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युवक के अपहरण-हत्या के मामले में छह को उम्रकैद
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बदायूं। चौदह साल पुराने अपहरण और हत्या के मामले में जिला एवं सत्र न्यायाधीश रमेश चंद्र दिवाकर ने दो सगे भाइयों सहित छह लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई है, साथ ही सभी पर एक लाख आठ हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
अपहरण-हत्या की यह वारदात थाना सिविल लाइंस क्षेत्र के गांव रसूलपुर में 15 नवंबर 2005 को हुई थी। गांव निवासी रामदास पुत्र सुंदरलाल ने 23 नवंबर 2005 को थाना सिविल लाइन में तहरीर दी कि उसका 20 वर्षीय पुत्र ब्रजकिशोर गांव के दुलार पुत्र नंदराम उर्फ नन्हे और महताब के साथ ककोड़ा मेला गया था। रिपोर्ट के मुताबिक उसका पुत्र मेला नही पहुंचा। काफी तलाश के बाद जब उसका कोई सुराग नही मिला तो उसने अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। बाद में युवक की लाश कई हिस्सों में बरामद हुई, जिसमें उसका सिर और दोनों हाथ अलग-अलग पाए गए। पुलिस की विवेचना में दुलार, महताब और थाना बिनावर क्षेत्र के गांव जाटव गौटिया निवासी कुंवरसेन पुत्र कंचन, शिवलाल पुत्र कोकिल, अजयपाल और राजेश पुत्रगण पोपी, रजागंज निवासी श्यामलाल और उसके पुत्र धर्मेंद्र समेत रामभरोसे पुत्र टोड़ी का नाम प्रकाश में आया। पुलिस ने सभी के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। मुकदमे के दौरान दुलार, धर्मेंद्र और रामभरोसे की मृत्यु हो गई।
जिला सत्र न्यायाधीश रमेश चंद्र दिवाकर ने अभियोजन की ओर से प्रभारी डीजीसी अनिल सिंह राठौर और बचाव पक्ष के अधिवक्ता की बहस सुनने के बाद युवक के अपहरण कर हत्या करने के मामले में सभी को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। कोर्ट ने सभी पर एक लाख आठ हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
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अपहरण-हत्या की यह वारदात थाना सिविल लाइंस क्षेत्र के गांव रसूलपुर में 15 नवंबर 2005 को हुई थी। गांव निवासी रामदास पुत्र सुंदरलाल ने 23 नवंबर 2005 को थाना सिविल लाइन में तहरीर दी कि उसका 20 वर्षीय पुत्र ब्रजकिशोर गांव के दुलार पुत्र नंदराम उर्फ नन्हे और महताब के साथ ककोड़ा मेला गया था। रिपोर्ट के मुताबिक उसका पुत्र मेला नही पहुंचा। काफी तलाश के बाद जब उसका कोई सुराग नही मिला तो उसने अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। बाद में युवक की लाश कई हिस्सों में बरामद हुई, जिसमें उसका सिर और दोनों हाथ अलग-अलग पाए गए। पुलिस की विवेचना में दुलार, महताब और थाना बिनावर क्षेत्र के गांव जाटव गौटिया निवासी कुंवरसेन पुत्र कंचन, शिवलाल पुत्र कोकिल, अजयपाल और राजेश पुत्रगण पोपी, रजागंज निवासी श्यामलाल और उसके पुत्र धर्मेंद्र समेत रामभरोसे पुत्र टोड़ी का नाम प्रकाश में आया। पुलिस ने सभी के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। मुकदमे के दौरान दुलार, धर्मेंद्र और रामभरोसे की मृत्यु हो गई।
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जिला सत्र न्यायाधीश रमेश चंद्र दिवाकर ने अभियोजन की ओर से प्रभारी डीजीसी अनिल सिंह राठौर और बचाव पक्ष के अधिवक्ता की बहस सुनने के बाद युवक के अपहरण कर हत्या करने के मामले में सभी को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। कोर्ट ने सभी पर एक लाख आठ हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
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