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कोरोना का असरः कन्या-लांगूर जिमाने हैं, बच्चों को भेज देना.. घरवाले बोले- ना बाबा ना
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उझानी (बदायूं)। कोरोना के डर का साया नवरात्र विसर्जन पर होने वाले कन्या-लांगूर भोज पर पड़ गया। इस दिन का बेसब्री से इंतजार करने वाली देवी स्वरूप बच्चियां और लांगूर गली-मोहल्लों में नजर नहीं आए। ऐसा नहीं कि कन्याभोज के लिए देवी के भक्तों ने उन्हें आमंत्रित नहीं किया हो। लोग उन्हें बुलाने के लिए जिस दर पर पहुंचे, उनमें से अधिकतर ने बच्चों को पड़ोसियों के घर भी भेजने से इंकार कर दिया। जिस घर में एक-दो कन्याएं थीं, भक्तों को उन्हीं का पूजन कर प्रसाद खिलाया।
नवरात्र विसर्जन पर कन्या-लांगूर भोज की खास मान्यता है। इसी के तहत नौ देवियों के रूप में बच्चियों और एक लांगूर को भोजन कराने के बाद देवी के भक्त पूजन कर अपनी सामर्थ्य के अनुरूप दक्षिणा भेंट करते हैं लेकिन इस बार तो एक दिन पहले अष्टमी पर ही भक्तों के सामने कन्या-लांगूर की समस्या सामने आ गई। नवमी पर बृहस्पतिवार को बहुत कम घरों में ही कन्या-लांगूर जुट पाए। बड़े मान-मनुहार और बच्चों को एक-दूसरे से दूर बैठाकर भोजन कराने का घरवालों को आश्वासन मिला, तभी उन्होंने बच्चियों को भेजा। अधिकतर घरों में तो कन्या-लांगूर भोज औपचारिकता की भेंट चढ़ गया। कहीं दो-तीन तो कहीं चार-पांच बच्चियां पहुंची। चूंकि बच्चियों की ही संख्या नौ होनी चाहिए, ऐसे में कुछेक घरों में तो मौजूद बच्चियों को ही दोगुना सामान और भेंट देकर विदा कर दिया गया। देवी भक्तों में अर्चना और प्रेमवती ने बताया कि वह सुबह में करीब एक दर्जनों घरों तक पहुंचीं लेकिन दो-चार को छोड़ बाकी लोगों ने अपने बच्चों को भोज के लिए भेजने से ही इंकार कर दिया।
नवरात्र पर बच्चों से गुलजार रहते थे गलियारे
उझानी। नवरात्र विसर्जन के दिन शायद ही ऐसा कोई मोहल्ला हो, जिसके गलियारों में देवी स्वरूप बच्चियों की रौनक नजर नहीं आती हो। बच्चों को उनके मनपंसद भोजन, डिमांड के अनुरूप फास्ट फूट के पैकेट, रुपये और विदाई की समय खेलने का सामान भी भेंट किया जाता था। भले ही कोई घर पहुंचकर निमंत्रण नहीं दे पाया लेकिन गलियारे में घूमते बच्चों को बुलाकर पूजन और भोजन के सभी काम विधि और विधान से पूरे हो जाते थे लेकिन बृहस्पतिवार को गलियारों में बच्चों की रौनक नजर नहीं आई।
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कन्या भोज न कराने का मलाल पर आस्था पर भरोसा
बदायूं। यह पहली बार है जब नवरात्र में प्राचीन देवी शक्ति पीठ नगला मंदिर के कपाट बंद रहे। नवमी के साथ नवरात्र का गुरुवार को परायण हो गया। उपवास कर नौ दिन तक देवी शक्ति की आराधना करने वाले भक्त इस नवरात्र नगला शक्ति पीठ में देवी के नौ स्वरूपों के दर्शन नहीं कर सके। नगला मंदिर के साथ शहर के अन्य प्रमुख मंदिरों के कपाट भी बंद रहे। नवरात्र व्रत कर नवमी को व्रत परायण के बाद अधिकांश लोगों ने कन्या भोज भी नहीं कराया। महिलाओं को इसका मलाल है, लेकिन उन्हें अपनी आस्था पर पूरा भरोसा है।
पहली बार है कि नवरात्र में कलश स्थापना के बाद देवी के दर्शन नहीं किए। मंदिर के कपाट बंद होने से व्रत परायण के बाद भी दर्शन नहीं हुए। कन्याभोज भी नहीं कराया। देवी शक्ति में पूरी आस्था है। नौ दिन घर पर ही देवी शक्ति की आराधना की। चैत्र नवरात्र का विशेष महत्व है। नवरात्र पर उपवास कर देवी की उपासना करने वाले के बिगड़े काम बन जाते हैं। - सरोज देवी
नवरात्र में पहली बार प्रमुख मंदिरों के कपाट बंद हैं। नवरात्र में नगला शक्ति पीठ पर देवी का नौ स्वरूप के दर्शन को हजारों भक्तों की लाइन लगती थीं। कोरोना वायरस से बचाव को देवी के भक्तों ने भी पूरा ध्यान रखा। नौ दिन घर पर ही उपवास रख उपासना की। बृहस्पतिवार को व्रत परायण के बाद काफी लोगों ने कन्या भोज भी नहीं कराया। - नयना
पहली बार नहीं निकाली गई श्री राम नवमी शोभा यात्रा
