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अस्पताल कॉलोनी में मामूली बरसात में टपकती हैं छतें

Tue, 14 Dec 2021 01:22 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 14 Dec 2021 01:22 AM IST
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Civic Amenities
महिला अस्पताल परिसर में बने आवास। संवाद - फोटो : BADAUN
बदायूं। महिला अस्पताल के पीछे स्वास्थ्य विभाग की कॉलोनी में कर्मचारियों के परिवार जर्जर आवासों में रहने के लिए मजबूर हैं। आवासों के रखरखाव का कोई ठोस इंतजाम नहीं है। कई बार यहां रहने वाले कर्मचारी ही निजी तौर पर घरों की मरम्मत करा लेते हैं। इसके बावजूद समस्या कम नहीं हो रही।
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जिले में सरकारी आवासों के स्थिति बेहद खराब है। शिक्षा विभाग से लेकर स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी तक जर्जर आवासों में रहने के लिए मजबूर हैं। अधिकारियों को भी इन आवासों की दुर्दशा के बारे में जानकारी है। उसके बावजूद इन आवासों में काम नहीं कराया जाता है। ऐसे में कई आवासों की छत मामूली बरसात में टपकने लगती है। इस वजह से इन आवासों में रहने वाले परिवार अपनी जरूरतों के अनुसार काम कराते हैं ताकि उन्हें रहने में किसी भी प्रकार की दिक्कत न हो। स्थानीय लोगों के अनुसार यहां सफाई व्यवस्था नाम मात्र को हो पा रही है। ऐसे में कॉलोनी में बड़ी-बड़ी घास उग आई है। साथ ही जगह-जगह कूड़े के ढेर एकत्र हो गए हैं। इनसे बदबू आने लगी है।
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यहां पर कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। इसकी वजह से स्थानीय लोगों को परेशानी होती है। अधिकारियों को इस ओर ध्यान देने की जरूरत है।
-मुरारी
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आवासों के रखरखाव के लिए अधिकारी स्तर से कुछ नहीं किया जा रहा है। अगर अधिकारी समय से इन आवासों को मरम्मत कराते रहें तो दिक्कत नहीं होगी।
-प्रेम शंकर
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सरकारी कॉलोनी में प्राइवेट तौर पर काम कराना पड़ता है। तब जाकर आवास रहने लायक होता है। वरना ये आवास अब तक गुजारे लायक नहीं रह गए होते।
-सूरज प्रकाश
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कॉलोनी के आसपास सफाई नहीं होने से झड़ियां उग आई हैं। ऐसे में कीड़े मकोड़ों का भी डर बना रहता है। ऐसे में प्राइवेट कर्मचारियों से सफाई करानी पड़ रही है।
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-अशरफ
जिला और जिला महिला अस्पताल में स्वास्थ्य विभाग के आवासीय भवनों को मरम्मत की जरूरत है। यह बात सही है कि कुछ भवन काफी जर्जर हो गए हैं और रहने योग्य नहीं है। इस संबंध में दोनों अस्पतालों के सीएमएस से रिपोर्ट मांगने और जेई से निरीक्षण कराने के बाद भवनों की मरम्मत, रंग-रोगन के लिए मेरे स्तर से शासन और उच्च अधिकारियों को लिखा जाएगा। - डॉ. विक्रम सिंह पुंडीर, सीएमओ
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