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मुसीबत बन सकते हैं कोर्ट के बाईपास दरवाजे
badaun
Updated Sat, 24 Jan 2015 07:24 PM IST
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कोर्ट परिसर की सुरक्षा को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। परिसर में प्रवेश के लिए बने मेन गेट के साथ चार बाईपास दरवाजे भी हैं। सुरक्षा के लिहाज से पांचों गेट अहम हैं लेकिन पुलिस मेन गेट के अलावा बाकी की सुरक्षा को दरकिनार कर रही है। जबकि कोर्ट परिसर से कई बार बंदियों के फरार होने की घटनाएं हो चुकी हैं। यही नहीं पिछले महीनों में एक न्यायिक मजिस्ट्रेट की कोर्ट के बाहर धमकी भरा पत्र भी चस्पा किया जा चुका है। जाहिर है कोर्ट परिसर के चार बाईपास दरवाजे सुरक्षा में सेंध लगा सकते हैं।
जिला जेल से रोज बंदी पेशी पर कोर्ट में आते हैं। इनमें कई शातिर अपराधी भी होते हैं। कई बंदियों की जान को खतरा भी रहता है। सुरक्षा व्यवस्था ठीक न होने की वजह से कई बार बंदियों के फरार होने की घटनाएं भी हो चुकी हैं। पिछले महीनों ही एक बंदी ने मौका पाकर फरार होने की कोशिश की थी। एक बार कोर्ट परिसर में दो पक्षों के बीच फायरिंग की घटना भी हो चुकी है। पुरानी घटनाओं से सबक लेने की पुलिस जरूरत नहीं समझती। परिसर की सुरक्षा में चार बाईपास दरवाजे सेंध लगा रहे हैं। इनको पुलिस ने भगवान भरोसे छोड़ दिया है।
काम नहीं कर रही पुलिस की तीसरी आंख
बदायूं। पुलिस की तीसरी आंख काम नहीं कर रही है। शहर के प्रमुख और संवेदनशील इलाकों में लगे सीसी कैमरे खराब हो गए हैं। पुलिस चौकियों पर लगाए गए पब्लिक एड्रस सिस्टम (पीएएस) ने भी दम तोड़ दिया है। खराब पड़े सीसी कैमरों का फायदा अपराधियों को मिल रहा है। कई बार अपराधी वारदात को अंजाम देकर निकल जाते हैं और पुलिस की तीसरी आंख उनको देख तक नहीं पाती।
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करीब एक साल पहले शहर के मथुरिया चौक, छह सड़का, लावेला चौक, खेड़ा नवादा, लालपुल तिराहा और महिला अस्पताल में सीसी कैमरे लगाए गए थे। जिन जगहों पर सीसी कैमरे लगाए गए हैं उनके पास ही इनका कंट्रोल रूम बनाया गया है। पीएएस का संचालन डिस्ट्रिक कंट्रोल रूम से होता है। खराब पड़े सीसी कैमरे और पीएएस किसी काम के साबित नहीं हो रहे हैं। गौर करने वाली बात यह है कि अगर सभी सीसी कैमरे दुरुस्त होते तो कई घटनाओं का खुलासा करने में पुलिस को दिक्कतें न आतीं। लावेला चौक के आसपास कई बार लूट की वारदातें हो चुकी हैं। खेड़ा नवादा इलाके में अक्सर चोरियां होती रहती हैं। इनके साथ मथुरिया चौक, छह सड़का भी काफी संवेदनशील इलाकों में शुमार हैं।
शहर के कुछ इलाकों में सीसी कैमरे खराब हो गए हैं। इनको ठीक कराने की जिम्मेदारी आरआई रेडियो को दी गई है। यह जरूरी है कि जिस उद्वेश्य से कैमरे लगाए गए हैं वह पूरा हो। जल्द सभी कैमरे दुरुस्त करा लिए जाएंगे।
-लल्लन सिंह, एसपी सिटी
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जिला जेल से रोज बंदी पेशी पर कोर्ट में आते हैं। इनमें कई शातिर अपराधी भी होते हैं। कई बंदियों की जान को खतरा भी रहता है। सुरक्षा व्यवस्था ठीक न होने की वजह से कई बार बंदियों के फरार होने की घटनाएं भी हो चुकी हैं। पिछले महीनों ही एक बंदी ने मौका पाकर फरार होने की कोशिश की थी। एक बार कोर्ट परिसर में दो पक्षों के बीच फायरिंग की घटना भी हो चुकी है। पुरानी घटनाओं से सबक लेने की पुलिस जरूरत नहीं समझती। परिसर की सुरक्षा में चार बाईपास दरवाजे सेंध लगा रहे हैं। इनको पुलिस ने भगवान भरोसे छोड़ दिया है।
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काम नहीं कर रही पुलिस की तीसरी आंख
बदायूं। पुलिस की तीसरी आंख काम नहीं कर रही है। शहर के प्रमुख और संवेदनशील इलाकों में लगे सीसी कैमरे खराब हो गए हैं। पुलिस चौकियों पर लगाए गए पब्लिक एड्रस सिस्टम (पीएएस) ने भी दम तोड़ दिया है। खराब पड़े सीसी कैमरों का फायदा अपराधियों को मिल रहा है। कई बार अपराधी वारदात को अंजाम देकर निकल जाते हैं और पुलिस की तीसरी आंख उनको देख तक नहीं पाती।
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करीब एक साल पहले शहर के मथुरिया चौक, छह सड़का, लावेला चौक, खेड़ा नवादा, लालपुल तिराहा और महिला अस्पताल में सीसी कैमरे लगाए गए थे। जिन जगहों पर सीसी कैमरे लगाए गए हैं उनके पास ही इनका कंट्रोल रूम बनाया गया है। पीएएस का संचालन डिस्ट्रिक कंट्रोल रूम से होता है। खराब पड़े सीसी कैमरे और पीएएस किसी काम के साबित नहीं हो रहे हैं। गौर करने वाली बात यह है कि अगर सभी सीसी कैमरे दुरुस्त होते तो कई घटनाओं का खुलासा करने में पुलिस को दिक्कतें न आतीं। लावेला चौक के आसपास कई बार लूट की वारदातें हो चुकी हैं। खेड़ा नवादा इलाके में अक्सर चोरियां होती रहती हैं। इनके साथ मथुरिया चौक, छह सड़का भी काफी संवेदनशील इलाकों में शुमार हैं।
शहर के कुछ इलाकों में सीसी कैमरे खराब हो गए हैं। इनको ठीक कराने की जिम्मेदारी आरआई रेडियो को दी गई है। यह जरूरी है कि जिस उद्वेश्य से कैमरे लगाए गए हैं वह पूरा हो। जल्द सभी कैमरे दुरुस्त करा लिए जाएंगे।
-लल्लन सिंह, एसपी सिटी