बदायूं। श्री सनातन धर्म सभा और महावीर सेवा दल की ओर से श्री राम जन्मोत्सव पर आयोजित होने वाली शोभा यात्रा का आयोजन इस बार कोरोना वायरस की वजह से नहीं किया गया। हर वर्ष शोभा यात्रा प्रसिद्घ बिरुआबाड़ी मंदिर से प्रारंभ होकर शहर में विभिन्न स्थानों पर भ्रमण करती है। कोरोना की वजह से पहली बार शहर में राम नवमी शोभा यात्रा नहीं निकाली गई।
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नवरात्र विसर्जन पर कन्या-लांगूर भोज की खास मान्यता है। इसी के तहत नौ देवियों के रूप में बच्चियों और एक लांगूर को भोजन कराने के बाद देवी के भक्त पूजन कर अपनी सामर्थ्य के अनुरूप दक्षिणा भेंट करते हैं लेकिन इस बार तो एक दिन पहले अष्टमी पर ही भक्तों के सामने कन्या-लांगूर की समस्या सामने आ गई। नवमी पर बृहस्पतिवार को बहुत कम घरों में ही कन्या-लांगूर जुट पाए। बड़े मान-मनुहार और बच्चों को एक-दूसरे से दूर बैठाकर भोजन कराने का घरवालों को आश्वासन मिला, तभी उन्होंने बच्चियों को भेजा। अधिकतर घरों में तो कन्या-लांगूर भोज औपचारिकता की भेंट चढ़ गया। कहीं दो-तीन तो कहीं चार-पांच बच्चियां पहुंची। चूंकि बच्चियों की ही संख्या नौ होनी चाहिए, ऐसे में कुछेक घरों में तो मौजूद बच्चियों को ही दोगुना सामान और भेंट देकर विदा कर दिया गया। देवी भक्तों में अर्चना और प्रेमवती ने बताया कि वह सुबह में करीब एक दर्जनों घरों तक पहुंचीं लेकिन दो-चार को छोड़ बाकी लोगों ने अपने बच्चों को भोज के लिए भेजने से ही इंकार कर दिया।
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नवरात्र पर बच्चों से गुलजार रहते थे गलियारे
उझानी। नवरात्र विसर्जन के दिन शायद ही ऐसा कोई मोहल्ला हो, जिसके गलियारों में देवी स्वरूप बच्चियों की रौनक नजर नहीं आती हो। बच्चों को उनके मनपंसद भोजन, डिमांड के अनुरूप फास्ट फूट के पैकेट, रुपये और विदाई की समय खेलने का सामान भी भेंट किया जाता था। भले ही कोई घर पहुंचकर निमंत्रण नहीं दे पाया लेकिन गलियारे में घूमते बच्चों को बुलाकर पूजन और भोजन के सभी काम विधि और विधान से पूरे हो जाते थे लेकिन बृहस्पतिवार को गलियारों में बच्चों की रौनक नजर नहीं आई।
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कन्या भोज न कराने का मलाल पर आस्था पर भरोसा
बदायूं। यह पहली बार है जब नवरात्र में प्राचीन देवी शक्ति पीठ नगला मंदिर के कपाट बंद रहे। नवमी के साथ नवरात्र का गुरुवार को परायण हो गया। उपवास कर नौ दिन तक देवी शक्ति की आराधना करने वाले भक्त इस नवरात्र नगला शक्ति पीठ में देवी के नौ स्वरूपों के दर्शन नहीं कर सके। नगला मंदिर के साथ शहर के अन्य प्रमुख मंदिरों के कपाट भी बंद रहे। नवरात्र व्रत कर नवमी को व्रत परायण के बाद अधिकांश लोगों ने कन्या भोज भी नहीं कराया। महिलाओं को इसका मलाल है, लेकिन उन्हें अपनी आस्था पर पूरा भरोसा है।
पहली बार है कि नवरात्र में कलश स्थापना के बाद देवी के दर्शन नहीं किए। मंदिर के कपाट बंद होने से व्रत परायण के बाद भी दर्शन नहीं हुए। कन्याभोज भी नहीं कराया। देवी शक्ति में पूरी आस्था है। नौ दिन घर पर ही देवी शक्ति की आराधना की। चैत्र नवरात्र का विशेष महत्व है। नवरात्र पर उपवास कर देवी की उपासना करने वाले के बिगड़े काम बन जाते हैं। - सरोज देवी
नवरात्र में पहली बार प्रमुख मंदिरों के कपाट बंद हैं। नवरात्र में नगला शक्ति पीठ पर देवी का नौ स्वरूप के दर्शन को हजारों भक्तों की लाइन लगती थीं। कोरोना वायरस से बचाव को देवी के भक्तों ने भी पूरा ध्यान रखा। नौ दिन घर पर ही उपवास रख उपासना की। बृहस्पतिवार को व्रत परायण के बाद काफी लोगों ने कन्या भोज भी नहीं कराया। - नयना
पहली बार नहीं निकाली गई श्री राम नवमी शोभा यात्रा
बदायूं। श्री सनातन धर्म सभा और महावीर सेवा दल की ओर से श्री राम जन्मोत्सव पर आयोजित होने वाली शोभा यात्रा का आयोजन इस बार कोरोना वायरस की वजह से नहीं किया गया। हर वर्ष शोभा यात्रा प्रसिद्घ बिरुआबाड़ी मंदिर से प्रारंभ होकर शहर में विभिन्न स्थानों पर भ्रमण करती है। कोरोना की वजह से पहली बार शहर में राम नवमी शोभा यात्रा नहीं निकाली गई।