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रोडवेज बस स्टैंड : बजट नहीं, मॉडल डिपो बनाने का काम लटका
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बदायूं का रोडवेज बस डिपो। संवाद
- फोटो : BADAUN
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बदायूं। करीब दो साल के बाद भी परिवहन निगम के रोडवेज बस स्टैंड को मॉडल डिपो बनाने का काम शुरू नहीं हो सका है। जनवरी 2019 में डिपो प्रशासन की ओर से तत्कालीन डीएम के अनुमोदन के बाद डीपीआर और मॉडल डिपो बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। लेकिन अब तक इसके लिए बजट नहीं मिल सका है। अब परिवहन निगम मुख्यालय ने मॉडल डिपो को लेकर नए सिरे से सूचनाएं मांगी हैं।
शहर में रोडवेज बस स्टैंड काफी घने इलाके में है। रोडवेज बस स्टैंड के दोनों ओर चौराहे होने के साथ पास ही पुलिस लाइंस चौराहा और अंबेडकर पार्क चौराहा भी है। ऐसे में इस इलाके में भयंकर जाम की समस्या रहती है। बदायूं डिपो के बेड़े में कुल 168 बसें हैं। इनमें 131 निगम की और 37 बसें अनुबंधित हैं। इसके अलावा प्रतिदिन दूसरे जिलों की करीब 150 बसें यहां से होकर गुजरती हैं। बस स्टैंड पर यात्री सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं है। बिना बारिश ही यहां कई बार जलभराव हो जाता है। रोडवेज का वर्कशॉप दिसंबर 2020 में दातागंज तिराहा स्थित नए वर्कशॉप में शिफ्ट हो गया। इसके बाद डिपो परिसर में बसों का दबाव कुछ कम हुआ है, लेकिन हालात अब भी बदतर बने हुए हैं।
रोडवेज बस स्टैंड को मॉडल डिपो बनाने की कार्रवाई करीब दो साल के बाद भी आगे नहीं बढ़ सकी है। हालांकि, अब लखनऊ मुख्यालय ने स्थानीय प्रबंधन से एक बार फिर से नए सिरे से सूचनाएं मांगी हैं। पूछा गया है कि प्रतिदिन औसतन कितने बसें और कितने यात्री बस स्टैंड पर आते हैं। इसके साथ ही बदायूं होकर कौन-कौन से नेशनल और स्टेट हाईवे गुजरते हैं। यात्री सुविधाओं की स्थिति और डिपो के भवन को लेकर भी सूचनाएं मांगी गईं हैं। यह सूचनाएं डिपो प्रशासन ने शासन को भेज दी हैं।
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एक साल के बाद भी शिफ्ट नहीं हो सका डिपो का डीजल पंप
बदायूं डिपो का डीजल पंप एक साल के बाद भी नए वर्कशॉप में शिफ्ट नहीं हो सका है। बस स्टैंड से वर्कशॉप की दूरी दो किलोमीटर से ज्यादा है। वर्कशॉप से बसों को डीजल भरवाने के लिए बस स्टैंड पर ही आना होता है। ऐसे में डीजल की भी ज्यादा खपत होती है। इंडेन ऑयल की टीम भी डीजल पंप शिफ्ट करने के लिए निरीक्षण कर चुकी है। डीजल पंप को शिफ्ट करने के लिए अब तक संबंधित सभी विभागों से एनओसी की कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी है। दरअसल, डीजल पंप को एक स्थान से दूसरे स्थान पर शिफ्ट करने के लिए अब सिर्फ वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की हरी झंडी मिलनी बाकी है। अधिकारियों का कहना है कि डीजल पंप शिफ्ट होने के बाद मॉडल बस डिपो का काम शुरू होगा।
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यह बोले स्थानीय लोग
रोडवेज बस स्टैंड काफी घने इलाके में है। सड़कें भी संकरी हैं। बसों का दिन भर दबाव रहने के कारण यह जाम लगा रहता है। बस स्टैंड पर यात्री सुविधाओं का भी बुरा हाल है।
-मुइनुद्दीन, व्यापारी
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बस स्टैंड के अंदर पर्याप्त जगह न होने के कारण बसें रोड पर ही खड़ी रहती हैं। मॉडल बस स्टैंड बनने से आस-पास के कई चौराहों पर जाम की समस्या नहीं रहेगी।
-हिमांशु मलिक, व्यापारी
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रोडवेज बस स्टैंड की बदहाली के कारण सिर्फ यात्रियों को दिक्कत नहीं होती। दिन भर जाम के कारण आम लोगों के साथ आस-पास के व्यापारियों को भी काफी समस्या होती है।
-गौरव, व्यापारी
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वर्कशॉप शिफ्ट होने के बाद बस स्टैंड परिसर में ही काफी जगह हो गई है। अंदर पुराने और जर्जर भवन होने के कारण वहां बसें नहीं खड़ी हो सकतीं। ऐसे में समस्या होती है।-पिंटू, आम नागरिक
