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Budaun News: कोर्ट ने तत्कालीन एसएसपी व सीओ पर कार्रवाई के लिए डीजीपी व गृह सचिव को भेजा पत्र
Wed, 04 Sep 2024 04:59 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
Updated Wed, 04 Sep 2024 04:59 AM IST
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बदायूं। एससीएसटी कोर्ट की विशेष न्यायाधीश रिंकू जिंदल ने वर्ष 2018 के एक मामले में विधि विरुद्ध की गई कार्रवाई के संबंध में तत्कालीन एसएसपी व सीओ सहसवान रहे मुन्नालाल के विरुद्ध कार्रवाई के लिए डीजीपी व गृह सचिव को पत्र भेजा है।
अदालत की तरफ से कहा गया कि थाना इस्लामनगर निवासी अतर सिंह ने एक रिपोर्ट शिव शंकर कश्यप आदि के खिलाफ दर्ज कराई थी। जिसमें पूर्व विवेचक ने आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया था। पुन: विवेचना के आदेश हुए तो इसी मामले में दूसरे विवेचक ने एफआर लगा दी। तब अतर सिंह ने न्यायालय में प्रार्थना पत्र देकर फिर से विवेचना कराई।
पूछा कि जो आरोप पत्र दाखिल किया था वह सही था या फिर एफआर की कार्रवाई। न्यायालय ने प्रगति आख्या मांगी तो प्रेषित आरोप पत्र को सीओ सहसवान मुन्ना लाल ने एसएसपी बदायूं से निरस्त करने की प्रार्थना की। इस पर तत्कालीन एसएसपी ने 14 दिसंबर 2018 को आरोप पत्र निरस्त कर दिया और अंतिम रिपोर्ट प्रेषित कर विवेचना समाप्त कर दी। जबकि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को विवेचक द्वारा प्रेषित आरोप पत्र को निरस्त करने का अधिकार ही नहीं है।
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अदालत का कहना है कि अभियुक्तों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से विवेचना अपने तरीके से कर न्यायालय में अंतिम आख्या दी गई। तब न्यायाधीश ने विवेचक द्वारा दाखिल अंतिम आख्या निरस्त कर अभियुक्त शिव शंकर, राजीव, संजीव पर्व व रमेश सैनी को सीधे तलब कर लिया और तत्कालीन एसएसपी तथा तत्कालीन सीओ सहसवान मुन्ना लाल के खिलाफ कार्रवाई को लिखा है। बताया गया है कि प्रथम दृष्ट्या साक्ष्य होने के बावजूद आरोप पत्र प्रेषित किए जाने के बाद भी बिना किसी विधिक प्रावधान के आरोप पत्र को निरस्त किया गया। उनका यह कार्य विधिक प्रावधानों के विरुद्ध तथा अभियुक्तों को अनुचित लाभ दिए जाने को दर्शाता है।
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अदालत की तरफ से कहा गया कि थाना इस्लामनगर निवासी अतर सिंह ने एक रिपोर्ट शिव शंकर कश्यप आदि के खिलाफ दर्ज कराई थी। जिसमें पूर्व विवेचक ने आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया था। पुन: विवेचना के आदेश हुए तो इसी मामले में दूसरे विवेचक ने एफआर लगा दी। तब अतर सिंह ने न्यायालय में प्रार्थना पत्र देकर फिर से विवेचना कराई।
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पूछा कि जो आरोप पत्र दाखिल किया था वह सही था या फिर एफआर की कार्रवाई। न्यायालय ने प्रगति आख्या मांगी तो प्रेषित आरोप पत्र को सीओ सहसवान मुन्ना लाल ने एसएसपी बदायूं से निरस्त करने की प्रार्थना की। इस पर तत्कालीन एसएसपी ने 14 दिसंबर 2018 को आरोप पत्र निरस्त कर दिया और अंतिम रिपोर्ट प्रेषित कर विवेचना समाप्त कर दी। जबकि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को विवेचक द्वारा प्रेषित आरोप पत्र को निरस्त करने का अधिकार ही नहीं है।
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अदालत का कहना है कि अभियुक्तों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से विवेचना अपने तरीके से कर न्यायालय में अंतिम आख्या दी गई। तब न्यायाधीश ने विवेचक द्वारा दाखिल अंतिम आख्या निरस्त कर अभियुक्त शिव शंकर, राजीव, संजीव पर्व व रमेश सैनी को सीधे तलब कर लिया और तत्कालीन एसएसपी तथा तत्कालीन सीओ सहसवान मुन्ना लाल के खिलाफ कार्रवाई को लिखा है। बताया गया है कि प्रथम दृष्ट्या साक्ष्य होने के बावजूद आरोप पत्र प्रेषित किए जाने के बाद भी बिना किसी विधिक प्रावधान के आरोप पत्र को निरस्त किया गया। उनका यह कार्य विधिक प्रावधानों के विरुद्ध तथा अभियुक्तों को अनुचित लाभ दिए जाने को दर्शाता है।