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स्वास्थ्य विभाग बताएगा ब्लैक स्पॉट के सबसे नजदीक का अस्पताल
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खेड़ा नवादा चौराहा। संवाद
- फोटो : BADAUN
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बदायूं। सड़क हादसों में घायलों और मृतकों का आंकड़ा कम करने के लिए अब सड़क सुरक्षा सलाहकार समिति में स्वास्थ्य विभाग भी नई भूमिका निभाएगा। जिले में चिह्नित ब्लॉक स्पॉट पर स्वास्थ्य विभाग संकेतक लगाने के साथ यहां साइन बोर्ड भी लगाएगा कि संबंधित दुर्घटना बाहुल्य स्थान से सबसे नजदीकी अस्पताल कहां और किस रोड पर है। स्वास्थ्य विभाग ने इसके लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं।
इधर, स्वास्थ्य विभाग तो घायलों को अस्पताल तक पहुंचाने का इंतजाम कर रहा है, लेकिन दूसरे जिम्मेदार विभाग ये नहीं सोच रहे कि आखिर हादसों पर लगाम कैसे लगे।
जिले में स्टेट और नेशनल हाईवे के साथ जनपदीय मार्गों पर 14 ब्लैक स्पॉट हैं। इनमें मुजरिया चौराहा, रानेट चौराहा, ओरछी चौराहा समेत कई ऐसे ब्लैक स्पॉट हैं जो भीषण सड़क हादसों के लिए बदनाम हैं। जिले भर में कुछ स्थानों के ब्लैक स्पॉट पर लोक निर्माण विभाग ने गति सीमा नियंत्रित रखने, सावधानी बरतने के साथ चेतावनी भरे बोर्ड और संकेतक लगा रखे हैं, लेकिन सड़क हादसों में मृतकों की संख्या कम नहीं हो रही। इसकी एक वजह यह भी है कि हादसों में घायलों को अस्पताल पहुंचाने में देरी होती है। समय से इलाज न मिलने के कारण कई लोगों की जान चली जाती है। शासन स्तर से दिशा निर्देशों के बाद सड़क सुरक्षा सलाहकार समिति की बैठक में स्वास्थ्य विभाग को जिम्मेदारी दे दी गई है।
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स्वास्थ्य विभाग सभी ब्लैक स्पॉट पर संकेतकों के साथ नजदीकी अस्पताल के संबंध में सूचना का बोर्ड भी लगाएगा।
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जिले में ये हैं ब्लैक स्पॉट
बिनावर- मलगांव फाटक और घटपुरी
उझानी- बुटला दौलत
सिविल लाइंस- मेडिकल कॉलेज तिराहा, खेड़ा नवादा, एआरटीओ चौराहा
बिसौली- रानेट चौराहा, हतसा
फैजगंज बेहटा- ओरछी चौराहा
सहसवान- खंदक
जरीफनगर - उस्मानपुर
मुजरिया- मुजरिया चौराहा, कौल्हाई
अलापुर- उघैनी पुलिया
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ब्लैक स्पॉट घोषित तो कर दिए, न लगाया बोर्ड और न लगाए संकेतक
भले ही स्वास्थ्य विभाग हादसों में घायलों को ब्लैक स्पॉट के नजदीक अस्पताल पहुंचाने के लिए संकेतक लगवा दे, लेकिन सवाल ये है कि हादसों पर लगाम कैसे लगे, जबकि जिम्मेदार खामोश बैठे हैं। बदायूं जिले में करीब डेढ़ साल पहले 38 ब्लैक स्पॉट थे। जिला प्रशासन, एआरटीओ, पीडब्ल्यूडी और पुलिस के सर्वे में इनकी संख्या घटकर अब केवल 14 रह गई है। यह ब्लैक स्पॉट ऐसे हैं जहां हर समय भीड़भाड़ रहती है। इससे हादसे भी ज्यादा होते हैं लेकिन यहां किसी प्रकार का बोर्ड नहीं लगाया गया है और न ही संकेतक आदि लगाए गए हैं, जिससे वाहन ड्राइवर आगे की स्थिति के बारे में जान सके लेकिन यहां कोई ऐसा सुधार नहीं किया गया है। इसीलिए शायद हादसों की संख्या भी बढ़ रही है।
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मेडिकल कॉलेज तिराहे पर हो चुकी है पांच लोगों की मौत
मेडिकल कॉलेज तिराहा सबसे व्यस्त बन गया है। यहां पुलिस के रिकॉर्ड के अनुसार तीन साल में छह हादसे हुए, पांच लोगों की मौत हुई और चार लोग घायल हुए जबकि एआरटीओ चौराहे पर तीन साल में छह हादसे, तीन लोगों की मौत और तीन लोग घायल हुए। इसके अलावा और भी घटनाएं हुईं हैं, जिनका पुलिस के पास रिकॉर्ड नहीं है। घायलों की संख्या तो गिनाई भी नहीं जा सकती।
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जहां ज्यादा घटनाएं होती हैं। उस स्थान को ब्लैक स्पॉट घोषित किया गया है। यहां बोर्ड आदि लगाने की जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी की है। विभाग को सूची भेज दी गई है।
