{"_id":"0b47bf00396dd09d06bd09bb80e9ffe2","slug":"come-on-back-foot-under-pressure-police-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बैकफुट पर आई ‘अंडर प्रेशर’ पुलिस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बैकफुट पर आई ‘अंडर प्रेशर’ पुलिस
उझानी (बदायूं)
Updated Thu, 12 Mar 2015 12:23 AM IST
विज्ञापन
गद्दीटोला मामले में पहले दिन से पुलिस की किरकिरी होती रही है। बदले की भावना से कार्रवाई हो या फिर पीड़ितों की नामजदगी, दोनों में ही उसे मुंह की खानी पड़ी। भारतीय किसान यूनियन और बहुजन किसान दल ने जब आंदोलन की राह पकड़ी तो अफसरों को सच्चाई का अहसास हो गया। यहां तक कि बसपा विधायक मसर्रत अली उर्फ हाजी बिट्टन और सिनोद शाक्य ने भी पुलिस को अंडर प्रेशर रखने में अहम भूमिका निभा दी।
कानून के जानकारों की मानें तो पुलिस ने मारपीट के आरोपी की गिरफ्तारी के लिए जो रुख अख्तियार किया, वो फिल्मों में ज्यादा देखने को मिलता है। पहले दिन से सुर्खियों में रहे पूरे मामले में अहम बात यह कि पुलिस कर्मियों ने बेगुनाहों को भी नहीं बख्शा था। चूंकि पीड़ितों में किशोरी समेत बेवा भी शामिल रही, सो पूरे मोहल्ले के लोग एकजुट हो गए। भारतीय किसान यूनियन और बहुजन किसान दल के नेताओं ने पूर्व नगर अध्यक्ष नरोत्तम शाक्य की वजह से आवाज बुलंद की। बदायूं समेत कोतवाली के सामने धरना-प्रदर्शन भी किया गया।
दो दिन पहले बसपा विधायक मसर्रत अली उर्फ हाजी बिट्टन और सिनोद शाक्य मौके पर पहुंचे तो उन्होंने भी पुलिस को ही आडे़े हाथ लिया। उन्होंने यहां तक कह दिया था कि पुलिस के खिलाफ कार्रवाई के लिए पीड़ित तहरीर दे तो वह विधानसभा में मामला उठाने को तैयार है। बसपा विधायकों के साथ भाकियू और बीकेडी ने जब पूरा मामला होल्ड कर लिया तो पुलिस अफसर भी बीच का रास्ता खोजने में जुट गए थे। एसपी सिटी अनिल यादव के सामने भी पीड़ितों ने हकीकत बयां कर दी थी। पुलिस को अंतत: ‘अंडर प्रेशर’ आना पड़ गया।
विज्ञापन
सीओ, उझानी सतीशचंद्र शर्मा ने बताया कि जांच में जिन पुलिस कर्मियों की भूमिका संदिग्ध रही, उन सभी पर कार्रवाई की जा चुकी है। एक अन्य पहलू पर भी जांच चल रही है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उन्हें छिपाया नहीं जाएगा। पुलिस कर्मियों से कहा गया है कि वह कानून के दायरे में रहकर ही कार्रवाई करें।
विज्ञापन
कानून के जानकारों की मानें तो पुलिस ने मारपीट के आरोपी की गिरफ्तारी के लिए जो रुख अख्तियार किया, वो फिल्मों में ज्यादा देखने को मिलता है। पहले दिन से सुर्खियों में रहे पूरे मामले में अहम बात यह कि पुलिस कर्मियों ने बेगुनाहों को भी नहीं बख्शा था। चूंकि पीड़ितों में किशोरी समेत बेवा भी शामिल रही, सो पूरे मोहल्ले के लोग एकजुट हो गए। भारतीय किसान यूनियन और बहुजन किसान दल के नेताओं ने पूर्व नगर अध्यक्ष नरोत्तम शाक्य की वजह से आवाज बुलंद की। बदायूं समेत कोतवाली के सामने धरना-प्रदर्शन भी किया गया।
विज्ञापन
दो दिन पहले बसपा विधायक मसर्रत अली उर्फ हाजी बिट्टन और सिनोद शाक्य मौके पर पहुंचे तो उन्होंने भी पुलिस को ही आडे़े हाथ लिया। उन्होंने यहां तक कह दिया था कि पुलिस के खिलाफ कार्रवाई के लिए पीड़ित तहरीर दे तो वह विधानसभा में मामला उठाने को तैयार है। बसपा विधायकों के साथ भाकियू और बीकेडी ने जब पूरा मामला होल्ड कर लिया तो पुलिस अफसर भी बीच का रास्ता खोजने में जुट गए थे। एसपी सिटी अनिल यादव के सामने भी पीड़ितों ने हकीकत बयां कर दी थी। पुलिस को अंतत: ‘अंडर प्रेशर’ आना पड़ गया।
विज्ञापन
सीओ, उझानी सतीशचंद्र शर्मा ने बताया कि जांच में जिन पुलिस कर्मियों की भूमिका संदिग्ध रही, उन सभी पर कार्रवाई की जा चुकी है। एक अन्य पहलू पर भी जांच चल रही है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उन्हें छिपाया नहीं जाएगा। पुलिस कर्मियों से कहा गया है कि वह कानून के दायरे में रहकर ही कार्रवाई करें।