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लाइनें तो अभी भी लगेंगी....पर, शायद अब रुक जाए खाद के लिए मारामारी
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बदायूं। इफको की ओर से जिले को इस समय रोजाना चार सौ मीट्रिक टन के आसपास खाद आ रही है। इस वजह से इफको सेंटरों पर पर्याप्त यूरिया पहुुंचने लगी है। जिले में इफको के सेंटरों पर शुक्रवार को 2310 कट्टा खाद बंटने से रह गई, जबकि शनिवार सुबह 7872 कट्टा यूरिया और आ गई। वहीं अन्य कंपनी की भी 13670 कट्टा यूरिया और मिल गई, जिसको प्राइवेट दुकानों पर बांटा जाएगा। हालांकि इस बार ये खाद सरकारी कर्मचारियों की निगरानी में निजी दुकानों पर बंटवाई जाएगी।
पिछले काफी समय से जिले में खाद की संकट बना हुआ है, जबकि इस समय किसानों को सबसे ज्यादा जरूरत खाद की है। जिले में यूरिया का वितरण इफको की ओर से किया जाता है जो उसके द्वारा पीसीएफ को पर्याप्त मात्रा में दी जाती थी। लेकिन इफको और पीसीएफ की ओर से आपस में लेन देन को लेकर विवाद चल रहा है। इसकी वजह से इफको ने पीसीएफ को सप्लाई नहीं दी। इस वजह से जिले में खाद का संकट पैदा गया। हालांकि उनकी ओर से अपने सेंटरों पर खाद दी जा रही थी, लेकिन सेंटर कम होने की वजह से यहां किसानों की लंबी लाइन लगी रहती थी। वहीं प्राइवेट दुकानदार लगातार महंगे दामों पर यूरिया बेच रहे थे। अब जिले को 13670 कट्टा यूरिया प्राइवेट कंपनी की मिल गई है, जिसे जिले की 61 प्राइवेट दुकानों पर बंटवाया जाएगा। यह सरकारी कर्मचारी की निगरानी में बांटी जाएगी, ताकि किसानों को निर्धारित रेट पर ही खाद मुहैया हो सके। बिना कर्मचारी के मौजूदगी के कोई भी प्राइवेट दुकानदार खाद नहीं बेचेगा। उम्मीद है जल्द ही केंद्रों से किसानों की लाइन लगना बंद हो जाएगी।
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पिछले काफी समय से जिले में खाद की संकट बना हुआ है, जबकि इस समय किसानों को सबसे ज्यादा जरूरत खाद की है। जिले में यूरिया का वितरण इफको की ओर से किया जाता है जो उसके द्वारा पीसीएफ को पर्याप्त मात्रा में दी जाती थी। लेकिन इफको और पीसीएफ की ओर से आपस में लेन देन को लेकर विवाद चल रहा है। इसकी वजह से इफको ने पीसीएफ को सप्लाई नहीं दी। इस वजह से जिले में खाद का संकट पैदा गया। हालांकि उनकी ओर से अपने सेंटरों पर खाद दी जा रही थी, लेकिन सेंटर कम होने की वजह से यहां किसानों की लंबी लाइन लगी रहती थी। वहीं प्राइवेट दुकानदार लगातार महंगे दामों पर यूरिया बेच रहे थे। अब जिले को 13670 कट्टा यूरिया प्राइवेट कंपनी की मिल गई है, जिसे जिले की 61 प्राइवेट दुकानों पर बंटवाया जाएगा। यह सरकारी कर्मचारी की निगरानी में बांटी जाएगी, ताकि किसानों को निर्धारित रेट पर ही खाद मुहैया हो सके। बिना कर्मचारी के मौजूदगी के कोई भी प्राइवेट दुकानदार खाद नहीं बेचेगा। उम्मीद है जल्द ही केंद्रों से किसानों की लाइन लगना बंद हो जाएगी।
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