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कोरोना का खतरा भूल कछला गंगाघाट पर जुटे श्रद्धालु
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उझानी/ कछला। चिकित्सा विशेषज्ञ कोरोना की तीसरी लहर को लेकर चिंतित हैं। बावजूद इसके लोग लापरवाही बरतने से बाज नहीं आ रहे हैं। सावन के दूसरे सोमवार से एक दिन पहले कछला घाट पर सैकड़ों लोगों की भीड़ जुटी और गंगा में डुबकी लगाई। इस दौरान सामाजिक दूरी का पालन नहीं किया गया।
हर रविवार को कछला गंगाघाट पर लोग स्नान करने पहुंचते हैं। सावन में कछला घाट पर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या कई गुने बढ़ जाती है। रविवार को सुबह में बदायूं और कासगंज के छोर वाले घाटों पर शिवभक्तों पहुंचने शुरू हो गए और आस्था की डुबकी लगाने लगे। इस दौरा कछला घाट बम-बम भोले के जयकारों से गूंज उठा। स्नान के बाद भक्तों ने पहले गंगाजल भरा फिर पूजा-अर्चना की। अपराह्न तक कछला घाट पर लोगों के पहुंचने और गंगा स्नान करने का दौर जारी रहा।
कछला गंगाघाट पहुंचे प्रमोद कुमार और अंबरीश बाबू ने बताया कि कांवड़यात्रा पर रोक होने की वजह से शिवभक्त बिना कांवड़ के ही जलभर मंदिरों में जलाभिषेक कर रहे हैं। पिछले साल भी कांवड़यात्रा नहीं हुई थी। तब भी शिवभक्तों ने गंगाघाट से जल भरने के बाद मंदिरों में जलाभिषेक किया था।
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हर रविवार को कछला गंगाघाट पर लोग स्नान करने पहुंचते हैं। सावन में कछला घाट पर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या कई गुने बढ़ जाती है। रविवार को सुबह में बदायूं और कासगंज के छोर वाले घाटों पर शिवभक्तों पहुंचने शुरू हो गए और आस्था की डुबकी लगाने लगे। इस दौरा कछला घाट बम-बम भोले के जयकारों से गूंज उठा। स्नान के बाद भक्तों ने पहले गंगाजल भरा फिर पूजा-अर्चना की। अपराह्न तक कछला घाट पर लोगों के पहुंचने और गंगा स्नान करने का दौर जारी रहा।
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कछला गंगाघाट पहुंचे प्रमोद कुमार और अंबरीश बाबू ने बताया कि कांवड़यात्रा पर रोक होने की वजह से शिवभक्त बिना कांवड़ के ही जलभर मंदिरों में जलाभिषेक कर रहे हैं। पिछले साल भी कांवड़यात्रा नहीं हुई थी। तब भी शिवभक्तों ने गंगाघाट से जल भरने के बाद मंदिरों में जलाभिषेक किया था।
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