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रोडवेज बस स्टैंड मॉडल बस स्टैंड बनाया जाना प्रस्तावित है। करीब दो साल पहले शासन को अनुमोदन के बाद प्रस्ताव और डीपीआर भेजा जा चुका है। अभी काम चालू नहीं हो सका है। परिवहन निगम मुख्यालय ने अब डिपो प्रबंधन से नए सिरे से सूचनाएं मांगी हैं। सभी सूचनाएं मुख्यालय भेज दी गई हैं। अब बस स्टैंड को मॉडल स्टैड बनाने की प्रक्रिया जल्द शुरू होने की उम्मीद है।
- लक्ष्मण सिंह, एआरएम बदायूं डिपो
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शहर में रोडवेज बस स्टैंड काफी घने इलाके में है। रोडवेज बस स्टैंड के दोनों ओर चौराहे होने के साथ पास ही पुलिस लाइंस चौराहा और अंबेडकर पार्क चौराहा भी है। ऐसे में इस इलाके में भयंकर जाम की समस्या रहती है। बदायूं डिपो के बेड़े में कुल 168 बसें हैं। इनमें 131 निगम की और 37 बसें अनुबंधित हैं। इसके अलावा प्रतिदिन दूसरे जिलों की करीब 150 बसें यहां से होकर गुजरती हैं। बस स्टैंड पर यात्री सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं है। बिना बारिश ही यहां कई बार जलभराव हो जाता है। रोडवेज का वर्कशॉप दिसंबर 2020 में दातागंज तिराहा स्थित नए वर्कशॉप में शिफ्ट हो गया। इसके बाद डिपो परिसर में बसों का दबाव कुछ कम हुआ है, लेकिन हालात अब भी बदतर बने हुए हैं।
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रोडवेज बस स्टैंड को मॉडल डिपो बनाने की कार्रवाई करीब दो साल के बाद भी आगे नहीं बढ़ सकी है। हालांकि, अब लखनऊ मुख्यालय ने स्थानीय प्रबंधन से एक बार फिर से नए सिरे से सूचनाएं मांगी हैं। पूछा गया है कि प्रतिदिन औसतन कितने बसें और कितने यात्री बस स्टैंड पर आते हैं। इसके साथ ही बदायूं होकर कौन-कौन से नेशनल और स्टेट हाईवे गुजरते हैं। यात्री सुविधाओं की स्थिति और डिपो के भवन को लेकर भी सूचनाएं मांगी गईं हैं। यह सूचनाएं डिपो प्रशासन ने शासन को भेज दी हैं।
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एक साल के बाद भी शिफ्ट नहीं हो सका डिपो का डीजल पंप
बदायूं डिपो का डीजल पंप एक साल के बाद भी नए वर्कशॉप में शिफ्ट नहीं हो सका है। बस स्टैंड से वर्कशॉप की दूरी दो किलोमीटर से ज्यादा है। वर्कशॉप से बसों को डीजल भरवाने के लिए बस स्टैंड पर ही आना होता है। ऐसे में डीजल की भी ज्यादा खपत होती है। इंडेन ऑयल की टीम भी डीजल पंप शिफ्ट करने के लिए निरीक्षण कर चुकी है। डीजल पंप को शिफ्ट करने के लिए अब तक संबंधित सभी विभागों से एनओसी की कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी है। दरअसल, डीजल पंप को एक स्थान से दूसरे स्थान पर शिफ्ट करने के लिए अब सिर्फ वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की हरी झंडी मिलनी बाकी है। अधिकारियों का कहना है कि डीजल पंप शिफ्ट होने के बाद मॉडल बस डिपो का काम शुरू होगा।
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यह बोले स्थानीय लोग
रोडवेज बस स्टैंड काफी घने इलाके में है। सड़कें भी संकरी हैं। बसों का दिन भर दबाव रहने के कारण यह जाम लगा रहता है। बस स्टैंड पर यात्री सुविधाओं का भी बुरा हाल है।
-मुइनुद्दीन, व्यापारी
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बस स्टैंड के अंदर पर्याप्त जगह न होने के कारण बसें रोड पर ही खड़ी रहती हैं। मॉडल बस स्टैंड बनने से आस-पास के कई चौराहों पर जाम की समस्या नहीं रहेगी।
-हिमांशु मलिक, व्यापारी
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रोडवेज बस स्टैंड की बदहाली के कारण सिर्फ यात्रियों को दिक्कत नहीं होती। दिन भर जाम के कारण आम लोगों के साथ आस-पास के व्यापारियों को भी काफी समस्या होती है।
-गौरव, व्यापारी
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वर्कशॉप शिफ्ट होने के बाद बस स्टैंड परिसर में ही काफी जगह हो गई है। अंदर पुराने और जर्जर भवन होने के कारण वहां बसें नहीं खड़ी हो सकतीं। ऐसे में समस्या होती है।-पिंटू, आम नागरिक
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रोडवेज बस स्टैंड मॉडल बस स्टैंड बनाया जाना प्रस्तावित है। करीब दो साल पहले शासन को अनुमोदन के बाद प्रस्ताव और डीपीआर भेजा जा चुका है। अभी काम चालू नहीं हो सका है। परिवहन निगम मुख्यालय ने अब डिपो प्रबंधन से नए सिरे से सूचनाएं मांगी हैं। सभी सूचनाएं मुख्यालय भेज दी गई हैं। अब बस स्टैंड को मॉडल स्टैड बनाने की प्रक्रिया जल्द शुरू होने की उम्मीद है।
- लक्ष्मण सिंह, एआरएम बदायूं डिपो