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Budaun News: सांस रोगी नवजातों को महिला अस्पताल में ही मिलगा इलाज

Wed, 19 Apr 2023 02:17 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 19 Apr 2023 02:17 AM IST
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Breathless newborns will get treatment only in women's hospital
बदायूं। जिला महिला अस्पताल की एसएनसीयू में अब तक सांस से पीड़ित बच्चों को इलाज देने के कोई संसाधन नहीं थे। पीलिया और सर्दी, जुकाम वाले बच्चों को यहां इलाज मिलता था, लेकिन सांस के मरीजों को बाहर भेजा जाता था। अब सांस से परेशान बच्चों को भी यहां इलाज मिल सकेगा। इसके लिए महिला अस्पताल प्रबंधन ने सीपैप मशीनें खरीदी हैं। मशीनों की खरीदारी पर 20 लाख रुपये का बजट खर्च किया गया है।
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जिला महिला अस्पताल में बीमार नवजात बच्चों के इलाज को पहले यहां संसाधन नहीं थे। करीब चार साल पहले यहां नवजातों को समय से इलाज दिए जाने को एसएनसीयू तैयार की गई। एसएनसीयू में बीमार बच्चों का समय से इलाज होने लगा इससे तमाम बच्चे समय पर इलाज मिलने की वजह से दुरुस्त हो गए, लेकिन यहां सांस की बीमारी से पीड़ित नवजातों को इलाज का कोई इंतजाम नहीं था। ऐसे में सांस से पीड़ित बच्चों को बाहर रेफर किया जाता था।
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बच्चे बाहर भेजे जाते तो कई बार समय से इलाज न मिल पाने की वजह से बच्चों की जान पर बन आती थी। समस्या को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन ने यहां सीपैप मशीनें खरीदने के लिए प्रस्ताव तैयार किया। प्रस्ताव पास होने के बाद 20 लाख का बजट जारी हुआ जिससे अब सीपैप मशीनों को खरीदा गया। इन मशीनों के सहारे सांस मरीज बच्चों को भी अब यहां इलाज मिलेगा।
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लखनऊ की टीम देने आएगी प्रशिक्षण
एसएनसीयू में चार सीपैप मशीनों की खरीदारी के बाद अब उनको किस तरह से चलाया जाए इसके लिए एसएनसीयू में तैनात स्टाफ को प्रशिक्षण दिया जाएगा। यहां पर तैनात स्टाफ को प्रशिक्षण देने के लिए लखनऊ से टीम आएगी। टीम यहां प्रशिक्षण के दौरान बताएगी कि किस तरह से बीमार बच्चों का इलाज मशीनों से किया जाएगा।


सांस के मरीज बच्चों को तुरंत मिल सकेगा उपचार
एसएनसीयू प्रभारी बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. संदीप वार्ष्णेय ने बताया कि सीपैप मशीन न होने की वजह से सांस के मरीज बच्चों को यहां इलाज नहीं मिल पाता था। कम समय वाले बच्चों के फेफड़े पूरी तरह से तैयार नहीं हो पाते हैं इससे उन्हें सांस लेने में तकलीफ होती है। अब इन मशीनों के प्रेशर से उनके फेफड़े पूरी तरह से काम करने लगेंगे। सीपैप मशीन आने से अब बच्चों को बाहर रेफर नहीं करना पड़ेगा।
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