीडियो क्लिप भी दिखाईं। उनका यह भी कहना था कि जब रेहान को जिला अस्पताल ले जाया गया था। तब उसके परिवार वालों ने मारपीट नहीं बल्कि मिर्गी के दौरे पड़ने के बारे में कहा था।
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फैसलेनामे को बनाया आधार
निलंबित पुलिस कर्मी उसी फैसलेनामे को अपनी बेगुनाही का आधार बना रहे हैं, जिस पर परिवार वाले पहले ही सवाल उठा चुके हैं। परिवार वालों का कहना था कि जब युवक की हालत बिगड़ गई थी, तभी पुलिस कर्मी डर गए। उन्होंने पुलिस का रौब दिखाते हुए जबरन उनसे अंगूठा लगवा लिया जबकि उन्होंने कोई फैसलानामा नहीं दिया था।
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इस मामले की जांच चल रही है। इसमें सभी तथ्यों और सुबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। निलंबित पुलिस कर्मियों के बयान दर्ज कर लिए गए हैं।
- सिद्धार्थ वर्मा, एसपी देहात