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किताबें तो चार माह बाद मिलेंगी, तब तक पुरानी से पढ़ो

Mon, 03 Apr 2017 11:05 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ बदायूं
अमर उजाला ब्यूरो/ बदायूं Updated Mon, 03 Apr 2017 11:05 PM IST
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Books will be available after four months, then read from old
क‌िताबें - फोटो : अमर उजाला
किताबें तो चार माह बाद मिलेंगी, तब तक पुरानी से पढ़ो
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शिक्षा विभाग पुरानी किताबें जमा करने में लगा

भले ही एक अप्रैल से नया शैक्षणिक सत्र प्रारंभ कर दिया गया है लेकिन नई सरकार, नए निजाम में नए शैक्षणिक सत्र में पढ़ने वाले कक्ष एक से आठवीं तक के बच्चों को बेसिक शिक्षा परिषद से नि:शुल्क किताबें आने में समय लग जाएगा, ऐसे में उनको तब तक पुरानी किताबों से ही पढ़ना होगा। बेसिक शिक्षा विभाग ने इसके लिए पिछले साल बच्चों को दीं किताबों को वापस लेकर अन्य बच्चों को देने का बंदोबस्त किया है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के निर्देश पर शिक्षक बच्चों से पुरानी किताबें जमा कराने में लगे हुए हैं ताकि दूसरे बच्चों को जल्द से जल्द उनके जरिए पढ़ाया जा सके।
प्रदेश सरकार की ओर से बेसिक शिक्षा विभाग अपने प्राइमरी और जूनियर हाईस्कूलों के अलावा राजकीय इंटर कालेजों तक अनुदानित प्राइमरी और जूनियर हाईस्कूलों में पढ़ने वाले कक्षा एक से आठ तक के विद्यार्थियों को निशुल्क पुस्तकें उपलब्ध करती है। हर साल ये किताबें स्कूलों तक आने में कई महीनों का विलंब हो जाता है। एक अप्रैल से शैक्षिक सत्र शुरू होने के बावजूद पिछले साल ही जुलाई तक सारी किताबें आ सकीं। हालांकि विभागीय अधिकारी यह बताने की स्थिति में नहीं हैं कि इस बार किताबें कब तक आ सकेंगी लेकिन माना जा रहा है कि हो सकता है कि जुलाई में ही आ पाएंगे, क्योंकि शासन स्तर से किताबों के लिए टेंडर और प्रकाशकों को भुगतान आदि की प्रक्रिया में लग जाता है। नई सरकार बनने के बाद इसमें और विलंब हो सकता है, ऐसे में किताबें आने के चार महीनों में बच्चों को खाली न बैठना पड़े इसलिए उन्होंने उनको पुरानी किताबों से ही पढ़ाने की व्यवस्था की है।
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बदल सकता है सिलेबस
नई सरकार कक्षा एक से आठ तक के सिलेबस में इस शैक्षिक सत्र से बदलाव भी कर सकती है। ऐसा माना जा रहा है। अगर ऐसा हुआ तो सिलेबस निर्धारण में भी विलंब हो जाएगा। वहीं शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नई किताबों को लेकर सरकार से अभी कोई निर्देश नही आया है। बीएसए पीसी यादव का कहना है कि जब किताबें आएंगी तो स्कूलों में बच्चों को उनका वितरण कराया जाएगा, तब तक शिक्षकों से पुरानी किताबों से ही पढ़ाने को कहा गया है।
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