- अब्दुल सत्तार खां, यातायात प्रभारी
-
इसके लिए तैयारियां की जा रही हैं। लोक निर्माण विभाग और परिवहन विभाग से सभी ब्लैक स्पॉट की सूची मांगी गई है। सूची मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय, सीएमओ
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इधर, स्वास्थ्य विभाग तो घायलों को अस्पताल तक पहुंचाने का इंतजाम कर रहा है, लेकिन दूसरे जिम्मेदार विभाग ये नहीं सोच रहे कि आखिर हादसों पर लगाम कैसे लगे।
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जिले में स्टेट और नेशनल हाईवे के साथ जनपदीय मार्गों पर 14 ब्लैक स्पॉट हैं। इनमें मुजरिया चौराहा, रानेट चौराहा, ओरछी चौराहा समेत कई ऐसे ब्लैक स्पॉट हैं जो भीषण सड़क हादसों के लिए बदनाम हैं। जिले भर में कुछ स्थानों के ब्लैक स्पॉट पर लोक निर्माण विभाग ने गति सीमा नियंत्रित रखने, सावधानी बरतने के साथ चेतावनी भरे बोर्ड और संकेतक लगा रखे हैं, लेकिन सड़क हादसों में मृतकों की संख्या कम नहीं हो रही। इसकी एक वजह यह भी है कि हादसों में घायलों को अस्पताल पहुंचाने में देरी होती है। समय से इलाज न मिलने के कारण कई लोगों की जान चली जाती है। शासन स्तर से दिशा निर्देशों के बाद सड़क सुरक्षा सलाहकार समिति की बैठक में स्वास्थ्य विभाग को जिम्मेदारी दे दी गई है।
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स्वास्थ्य विभाग सभी ब्लैक स्पॉट पर संकेतकों के साथ नजदीकी अस्पताल के संबंध में सूचना का बोर्ड भी लगाएगा।
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जिले में ये हैं ब्लैक स्पॉट
बिनावर- मलगांव फाटक और घटपुरी
उझानी- बुटला दौलत
सिविल लाइंस- मेडिकल कॉलेज तिराहा, खेड़ा नवादा, एआरटीओ चौराहा
बिसौली- रानेट चौराहा, हतसा
फैजगंज बेहटा- ओरछी चौराहा
सहसवान- खंदक
जरीफनगर - उस्मानपुर
मुजरिया- मुजरिया चौराहा, कौल्हाई
अलापुर- उघैनी पुलिया
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ब्लैक स्पॉट घोषित तो कर दिए, न लगाया बोर्ड और न लगाए संकेतक
भले ही स्वास्थ्य विभाग हादसों में घायलों को ब्लैक स्पॉट के नजदीक अस्पताल पहुंचाने के लिए संकेतक लगवा दे, लेकिन सवाल ये है कि हादसों पर लगाम कैसे लगे, जबकि जिम्मेदार खामोश बैठे हैं। बदायूं जिले में करीब डेढ़ साल पहले 38 ब्लैक स्पॉट थे। जिला प्रशासन, एआरटीओ, पीडब्ल्यूडी और पुलिस के सर्वे में इनकी संख्या घटकर अब केवल 14 रह गई है। यह ब्लैक स्पॉट ऐसे हैं जहां हर समय भीड़भाड़ रहती है। इससे हादसे भी ज्यादा होते हैं लेकिन यहां किसी प्रकार का बोर्ड नहीं लगाया गया है और न ही संकेतक आदि लगाए गए हैं, जिससे वाहन ड्राइवर आगे की स्थिति के बारे में जान सके लेकिन यहां कोई ऐसा सुधार नहीं किया गया है। इसीलिए शायद हादसों की संख्या भी बढ़ रही है।
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मेडिकल कॉलेज तिराहे पर हो चुकी है पांच लोगों की मौत
मेडिकल कॉलेज तिराहा सबसे व्यस्त बन गया है। यहां पुलिस के रिकॉर्ड के अनुसार तीन साल में छह हादसे हुए, पांच लोगों की मौत हुई और चार लोग घायल हुए जबकि एआरटीओ चौराहे पर तीन साल में छह हादसे, तीन लोगों की मौत और तीन लोग घायल हुए। इसके अलावा और भी घटनाएं हुईं हैं, जिनका पुलिस के पास रिकॉर्ड नहीं है। घायलों की संख्या तो गिनाई भी नहीं जा सकती।
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जहां ज्यादा घटनाएं होती हैं। उस स्थान को ब्लैक स्पॉट घोषित किया गया है। यहां बोर्ड आदि लगाने की जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी की है। विभाग को सूची भेज दी गई है।
- अब्दुल सत्तार खां, यातायात प्रभारी
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इसके लिए तैयारियां की जा रही हैं। लोक निर्माण विभाग और परिवहन विभाग से सभी ब्लैक स्पॉट की सूची मांगी गई है। सूची मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय, सीएमओ