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होली के रंग टेसू के संग
बदायूं, ब्यूरो
Updated Sun, 20 Mar 2016 11:34 PM IST
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टेसू
- फोटो : अमर उजाला
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कादरचौक क्षेत्र में डेढ़ सौ एकड़ में हैं टेसू के वन
‘वसंत कामदेव का सहायक है तो टेसू वसंत का श्रृंगार’ फाल्गुन पूर्णिमा आते-आते टेसू के फूल दूर से ही अपने ओर आकर्षित करने लगते हैं। इन दिनों ये पूर्ण परिपक्वहो जाते हैं। हूबहू दीपक की लौ के आकार और रंग के कारण अंग्रेज साहित्यकारों ने इसे ‘फ्लेम आफ फारेस्ट’ यानी ‘वन ज्योति’ नाम भी दिया। लाल केसरिया रंग के टेसू के फूल वसंत के उद्दीपनकारी रूप को परिलक्षित करते हैं। टेसू को पलास, परसा, ढाक और केसू आदि नाम से जाना जाता है। तोता की चोंच के समान फूल का आकार होने के कारण इसे किंशुक नाम भी दिया गया है।
प्चीरान काल में इन्हीं फूलों के रंगों से होती थी होली
कादरचौक। सामाजिक सरोकारों से लेकर साहित्य रंजन में भी पलाश के फूल का अपना महत्व रहा है। प्राचीन ग्रंथों में भी इसका उल्लेख मिलता है। होली पर इसके फूलों के रंगों का बड़ा महत्व रहा था। आज भी कुछ लोग त्वचा का नुकसान की जगह लाभ पहुंचाने वाले टेसू के फूलों से रंग निकालकर होली खेलते हैं।
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टेसू का पेड़ से गिरते फूल ऐसे लगते हैं मानो पेड़ खुद अंजुलियों में भरकर रक्त पूष्प भूमि पर न्योछावर कर रहे हैं। नीरस मन भी पुलकित हो उठता है। पलाश के बन समाप्त हो चले हैं। कादरचौक क्षेत्र में जहां एक हजार एकड़ में पलाश के वन थे, सीमित परिक्षेत्र में सिमट कर रह गए हैं।
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पलाश के पत्ता शुद्धता का प्रतीक
कादरचौक। पलाश यानी टेसू के पत्तों से दोना पत्तल भी बनाए जाते हैं। कहा जाता है कि इसके पत्तल में भोजन करने से चांदी के बर्तन में भोजन करने का लाभ और फल प्राप्त होता है। हांलाकि टेसू के फूलों को देव अर्चना से दूर रखा गया है।
... कितने वसंत देख पाएगा पलाश वन
कादरचौक। क्षेत्र में ककोड़ा, कादरचौक, भूड़ा भदरौल में टेसू के वनों के संरक्षण के प्रति वन विभाग उदासीन है। लगातार पेड़ों कटान ो रहा है। जलौनी लकड़ी भी लोग काट ले जाते हैं। यही वजह है पलाश का वन क्षेत्र तेजी से घट रहा है। प्रकृति प्रेमियों को चिंता है कि पलाश के वन क्षेत्र से समाप्त न हो जाएं।
औषधीय गुणों से भरपूर है टेसू
कादरचौक। टेसू के जड़ से लेकर पत्ता तक औषधीय गुणों से भरपूर है। इसमे नपुंसकता, चोट, चर्मरोग, नेत्रज्योति सहित तमाम रोगों के उपचार में उपयोग किया जाता है। आयुर्वेद के मर्मज्ञ इसकी महत्व का अच्छी तरह जानते हैं।
शिव के अभिशाप से अंगारे वने फूल
कादरचौक। पैाराणिक कथाओं के दौरान प्रसंगों में आता है कि कामदेव ने इसी वृक्ष पर बैठकर भगवान शिव की तपस्या भंग की थी। शिव ने क्रोध में अपनी तीसरा नेत्र खोल कामदेव को भस्म कर दिया। वृक्ष जलने लगे तो उन्होंने शिव की प्रार्थना कर अपने का बचाया। मानते हैं कि इसी वजह से शिव के दहते हुए तीसरे नेत्र की भांति इसके फूल हो गए।
राज्य पुष्प का गौरव प्राप्त है टेसू फूल को
कादरचौक। पलाश का फूल उत्तर प्रदेश सरकार का राज्य पुष्प है। इसको भारतीय डाक विभाग द्वारा डाक टिकट पर भी स्थन दिया गया है।