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Budaun News: पांच बार जीती पर 1998 में दो फीसदी मत भी नहीं पा सकी कांग्रेस
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बदायूं। लोकसभा क्षेत्र के चुनाव में 17 में 16 बार कांग्रेस ने चुनाव लड़ा। पांच बार ही चुनाव जीती। 1998 में दो फीसदी मत भी कांग्रेस नहीं पा सकी थी। बदायूं संसदीय सीट पर जनाधार लगातार घटा है। साल 1984 के बाद कांग्रेस नहीं जीत सकी। साल 1996 के बाद हुए चुनावों में सिर्फ 2009 में जमानत बची थी। अबकी बार तो कोई उम्मीदवार मैदान में ही नहीं है, क्योंकि इंडी गठबंधन में यह सीट सपा को मिली है।
सपा के आदित्य यादव किस्मत आजमा रहे हैं। कांग्रेसी उनके साथ ही जुटे हैं, लेकिन कांग्रेसियों के लिए परंपरागत मतों को सपा की ओर मोड़ पाना मुश्किल साबित हो रहा है, क्योंकि भाजपा ने खासकर उन मतदाताओं पर डोरे डाले हैं जो सवर्ण हैं और कभी कांग्रेस के लिए समर्पित रहा करते थे। साल 1952-1957 तक बदन सिंह पहले कांग्रेसी सांसद थे। 1984 में सहानुभूति लहर में जीते सलीम इकबाल शेरवानी कांग्रेस के चुनाव चिह्न से जीते आखिरी सांसद रहे थे।
साल 2014 के चुनाव में कांग्रेस मैदान में नहीं थी। कांग्रेस के प्रदेश सचिव अजीत यादव कहते हैं कांग्रेस सेक्युलर ताकतों को सपा से जोड़ रही है। भाजपा इसे लेकर उलझन में है। भाजपा के मीडिया प्रभारी आशीष शाक्य का कहना है कि कांग्रेस जनाधार खो चुकी है। उदाहरण पिछले चुनाव हैं। यही बात भाजपा के पन्ना प्रमुखों ने भी बताई है। इसलिए तमाम लोग जो अतीत में कांग्रेस के साथ थे, अब भाजपा के साथ आ रहे हैं।
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कब-कब जीती कांग्रेस, कुल कितने प्रतिशत मिले मतसाल
1952 कांग्रेस बदन सिंह 54.21
1957 कांग्रेस रघुवीर सहाय 44.24
1971 कांग्रेस करन सिंह यादव 34.19
1980 कांग्रेस मोहम्मद असरार अहमद 38.28
1984 कांग्रेस सलीम इकबाल शेरवानी 44.59
जनाधार घटा और हारती रही हारी कांग्रेस
1962 प्रत्याशी रघुवीर सहाय 46613 (21.93 फीसदी)
1967 ए हरनामी 54670 (18 फीसदी)
1977 मुशीर अहमद 88904 (26.13 फीसदी)
1989: पूर्व मुख्यमंत्री राम नरेश यादव 133626 (27.82 फीसदी)
1991 सलीम इकबाल शेरवानी 76680 (17.08 फीसदी)
1996 परवीन आजाद 21449 (4.06 फीसदी)
1998 ओमकार सिंह 9532 ( 1.51 फीसदी )
1999 शांति देवी 26418 (4.37 फीसदी)
2004 महबूब हुसैन अंसारी 20359 (3.45 फीसदी)
2009: सलीम शेरवानी 193834 (13.29 फीसदी)
2019 सलीम इकबाल शेरवानी 51947 (4.8 फीसदी)
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सपा के आदित्य यादव किस्मत आजमा रहे हैं। कांग्रेसी उनके साथ ही जुटे हैं, लेकिन कांग्रेसियों के लिए परंपरागत मतों को सपा की ओर मोड़ पाना मुश्किल साबित हो रहा है, क्योंकि भाजपा ने खासकर उन मतदाताओं पर डोरे डाले हैं जो सवर्ण हैं और कभी कांग्रेस के लिए समर्पित रहा करते थे। साल 1952-1957 तक बदन सिंह पहले कांग्रेसी सांसद थे। 1984 में सहानुभूति लहर में जीते सलीम इकबाल शेरवानी कांग्रेस के चुनाव चिह्न से जीते आखिरी सांसद रहे थे।
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साल 2014 के चुनाव में कांग्रेस मैदान में नहीं थी। कांग्रेस के प्रदेश सचिव अजीत यादव कहते हैं कांग्रेस सेक्युलर ताकतों को सपा से जोड़ रही है। भाजपा इसे लेकर उलझन में है। भाजपा के मीडिया प्रभारी आशीष शाक्य का कहना है कि कांग्रेस जनाधार खो चुकी है। उदाहरण पिछले चुनाव हैं। यही बात भाजपा के पन्ना प्रमुखों ने भी बताई है। इसलिए तमाम लोग जो अतीत में कांग्रेस के साथ थे, अब भाजपा के साथ आ रहे हैं।
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कब-कब जीती कांग्रेस, कुल कितने प्रतिशत मिले मतसाल
1952 कांग्रेस बदन सिंह 54.21
1957 कांग्रेस रघुवीर सहाय 44.24
1971 कांग्रेस करन सिंह यादव 34.19
1980 कांग्रेस मोहम्मद असरार अहमद 38.28
1984 कांग्रेस सलीम इकबाल शेरवानी 44.59
जनाधार घटा और हारती रही हारी कांग्रेस
1962 प्रत्याशी रघुवीर सहाय 46613 (21.93 फीसदी)
1967 ए हरनामी 54670 (18 फीसदी)
1977 मुशीर अहमद 88904 (26.13 फीसदी)
1989: पूर्व मुख्यमंत्री राम नरेश यादव 133626 (27.82 फीसदी)
1991 सलीम इकबाल शेरवानी 76680 (17.08 फीसदी)
1996 परवीन आजाद 21449 (4.06 फीसदी)
1998 ओमकार सिंह 9532 ( 1.51 फीसदी )
1999 शांति देवी 26418 (4.37 फीसदी)
2004 महबूब हुसैन अंसारी 20359 (3.45 फीसदी)
2009: सलीम शेरवानी 193834 (13.29 फीसदी)
2019 सलीम इकबाल शेरवानी 51947 (4.8 फीसदी)