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अब चाइना भी लगा रहा ‘ग्रीन गोल्ड’ की चमक पर बट्टा
badaun
Updated Sat, 30 May 2015 07:25 PM IST
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औद्योगिक पहचान बना पाने में नाकामयाब बदायूं को मेंथा करोबार मिला तो इस जिले ने एशिया तक में अपना डंका बजा दिया था। मेंथा की वैरायटी में स्पियरमेंट, पिपरेटा, शिवालिक और तुलसा का एशिया के अलावा विश्व के अन्य देशों में भी धमक कायम रही। अभी भी स्थिति यह है कि मेंथा कारोबार से सरकार को लगभग साढ़े पांच करोड़ राजस्व की प्राप्ति होती है। यही नहीं, इस कारोबार से सवा लाख ग्रामीण और दो हजार से ज्यादा व्यवसायी जुड़े हुए हैं। बदायूं की मंडी का मेंथा यूएसए, चाइना, मैक्सिको, यूके, ब्राजील समेत अन्य देशों को निर्यात किया जाता है, लेकिन जर्मन ने सिंथेटिक मेंथा तैयार कर बदायूं जिले में मेंथा कारोबार समेत पूरे देश के मेंथा व्यापार को प्रभावित किया है। अब इसी तर्ज पर चाइना ने भी देश के हरे सोने के नाम से पहचान बनाने वाले मेंथा कारोबार को झटका दिया है। कारोबारी बताते हैं कि चाइना ने भी सिंथेटिक मेंथा बनाने का प्लांट लगवा लिया है। इससे जहां देश के मेंथा कारोबार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। बदायूं का कारोबार भी निचले पायदान पर आया है।
बदायूं में सन 1986 में मेंथा का उत्पादन और व्यापार शुरू हुआ। जो निरंतर अपने पैर पसारता चला गया। इस कारोबार के 400 डिस्टलेशन प्लांट, पांच फ्रैंसियल डिस्टलेशन प्लांट, छह चिल्ड यूनिट, 20 टेस्टिंग लैब लगी हुई हैं। 80 प्रतिशत तेल एक्सपोर्ट और 20 प्रतिशत तेल देश में प्रयोग किया जाता है। इस फसल को हरा सोना के नाम से भी जाना जाता है। रबी और खरीफ किसी भी फसल को कोई नुकसान नहीं होता है। जिले में प्रकाश केमिकल्स, सोना केमिकल्स, अग्रवाल ऐरोमेटिकल्स, शीतल केमिकल्स, डीके एक्सपोर्ट, खुशबू सिंसलेयर आदि कई बड़ी व्यापारिक फर्में हैं, जो इस कारोबार को आगे बढ़ाने में अपनी अहम भूमिका रखती हैं। किसानों से तेल खरीदने के बाद इसे आईसीडी पटपड़गंज भेजा जाता हैं। वहां से इसे मुंबई, फिर समुद्री जहाज के माध्यम से विदेशों को सप्लाई कर दिया जाता है।
स्पियरमेंट केवल बदायूं मे होता है पैदा
पिपरेटा बदायूं और बरेली में सर्वाधिक होता है, जबकि स्पियरमेंट सिर्फ बदायूं में होता है। बदायूं ने स्पियरमेंट की पैदावार में अपना अलग महत्व बनाया है। यहां की जमीन किसानों का पूरा साथ देती है।
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मेंथा अधिक पानी शोषक फसल है। जिले में अभी भी चार ब्लाक ऐसे हैं, जो भूगर्भ जलस्तर को लेकर डार्क जोन में शामिल हैं। इसलिए सरकार ने इस फसल को सब्सिडी बंद कर दी है। जिले में करीब 22 हजार हेक्टेयर में इसकी फसल होती थी, लेकिन अब धीरे-धीरे मक्का इस फसल का स्थान ले रही है। - आरएन वर्मा, जिला उद्यान अधिकारी
मेंथा फसल कम हो रही है। जर्मनी के बाद चाइना ने भी सिंथेटिक मेंथा प्लांट लगा लिया है। एशिया से देश का मेंथा कारोबार कम हुआ है। देश में गुटका में इसका इस्तेमाल सबसे अधिक होता था। कई प्रांतों में गुटका पर प्रतिबंध लग चुका है। इससे भी कारोबार प्रभावित है। फिलहाल मेंथा कारोबार का भविष्य अच्छा नहीं दिखाई दे रहा। - यादवेंद्र पटेल, मेंथा कारोबारी
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बदायूं में सन 1986 में मेंथा का उत्पादन और व्यापार शुरू हुआ। जो निरंतर अपने पैर पसारता चला गया। इस कारोबार के 400 डिस्टलेशन प्लांट, पांच फ्रैंसियल डिस्टलेशन प्लांट, छह चिल्ड यूनिट, 20 टेस्टिंग लैब लगी हुई हैं। 80 प्रतिशत तेल एक्सपोर्ट और 20 प्रतिशत तेल देश में प्रयोग किया जाता है। इस फसल को हरा सोना के नाम से भी जाना जाता है। रबी और खरीफ किसी भी फसल को कोई नुकसान नहीं होता है। जिले में प्रकाश केमिकल्स, सोना केमिकल्स, अग्रवाल ऐरोमेटिकल्स, शीतल केमिकल्स, डीके एक्सपोर्ट, खुशबू सिंसलेयर आदि कई बड़ी व्यापारिक फर्में हैं, जो इस कारोबार को आगे बढ़ाने में अपनी अहम भूमिका रखती हैं। किसानों से तेल खरीदने के बाद इसे आईसीडी पटपड़गंज भेजा जाता हैं। वहां से इसे मुंबई, फिर समुद्री जहाज के माध्यम से विदेशों को सप्लाई कर दिया जाता है।
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स्पियरमेंट केवल बदायूं मे होता है पैदा
पिपरेटा बदायूं और बरेली में सर्वाधिक होता है, जबकि स्पियरमेंट सिर्फ बदायूं में होता है। बदायूं ने स्पियरमेंट की पैदावार में अपना अलग महत्व बनाया है। यहां की जमीन किसानों का पूरा साथ देती है।
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मेंथा अधिक पानी शोषक फसल है। जिले में अभी भी चार ब्लाक ऐसे हैं, जो भूगर्भ जलस्तर को लेकर डार्क जोन में शामिल हैं। इसलिए सरकार ने इस फसल को सब्सिडी बंद कर दी है। जिले में करीब 22 हजार हेक्टेयर में इसकी फसल होती थी, लेकिन अब धीरे-धीरे मक्का इस फसल का स्थान ले रही है। - आरएन वर्मा, जिला उद्यान अधिकारी
मेंथा फसल कम हो रही है। जर्मनी के बाद चाइना ने भी सिंथेटिक मेंथा प्लांट लगा लिया है। एशिया से देश का मेंथा कारोबार कम हुआ है। देश में गुटका में इसका इस्तेमाल सबसे अधिक होता था। कई प्रांतों में गुटका पर प्रतिबंध लग चुका है। इससे भी कारोबार प्रभावित है। फिलहाल मेंथा कारोबार का भविष्य अच्छा नहीं दिखाई दे रहा। - यादवेंद्र पटेल, मेंथा कारोबारी