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संसद में उठा अंडरग्राउंड केबल का मामला
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बदायूं। शहर में बिजली सप्लाई के लिए डाली गई अंडरग्राउंड बिजली लाइन का मुद्दा संसद तक पहुंच गया है। बुधवार को भाजपा सांसद डॉ. संघमित्रा मौर्य ने अंडरग्राउंड बिजली लाइन में भ्रष्टाचार का मुद्दा लोकसभा में उठाते हुए मामले में जांच और अंडरग्राउंड लाइन का काम फिर से कराने की मांग की।
प्रश्नकाल के दौरान सांसद डॉ. संघमित्रा मौर्य ने अंडरग्राउंड लाइन का मुद्दा उठाते हुए कहा कि बदायूं शहर में पूर्व की सरकार में 150 करोड़ की लागत से अंडरग्राउंड बिजली लाइन डाली गई थी। इस लाइन में काम से ज्यादा भ्रष्टाचार हुआ। 150 से ज्यादा स्थानों पर खामियां मिलीं, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। बारिश के दिनों में बेजुबानों के साथ आम लोगों की भी मौत होती है। जुलाई में विज्ञानानंद इंटर कॉलेज के गणित प्रवक्ता की भी अंडरग्राउंड केबल की चपेट में आने से मौत हो चुकी है। इससे पहले प्राइवेट लाइनमैन की जान जा चुकी है। कई अन्य लोगों की भी मौत हो चुकी है। शहर में जगह-जगह केबल बॉक्स और तार खुले हुए हैं। ऐसे में जनता सुरक्षित नहीं है। अंडरग्राउंड केबल मामले में जांच और भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कार्रवाई के साथ काम फिर से होना चाहिए ताकि शहर की जनता सुरक्षित रहे रहे। अंडरग्राउंड केबल मामला संसद तक पहुंचने के बाद एक बार फिर से गरमाता दिख रहा है। दरअसल, अंडरग्राउंड केबल को लेकर ही तत्कालीन सांसद धर्मेंद्र यादव और शहर विधायक व पूर्व राज्यमंत्री आबिद रजा के बीच तकरार हुई थी। यह तकरार अब तक अंदरखाने चल रही है। सदर से सपा के टिकट को लेकर भी इसी वजह से गफलत बनी हुई है।
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प्रश्नकाल के दौरान सांसद डॉ. संघमित्रा मौर्य ने अंडरग्राउंड लाइन का मुद्दा उठाते हुए कहा कि बदायूं शहर में पूर्व की सरकार में 150 करोड़ की लागत से अंडरग्राउंड बिजली लाइन डाली गई थी। इस लाइन में काम से ज्यादा भ्रष्टाचार हुआ। 150 से ज्यादा स्थानों पर खामियां मिलीं, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। बारिश के दिनों में बेजुबानों के साथ आम लोगों की भी मौत होती है। जुलाई में विज्ञानानंद इंटर कॉलेज के गणित प्रवक्ता की भी अंडरग्राउंड केबल की चपेट में आने से मौत हो चुकी है। इससे पहले प्राइवेट लाइनमैन की जान जा चुकी है। कई अन्य लोगों की भी मौत हो चुकी है। शहर में जगह-जगह केबल बॉक्स और तार खुले हुए हैं। ऐसे में जनता सुरक्षित नहीं है। अंडरग्राउंड केबल मामले में जांच और भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कार्रवाई के साथ काम फिर से होना चाहिए ताकि शहर की जनता सुरक्षित रहे रहे। अंडरग्राउंड केबल मामला संसद तक पहुंचने के बाद एक बार फिर से गरमाता दिख रहा है। दरअसल, अंडरग्राउंड केबल को लेकर ही तत्कालीन सांसद धर्मेंद्र यादव और शहर विधायक व पूर्व राज्यमंत्री आबिद रजा के बीच तकरार हुई थी। यह तकरार अब तक अंदरखाने चल रही है। सदर से सपा के टिकट को लेकर भी इसी वजह से गफलत बनी हुई है।
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