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क्रय केंद्रों की जिओ टैगिंग पूरी, एक प्रभारी को दो केंद्रों का प्रभार
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बदायूं। अधिकारिक रूप से धान खरीद एक अक्टूबर से शुरू हो गई है। हालांकि, अब तक क्रय केंद्रों पर धान का दाना नहीं पहुंचा है। माना जा रहा है कि अभी क्रय केंद्रों पर धान की आवक में कम से कम 15 दिन का समय लग जाएगा। इस बीच क्रय केंद्र प्रभारियों की तैनाती पर ही सवाल उठने लगे हैं। धान खरीद नीति के अनुसार एक प्रभारी को एक ही केंद्र पर तैनात किया जा सकता है, लेकिन खाद्य एवं विपणन विभाग ने नियमों को दरकिनार कर एक व्यक्ति को दो-दो केंद्रों का प्रभार दे दिया है।
जिले में इस बार धान खरीद के लिए 31 क्रय केंद्र बनाए गए हैं। इनमें सबसे ज्यादा 12 क्रय केंद्र पीसीएफ के हैं। नैफेड के आठ, विपणन शाखा के सात, एसएफसी और एफसीआई के दो-दो क्रय केंद्र हैं। किसी तरह की गड़बड़ी रोकने के लिए क्रय केंद्रों की जिओ टैगिंग भी की गई है। एक खास मोबाइल ऐप के जरिए अधिकारी इन क्रय केंद्रों पर नजर रख सकेंगे। टैगिंग का काम सभी 31 केंद्रों पर पूरा कर लिया गया है। धान खरीद में किसी तरह की दिक्कत न हो इसके लिए वारदाना की भी कोई कमी नहीं है। इस बीच एक ही प्रभारी को दो केंद्रों के प्रभार का मामला भी सामने आया है। क्रय नीति को दरकिनार करते हुए विभाग ने मुकेश कुमार को जगत और मंशा नगला, आलोक को लभारी और उझानी क्रय केंद्र का चार्ज दे दिया है। इसके अलावा भी कुछ लोगों पर एक से ज्यादा केंद्रों का प्रभार है।
धान खरीद की पुरानी नीतियों से सबक लेते हुए इस बार कई तरह के बदलाव किए गए थे। इसके बाद भी अधिकारी पुराना ढर्रा ही अपनाने पर तुले हैं। खरीद नीति के अनुसार क्रय केंद्रों का निर्धारण इस तरह किया जाना चाहिए था कि किसान को 15 किमी से ज्यादा न आना हो। क्रय केंद्रों के निर्धारण में इसका भी ध्यान नहीं रखा गया है।
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धान खरीद नीति में एक प्रभारी को एक ही केंद्र का प्रभार दिए जाने का नियम है। स्टाफ और संसाधनों की कमी के चलते कुछ प्रभारियों को दो-दो केंद्रों का प्रभार देना पड़ा है। इस संबंध में उच्च अधिकारियों को अवगत कराने के बाद ही तैनाती की गई है। यह वैकल्पिक व्यवस्था है। क्रय केंद्रों पर अभी धान की आवक शुरू नहीं हुई है।
- प्रकाश नारायण, डिप्टी आरएमओ
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जिले में इस बार धान खरीद के लिए 31 क्रय केंद्र बनाए गए हैं। इनमें सबसे ज्यादा 12 क्रय केंद्र पीसीएफ के हैं। नैफेड के आठ, विपणन शाखा के सात, एसएफसी और एफसीआई के दो-दो क्रय केंद्र हैं। किसी तरह की गड़बड़ी रोकने के लिए क्रय केंद्रों की जिओ टैगिंग भी की गई है। एक खास मोबाइल ऐप के जरिए अधिकारी इन क्रय केंद्रों पर नजर रख सकेंगे। टैगिंग का काम सभी 31 केंद्रों पर पूरा कर लिया गया है। धान खरीद में किसी तरह की दिक्कत न हो इसके लिए वारदाना की भी कोई कमी नहीं है। इस बीच एक ही प्रभारी को दो केंद्रों के प्रभार का मामला भी सामने आया है। क्रय नीति को दरकिनार करते हुए विभाग ने मुकेश कुमार को जगत और मंशा नगला, आलोक को लभारी और उझानी क्रय केंद्र का चार्ज दे दिया है। इसके अलावा भी कुछ लोगों पर एक से ज्यादा केंद्रों का प्रभार है।
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धान खरीद की पुरानी नीतियों से सबक लेते हुए इस बार कई तरह के बदलाव किए गए थे। इसके बाद भी अधिकारी पुराना ढर्रा ही अपनाने पर तुले हैं। खरीद नीति के अनुसार क्रय केंद्रों का निर्धारण इस तरह किया जाना चाहिए था कि किसान को 15 किमी से ज्यादा न आना हो। क्रय केंद्रों के निर्धारण में इसका भी ध्यान नहीं रखा गया है।
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धान खरीद नीति में एक प्रभारी को एक ही केंद्र का प्रभार दिए जाने का नियम है। स्टाफ और संसाधनों की कमी के चलते कुछ प्रभारियों को दो-दो केंद्रों का प्रभार देना पड़ा है। इस संबंध में उच्च अधिकारियों को अवगत कराने के बाद ही तैनाती की गई है। यह वैकल्पिक व्यवस्था है। क्रय केंद्रों पर अभी धान की आवक शुरू नहीं हुई है।
- प्रकाश नारायण, डिप्टी आरएमओ